KHARAGPUR. भ्रष्टाचार और आय से अधिक संपत्ति के मामलों पर केंद्रीय जांच एजेंसियों का शिकंजा कसता जा रहा है. इसी कड़ी में एक बड़ी कार्रवाई करते हुए प्रवर्तन निदेशालय (ED) की टीम ने गुरुवार को रेलवे के एक सीनियर सेक्शन इंजीनियर (SSE) के सरकारी क्वार्टर पर अचानक छापेमारी की है. इस कार्रवाई के बाद से पूरे रेलवे महकमे और प्रशासनिक हलकों में बेचैनी का आलम है.
दिन भी चलती रही जांच की कार्रवाई
आधिकारिक सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार ED की विशेष टीम तड़के सुबह ही डीईएन मुख्यालय में कार्यरत एमएम बराल के आवास पर आ धमकी. शहर के वार्ड संख्या 26 स्थित सरकारी आवास पर पहुंचकर टीम ने जांच शुरू किया. छापेमारी और जांच की कार्रवाई दिन भर चलती रही.
इस दौरान केंद्रीय सुरक्षा बल और स्थानीय पुलिस की टीम भी तैनात रही. सीनियर सेक्शन इंजीनियर के आवास पर छापेमारी के दौरान पूरे परिवार को परिसर में ही रखा गया था. किसी भी बाहरी व्यक्ति के अंदर आने या अंदर से बाहर जाने पर पूरी तरह रोक लगा दी गई.
रेलवे की जमीन और अवैध कमाई का गहरा कनेक्शन?
हालांकि, ईडी की तरफ से अभी तक इस छापेमारी को लेकर कोई भी आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है, लेकिन सूत्रों और स्थानीय चर्चाओं की मानें तो यह पूरा मामला रेलवे की बेशकीमती जमीनों के हेरफेर और उससे हुई अवैध कमाई से जुड़ा हो सकता है.
क्यों उठ रहे हैं सवाल? दरअसल, एमएम बराल रेलवे के इंजीनियरिंग विभाग के ‘लैंड सेल’ (भूमि प्रभाग) में इंचार्ज के पद पर तैनात हैं. रेलवे की जमीनों की देखरेख, लीज और उनके प्रबंधन की पूरी जिम्मेदारी इसी विभाग के पास होती है. ऐसे में यह आशंका बेहद प्रबल हो गई है कि लैंड सेल में रहते हुए बड़े पैमाने पर वित्तीय अनियमितताएं की गई हैं और उसी काली कमाई के सुराग तलाशने के लिए ईडी ने यह शिकंजा कसा है.
अधिकारी मौन, सस्पेंस बरकरार
जैसे-जैसे शाम ढलती गई, वैसे-वैसे एमएम बराल के आवास के बाहर हलचल और बढ़ती गई. ईडी के अधिकारी बंद कमरे में दस्तावेजों को खंगालने और डिजिटल सबूतों को इकट्ठा करने में जुटे रहे. लेकिन इस पूरी बड़ी कार्रवाई पर अब तक सस्पेंस बरकरार है.
ईडी की चुप्पी: जांच एजेंसी ने अब तक यह खुलासा नहीं किया है कि छापेमारी में क्या बरामद हुआ है या यह कार्रवाई किस मुख्य मामले (FIRQ) के तहत की जा रही है.
रेलवे प्रशासन का मौन : इस हाई-प्रोफाइल छापेमारी को लेकर रेलवे के उच्च अधिकारी भी पूरी तरह से मौन साधे हुए हैं. कोई भी इस मामले पर खुलकर कुछ भी बोलने को तैयार नहीं है.
अब देखना यह होगा कि देर रात तक चलने वाली इस कार्रवाई के बाद ईडी क्या बड़ा खुलासा करती है और इस कथित ‘जमीन के खेल’ में रेलवे के और कितने बड़े चेहरों के नाम बेनकाब होते हैं.
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