- जन सूचना अधिकारी पर बड़ी राशि डिमांड करने से पहले दूसरे विकल्पों पर विचार नहीं करने का आरोप
- अपीलीय पदाधिकारी से शुल्क रद्द करने और आवेदक को अभिलेखों के निरीक्षण करने का अवसर देने की मांग
NEW DELHI. जन सूचना को हर व्यक्ति तक पहुंचाने के लिए सरकार चाहे जो उपाय कर ले प्रशासनिक तंत्र में बैठे लोग उसका पलीता लगाने के लिए सिस्टम की कर्मियों के बीच तरीका खोज ही लेते हैं. नया मामला नार्दन रेलवे के दिल्ली मंडल अंतर्गत डिवीजन रेल अस्पताल का सामने आया है. इसमें मांगी गयी जानकारी उपलब्ध कराने के लिए जन सूचना अधिकारी ने आवेदक से 1.50 लाख रुपये अग्रिम जमा कराने को कहा है.

यहां सूचना अधिकार कार्यकर्ता दीपक कुमार ने रेलवे अस्पताल के जनसूचना अधिकारी से 43 बिंदुओं पर सूचना से जुड़े दस्तावेज की प्रति मांगी थी. इस पर CPIO ने ऑन लाइन भेजे जबाव में यह स्पष्ट किया है कि मांगी गयी सूचना देने में 75 हजार प्रति कॉपी की जरूरत होगी और दो रुपये प्रति कॉपी के हिसाब से इसका मूल्य 1.50 लाख रुपये अग्रिम जमा करा दिया जाये.
सवाल यह उठता है कि जन सूचना अधिकारी ने बड़ी राशि की डिमांड करने से पहले दूसरे विकल्पों पर क्यों नहीं विचार किया ? क्या एकमुश्ज बड़ी राशि मांग सूचना प्राप्ति के अधिकार को हतोत्साहित करने का प्रयास नहीं है ? कारण जो भी हो सूचना अधिकार के लिए आवेदन करने वाले रेल अस्पताल के CPIO की मंशा पर सवाल उठाते हुए अपील दायर कर दी है.
अपील में बताया गया है कि सूचना अधिकार अधिनियम की धारा 7(3) के तहत मांगी गयी फीस हमेशा युक्ति संगत होनी चाहिए. इतनी अधिक राशि की मांग करना सूचना प्राप्ति के अधिकार को बाधित करता है. दीपक कुमार ने अपीलीय पदाधिकारी के सामने यह दावा भी रखा कि अधिनियम की धारा 2(J) के अनुसार आवेदक को अभिलेखों के निरीक्षण करने का भी अधिकारी है. परन्तु जन सूचना पदाधिकारी ने निरीक्षण का कोई विकल्प नहीं प्रदान किया.
आवेदक ने यह भी बताया कि अधिनियम की धारा 7(9) का प्रयोग कर सूचना देने के से बचा नहीं जा सकता है, बल्कि सूचना उसी रूप में दी जानी चाहिए जिसमें मांगी गयी है या उचित विकल्प प्रदान किया जाना चाहिए. आवेदन ने रेलवे अस्पताल के CPIO की मंशा पर सवाल उठाते हुए दूसरे विकल्पों पर विचार करने का अनुरोध किया है.
इसमें कहा गया कि संबंधित अभिलेखों की कॉपी उन्हें ई-मेल पर दी जाये. निरीक्षण के उपरांत आवश्यक पृष्ठों की अभिप्रमाणित प्रतियां निर्धारित शुल्क पर उपलब्ध करायी जाये. इसके अलावा जन सूचना अधिकारी द्वारा मांगें गये अत्याधिक शुल्क राशि को निरस्त किया जाये.

















































































