- झारसुगुड़ा के सरडेगा (MCL) रनिंग रूम शराबखोरी की जांच में IPF/JSG ने कर दिया बड़ा खेल !
- रेलकर्मियों ने कहा – रनिंग रूम रेलवे का क्षेत्राधिकार, यहां तमाम सुविधाएं रेलवे के खर्च पर संचालित
- रनिंग रूम के केयरटेकर ने दिया बयान – रेलवे क्षेत्र से बाहर का मामला, दिख रहे लोग रेलकर्मी ही नहीं
JHARSUGUDA. झारसुगुड़ा से जुड़े सरडेगा (MCL) रनिंग रूम में शराबखोरी के वायरल वीडियो को लेकर रेलवे बोर्ड स्तर पर दिये गये जांच निर्देश को झारसुगुड़ा के आरपीएफ अधिकारियों ने जिस तक से निपटाया है उससे केस को लेकर गंभीरता, RPF की कार्यप्रणाली और आरपीएफ प्रभारी की कार्यदक्षता और भूमिका पर रेलकर्मी ही सवाल उठाने लगे हैं.
एक्स पर आयी शिकायत पर आरपीएफ ने आनन-फानन में जांच की और कुछ घंटों में ही निष्कर्ष निकाल दिया कि शिकायत आधारहीन और फर्जी है. यही नहीं निष्कर्ष को आनन-फानन में आरपीएफ के चक्रधरपुर मुख्यालय ने एक्स पोर्टल पर भी अपलोड कर दिया गया.
रेलवे बोर्ड संचालित एक्स” पर आयी शिकायत को IPF/JSG ने गंभीर नहीं माना !
झारसुगुड़ा में आरपीएफ के प्रभारी योगेंद्र कुमार है. एक्स से रेलवे बोर्ड स्तर पर आयी सूचना पर मामले की जांच RPF ASI केके कुंतिया को सौंपी थी. आरपीएफ के आला अधिकारी ही मानते हैं कि प्रभारी योगेंद्र कुमार ने शिकायत को गंभीर नहीं माना, ओर किसी वरीय अनुभवी अधिकारी से इसका जांच कराने की जरूरत ही नहीं समझी.
जांच अधिकारी केके कुंतिया ने सरडेगा रनिंग रूम के सीसी यानी सिर्फ केयर टेकर किशोर चंद्र प्रधान का बयान लिया. जिन्होंने बताया कि वीडियो का दृश्य रेलवे का रनिंग रूम नहीं है और न ही इसमें दिख रहे लोग रेलकर्मी है. यह एमसीएल का इलाका है जो रेलवे क्षेत्राधिकार से बाहर का है.
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इसके अलावा आरपीएफ ने स्टेशन मास्टर का बयान लिया जिन्होंने बताया के उनके स्तर पर कोई ऐसी शिकायत नहीं आयी है. इसके बाद पोस्ट प्रभारी योगेंद्र कुमार ने शिकायत को बेसलेस और आधारहीन बताकर चक्रधरपुर मुख्यालय रिपोर्ट भेज दी जिसे एक्स’ पर अपलोड कर दिया गया. दिलचस्प है कि इसी वीडियो के आधार पर दो लोगों की पहचान रेलकर्मियों के रूम में होने के बाद दोनों को रेल प्रशासन ने निलंबित कर दिया था.
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सीसी के बयान पर ही लिख दी रिपोर्ट, क्या मामले में किया गया बड़ा गोलमाल !
एमसीएल शराबखोरी मामले में आरपीएफ ने रिपोर्ट देने में जो जल्दीबाजी दिखायी वह उसके निष्पक्ष कार्यप्रणाली को सवालों में ले आती है. उस रेलकर्मी के बयान को आधार बनाया जो घटना स्थल यानी रनिंग रूम का प्रभारी होने के कारण मामले में स्वयं ही आरोपी हो जाता है. ऐसे में उसका बयान कितना मायने रखता है? आरपीएफ के लोग ही मानते है सबसे पहले रनिंग रूम के दूसरे लोगों से वीडियो की सत्यता की जांच करायी जानी चाहिए थी. इसके बाद अन्य लोगों का बयान लिया जाना चाहिए था. अगर यह रनिंग रूम नहीं है यह जांच में स्पष्ट किया जाना चाहिए था कि वीडियो एमसीएल में कहां का है?
झारसुगुड़ा से जुड़े सरडेगा (MCL) रनिंग रूम में शराबखोरी के वायरल वीडियो को लेकर रेलवे बोर्ड स्तर पर दिये गये जांच निर्देश को झारसुगुड़ा के आरपीएफ अधिकारियों ने जिस तक से निपटाया है उससे केस को लेकर गंभीरता, RPF की कार्यप्रणाली और आरपीएफ प्रभारी की कार्यदक्षता और भूमिका को सवालों में खड़ा कर है.
अब सवाल यह उठता है आरपीएफ ने ऐसा क्यों नहीं किया? क्या इस मामले में कुछ बड़ा हुआ है? इस बात की चर्चा पूरे चक्रधरपुर डिवीजन और आरपीएफ महकमें में चल रही है. इस संदेह को इसलिए भी बल मिलता है कि आरोपी रेलवे मेंस यूनियन का कैडर है जिसकी अधिकारियों और यूनियन नेताओं में गहरी पैठ है. कुछ लोको पायलटों ने नाम सामने नहीं लगाने की शर्त पर रेलहंट को बताया कि यह वीडियो चार माह पुराना रनिंग रूम का ही है. इसमें सीसी भले ही नहीं दिख रहे लेकिन वह भी उस गतिविधि का हिस्सा थे. इसलिए अपने बचाव में उन्होंने यह बयान दिया है. क्योंकि इसी वीडियो पर सीनियर डीईई (ओपी) ने दो रेलकर्मियों को निलंबित किया है.
रेलवे बोर्ड की शिकायत पर उठ रहे गंभीर सवाल, जबाव आरपीएफ के पास
यहां बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि रेलवे बोर्ड स्तर से आयी शिकायत को लेकर कितनी गंभीरता दिखायी गयी? RPF ने सत्यता जानने के लिए जांच में किन बिंदुओं को आधार बनाया ? वायरल वीडियो में दिख रहे रेलकर्मियों का बयान लिया गया ? स्थल की जांच व पहचान की ? वीडियो के काल खंड की जानकारी ली? घटनाक्रम में सक्षम पदाधिकारियों का पक्ष जाना गया ? जांच को निष्कर्ष तक पहुंचाने के लिए क्या जरूरी सभी साक्ष्य ले लिये गये थे ? रेलवे सुरक्षा से जुड़े इस मामले में जो गंभीरता आरपीएफ से दिखाने की उम्मीद रेलवे करता है क्या वह इसमें दिखायी गयी? शायद इन सवालों के जबाव न में होंगे. एक्स पर भेजी गयी रिपोर्ट तो कुछ ऐसी ही इशारा कर रही है.
वीडियो एमसीएल रनिंग रूम का और रेलवे के क्षेत्राधिकार का मामला : शशि मिश्रा
सरडेगा रनिंग रूम शराबखोरी के मामले में जब रेलहंट ने दूसरे यूनियन नेताओं से बात की तो पूरा मामला ही पलटता नजर आया. रेलवे मेंस कांग्रेस के मंडल संयोजक शशि रंजन मिश्रा ने रनिंग रूम केयर टेकर सीसी केसी प्रधान के उस बयान पर हैरानी जतायी कि वह इलाका रेलवे के क्षेत्राधिकार में नहीं है. उन्होंने बताया कि उन्होंने वीडियो को देखा है और दावे के साथ कह सकते है कि वह सरडेगा रनिंग रूम है.

रनिंग रूम यहां कंटेनर में बनाया गया है जिसका पूरा खर्च रेलवे का है. यहां रेलवे का पूरा सिस्टम (रेलवे ट्रैक, सिग्नल, रेलकर्मियों के ठहरने का इंतजाम, सफाई व सिस्टम पर खर्च) काम कर रहा है ऐसे में यह कहना कि यह रेलवे के क्षेत्राधिकार का मामला नहीं पूरी तरह भ्रामक है. उन्होंने यह भी बताया कि आरोपी लोको पायलट दिवाकर कुमार की गतिविधियां काफी संंदिग्ध रही है. इस मामले को रेलवे मेंस कांग्रेस ने रेल प्रशासन के समक्ष कई मंचों पर उठाया लेकिन उसे गंभीरता से नहीं लिया गया. ऐसा प्रतीत होता है रेल प्रशासन किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रहा है?
…. जारी ….
रेलहंट का प्रयास है कि सच रेल प्रशासन के सामने आये. ऐसे में अगर किसी को यह लगता है उसकी बात नहीं सुनी जा रही है तो वह अपना पक्ष whatsapp 9905460502 पर भेज सकते है, उसे पूरा स्थान दिया जायेगा.




















































































