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SER : प्रीमियम लिंक बनाकर चुनिंदा ट्रेनों में ड्यूटी देने का चल रहा खेल, चहेते TTE’s को ‘गुरु घंटाल’ का संरक्षण!

  • डिवीजन के दो TTE मिहिर कुमार और शहजादा खान को मिलती है हावड़ा – बेंगलूरु दुरंतो में लगातार ड्यूटी
  • प्रीमियम लिंक के नाम पर चल रहा बड़ा गोलमाल, चेकिंग स्टॉफ संवर्ग में भेदभाव को लेकर बढ़ रहा असंतोष 

KOLKATA. दक्षिण पूर्व रेलवे के वाणिज्य विभाग में PCCM कोई भी रहे ‘गुरु घंटाल’ अपनी दाल गला ही लेते हैं. जोन के लगभग हर डिवीजन में गुरु जी की गणेश परिक्रमा हो चुकी है. ये अकेले ऐसे अधिकारी है जो आरक्षण क्लर्क की ज्वाइनिंग से लेकर जे ग्रेड तक पहुंचने तक कभी जोन से बाहर नहीं गये. गुरु घंटाल के दरबार में यूं तो स्टेशन का स्टॉल संचालक से लेकर कॉमर्शियल के हर छोटे-बड़े कर्मचारी अपनी समस्या लेकर पहुंचते रहे है लेकिन इनकी विशेष कृपा वोकेशनल वालों पर होने की बात जरूर कही जाती है.

खैर… गुरु घंटाल की पहुंच और पैरवी पर फिर कभी बात होगी लेकिन फिलहाल एक बड़ी चर्चा TTE’s संवर्ग से  सामने आ रही है जो जोन के लगभग हर डिवीजन में सीनियर और जूनियन के बीच आक्रोश और असंतोष का कारण बन रहा है. मामला रांची डिवीजन में प्रीमियम ट्रेनों से अचानक सीनियर टीटीई को उतार की जूनियर को ड्यूटी देने से जुड़ा हो अथवा खड़गपुर डिवीजन में कुछ खास टिकट चेकिंग स्टॉफ की ड्यूटी विशेष ट्रेनों तक सीमित रखने का, हर जगह विशेष सुविधा पाने वाले चेकिंग स्टॉफ पर गुरु घंटाल की की कृपा होने की बात जरूर कही जाती है.

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हम बात कर रहे है खड़गपुर डिवीजन की, जहां वर्तमान सीनियर डीसीएम निशांत कुमार को काफी सुलझा अधिकारी माना जाता है लेकिन यहां भी चेकिंग कर्मियों के बीच ड्यूटी रोस्टर को लेकर आक्रोश पनपने लगा है. मामला तो ‘प्रीमियम लिंक’ के खेल से जुड़ा है, लेकिन हावड़ा स्टेशन के दो चेकिंग स्टॉफ की ड्यूटी को उदाहरण देकर इसकी चर्चा की जा रही है. रेलहंट को सूत्रों से मिली सूचना के अनुसार चेकिंग स्टाफ मिहिर कुमार और शहजादा खान प्रीमियम लिंक का हिस्सा हैं जिनकी बुकिंग बीते कई माह से लगातार हावड़ा – बेंगलूरु दुरंतो में स्पेशल रूप से हो रही.

कहने को कभी-कभार इनकी बुकिंग वंदे भारत आदि में भी की जाती है लेकिन अधिकांश रोस्टर हावड़ा – बेंगलूरु दुरंतो का ही बनता है. इस कड़ी में कुछ ऐसे ही अन्य चुनिंदा टीटीई भी शामिल है. अब इसके पीछे के अर्थतंत्र को लेकर यहां चर्चा तेज है. कहां जा रहा है कि इन दोनों के अलावा  कुछ विशेष लोगों पर मेहरबानी के पीछे भी गुरु घंटाल ही हैं, यही कारण है कि सीनियर डीसीएम, खड़गपुर निशांत कुमार जैसे तेज-तर्रार अधिकारी भी लगातार मिल रही शिकायतों और सूचनाओं के बावजूद प्रीमियम लिंक और स्टॉफ की शिकायतों पर हस्तक्षेप करने से कतराते रहे हैं. वहीं सिस्टम में सही रोटेशन नहीं होने से पहले से भारी दबाव में काम कर रहे दूसरे चेकिंग कर्मी भेदभाव को लेकर खुद को हतोत्साहित महसूस करने की बात कहने लगे हैं. 

सीसीएम अरविंद कुमार सिंह ने ECR से लाया था प्रीमियम लिंक का कॉसेप्ट  

टिकट निरीक्षकों की माने तो प्रीमियम ट्रेनों के लिए अलग लिंक बनाने का फार्मूला सीसीएम अरविंद कुमार सिंह ECR से लेकर SER में आये थे. कहां जाता है कि ECR में बतौर सीनियर डीसीएम रहे अरविंद कुमार का यह फार्मूला काफी ‘लाभकारी’ साबित हुआ था. यह प्रयोग उन्होंने आते ही SER में लागू करने की पहल की. इसके लिए 10 साल की न्यूनतम सेवा, डिप्टी सीटीआई अथवा हेड टीटीआई होना और डीए क्लीयर होना अनिवार्य शर्त थी, लेकिन लिंक बनने के बाद से ही खास ट्रेनों में खास लोगों को ड्यूटी देने का खेल शुरू हो गया. इसमें चुनिंदा लोगों को ‘गुरु घंटाल’ का संरक्षण प्राप्त होने की बात कही जाती है.

कहा तो यहां तक जा रहा है कि प्रीमियम लिंक की आड़ में खास ट्रेन देने के नाम पर उगाही का बड़ा खेल चल रहा है! इसे लेकर चेकिंग स्टाफ में आक्रोश है. चेकिंग स्टाॅफ का कहना है कि प्रीमियम लिंक के नाम पर चुनिंदा लोगों को सालों से उपकृत किया जा रहा. ये लोग वंदे भारत जैसी ट्रेनों में ड्यूटी मिलते ही सिक कर जाते है. बनाये जाने के बाद से इस लिंक की न तो कभी समीक्षा की गयी न ही इसमें रोटेशनल प्रक्रिया का पालन किया जा रहा है. इस व्यवस्था के कारण सीनियर होने के बावजूद उपेक्षित बड़ी संख्या में दूसरे चेकिंग स्टाफ डेमोरलाइज्ड हो रहे. TTE’s की मांग है कि वसूली तंत्र के इस फार्मूला को खत्म किया जाना चाहिए और रोटेशन केअनुसार डयूटी में सभी को बराबर का अवसर मिलना चाहिए.

इस मामले में Railhunt का निरीक्षण, परीक्षण और सर्वेक्षण जारी रहेगा …

रेलहंट का प्रयास है कि सच रेल प्रशासन के सामने आये. ऐसे में किसी को अपना पक्ष रखना है तो whatsapp 9905460502 पर भेज सकते है, पूरे सम्मान के साथ उसका संज्ञान लिया जायेगा. 

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