- सिथौली में तैनात प्वाइंट्समैन मलखान सिंह को सजा होने के बाद रेल प्रशासन की कार्रवाई
Jhansi/Gwalior. रेलवे में अनुशासनहीनता और विभागीय नियमों के उल्लंघन पर उत्तर मध्य रेलवे (NCR) के झांसी रेलमंडल प्रशासन ने कड़ा रुख अपनाया है. मंडल रेल प्रबंधक (ऑपरेटिंग) झांसी कार्यालय द्वारा जारी एक कड़े आदेश के तहत नॉर्थ सेंट्रल रेलवे एम्प्लॉइज यूनियन (NCRMU) के शाखा सचिव और सिथौली स्टेशन पर कार्यरत प्वाइंट्समैन मलखान सिंह को ‘रेल सेवा से बर्खास्त’ (Removal from Railway Service) कर है. यह कार्रवाई जून में की गयी थी.
विभागीय कार्रवाई के तुरंत बाद कार्मिक विभाग ने जुलाई माह में मलखान सिंह गुर्जर का नाम यूनियन पदाधिकारियों की सूची और सह-चयन (Co-option) सूची से भी हटा दिया है. मलखान सिंह पर यह कार्रवाई ग्वालियर की अदालत ने फर्जीवाड़े और गंभीर अनियमितता के मामले में पांच साल की सजा सुनाये जाने के बाद की गयी है.
कर्मचारी नेता और प्वाइंट्समैन मलखान सिंह गुर्जर को 5 साल के कारावास की सजा सुनाई है. कोर्ट में सजा सुनाए जाने के तुरंत बाद आरोपी नेता अदालत से भाग निकला था. हालांकि पुलिसकर्मियों ने उसे दौड़ाकर पकड़ लिया. उसे जेल भेज दिया था. खबर है कि फिलहाल आरोपी को जमानत मिल चुकी है.
क्या है पूरा मामला
यह पूरा मामला झांसी रोड थाना क्षेत्र का है. मीडिया में आयी रिपोर्ट के अनुसार पुलिस को रेलवे पटरी चोरी होने की सूचना मिली थी, जिसकी जांच के दौरान कुछ संदिग्धों को हिरासत में लिया गया था.
पड़ताल के दौरान आरोपी मलखान सिंह की तलाशी लेने पर उसकी जेब से एक फोटो मिली, जिसमें वह सब-इंस्पेक्टर (SI) की वर्दी पहने दिख रहा था. इसके अलावा उसके पास से दो रेलवे स्टेशनों की फर्जी सील (मोहर) भी बरामद हुई थीं. इस पूरे घटनाक्रम में 13 जुलाई 2020 को पुलिस ने आपराधिक मामला दर्ज किया था.
न्यायालय में सुनवाई के दौरान मलखान सिंह के वकील ने तर्क दिया कि वह रेलवे कर्मचारी यूनियन का नेता है और पुलिस ने द्वेषपूर्ण भावना से उसके खिलाफ यह कार्रवाई की है.
हालांकि, अभियोजन पक्ष ने आरोपी के दावों को खारिज करते हुए अदालत के समक्ष ठोस सबूत और साक्ष्य पेश किए. अदालत ने साक्ष्यों के आधार पर मलखान सिंह को दोषी ठहराते हुए 5 साल के कारावास और अर्थदंड (जुर्माने) की सजा सुनाई.
क्या है रेलवे का आदेश ?
रेलवे के आधिकारिक पत्र (L.No. P/274/3/NCRMU/PNM/Co-option/Main Branch GWL/2026) के अनुसार, मलखान सिंह गुर्जरके खिलाफ अनुशासन एवं अपील नियमावली (DAR – Discipline and Appeal Rules) के तहत जांच प्रक्रिया पूरी की गई थी.
पत्र संख्या:
JHS/T/MH/OPTG/MISC/DAR/26दिनांक11.06.2026के माध्यम से सक्षम प्राधिकारी (Competent Authority) ने उन पर “रेल सेवा से सेवामुक्ति” की गंभीर शास्ति (Penalty) अधिरोपित की.पद से बर्खास्तगी: मलखान सिंह, जो स्टेशन मास्टर (सिथौली) के अधीन प्वाइंट्समैन के पद पर कार्यरत थे, उन्हें तत्काल प्रभाव से रेलवे सेवा से बाहर कर दिया गया.
यूनियन रिकॉर्ड से नाम विलोपन: सहायक कार्मिक अधिकारी (APO) झांसी, आदेश के अनुपालन के तहत मलखान सिंह गुर्जर को NCRMU ग्वालियर शाखा की अनुमोदित यूनियन सूची से आधिकारिक रूप से हटा दिया गया है.
कोर्ट व रेलवे नियमों (DAR) का कानूनी दायरा
रेलवे में कर्मचारियों एवं अधिकारियों के आचरण और अनुशासन को नियंत्रित करने के लिए Railway Servants (Discipline and Appeal) Rules, 1968 लागू होते हैं.
सेवामुक्ति का प्रभाव: DAR नियमावली के तहत “Removal from Railway Service” एक प्रमुख दंड (Major Penalty) है. इसके तहत कर्मचारी भविष्य में सरकारी नौकरी के लिए अयोग्य नहीं ठहराया जाता, लेकिन उसकी वर्तमान रेल सेवा पूरी तरह समाप्त हो जाती है.
यूनियन सदस्यता व सह-चयन (Co-option) का नियम: ट्रेड यूनियन अधिनियम और रेलवे के PNM (Permanent Negotiating Machinery) दिशानिर्देशों के अनुसार, केवल सेवारत रेल कर्मचारी ही यूनियन के मान्यता प्राप्त पदाधिकारी के रूप में प्रतिनिधित्व कर सकते हैं. सेवामुक्ति का आदेश प्रभावी होते ही संबंधित व्यक्ति का संघ/यूनियन में प्रतिनिधित्व करने का वैधानिक अधिकार समाप्त हो जाता है.
न्यायसंगत प्रक्रिया: किसी भी कर्मचारी को सेवामुक्त करने से पूर्व आरोप पत्र (Charge Sheet), जांच अधिकारी (Inquiry Officer) की रिपोर्ट और सक्षम प्राधिकारी का निर्णय वैधानिक रूप से अनिवार्य होता है. यदि कर्मचारी इस आदेश से असंतुष्ट है, तो वह रेलवे अपीलीय प्राधिकारी (Appellate Authority) या केन्द्रीय प्रशासनिक अधिकरण (CAT) / उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटा सकता है.
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