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रेलमंत्री का दावा – 52 सप्ताह में होंगे 52 सुधार, यहां – साहब के घर में ड्यूटी बजा रहे हेल्पर-टेक्नीशियन

फाेटो AI जेनरेटेड
  • ECR के सिर्फ दानापुर मंडल में अधिकारियों के आवास पर सेवाएं दे रहे 150 से अधिक कर्मचारी 

PATNA. रेलमंत्री अश्विनी वैष्णव ने साल की शुरुआत में 52 सप्ताह 52 सुधार का नारा दिया था. तब ऐसा प्रतीत हुआ कि टेक्नोक्रेट एवं ब्यूरोक्रेट रेलमंत्री रेलवे में संचालित कमियों को दूर करने को लेकर गंभीर है और आने वाले सप्ताहों में ऐसा कुछ दिखेगा जो प्रबंधन से लेकर जमीनी स्तर पर बड़े बदलाव की पृष्टभूमि बनेगा.

हालांकि सप्ताह दर सप्ताह सुधार के दावों के विपरीत ऐसा कोई बड़ा परिवर्तन रेलवे की व्यवस्था में नहीं हुआ जो आम यात्रियों अथवा रेलकर्मियों को राहत दिलाने वाला अहसास दे सके. रेलमंत्री की घोषणा के 20 सप्ताह बीत चुके है लेकिन रेलवे में अफसरों की मनमानी चरम पर है. हम बात कर रहे है रेलवे में सरेंडर हो रहे पदों के बीच श्रम शक्ति के दुरुपयोग की जो मूल स्थल से अलग अधिकारियों के आवासों पर लगाये जा रहे हैं. कर्मचारियों की कमी दिखाकर एक ओर कार्य निजीकरण के हवाले किये जा रहे तो दूसरी ओर रेलकर्मियों का इस्तेमाल धड़ल्ले से घरेलू कार्य में किये जाने की बातें सामने आ रही है.

पूर्व मध्य रेलवे के दानापुर मंडल में “माल महाराज का, मिर्ज़ा खेले होली” वाली कहावत लगभग हर एक बड़ा अधिकारी चरितार्थ कर रहा है. हालांकि इनमें दो कदम आगे निकल गये हैं दानापुर मंडल के मंडल विधुत अभियंता (सामान्य) फैयाज हसन. वह विधुत विभाग (सामान्य) के प्रभारी की भूमिका में हैं. हालांकि लगभग हर बड़ा अधिकारी अपने यहां रेलकर्मियों की सेवा ले रहा है लेकिन कुछ अधिकारियों ने तो इसमें रिकार्ड ही तोड़ डाला है. जिनके यहां 7-9 रेलकर्मी घरेलू कार्यों में लगाये गये है.

कहां तो यहां तक जा रहा कि सेफ्टी कैटेगरी में भी फेलियर ‌के लिए मैनपावर की कमी बतायी जाती है लेकिन डिवीजन में लगभग 150 -170 तक कर्मचारियों की सेवा अधिकारी अपने घरों में ले रहे. सूत्रों की माने तो दानापुर मंडल के मंडल विधुत अभियंता (सामान्य) के आवास पर हेल्पर-टेक्नीशियन तक ड्यूटी बजा रहे है. इनमें कुछ नाम सामने आये है जिनकी सेवा मूल स्थान पर नहीं ली जा रही है. इनमें नसीम, टेक्निशियन 1, रहमान, टेक्निशियन 1, बी के वर्मा, टेक्निशियन 1, राकेश शर्मा, हेल्पर, प्रेम सागर, हेल्पर, विराट, हेल्पर, अमित, हेल्पर शामिल है. कहां जाता है कि अगर इनके मोबाइल का मोबाइल लोकेशन निकाला जाये तो स्थिति सहज रूप से सामने आ सकती है.

सूत्रों का कहना है कि इन लोगों ने पिछले 6 माह में रेलवे का कोई काम नहीं किया है. ऐसे में इस बात की पूरी जांच करायी जानी चाहिए कि इनकी ड्यूटी कब-कब कहां लगायी और इन्हें द्वारा कहां -कहां कार्य संपादित किया गया. इन कर्मचारियों के फेलियर अटेंड रिकार्ड काे भी खंगालने से बड़ा सच सामने आ सकता है.

यह तो रही एक अधिकारी की बात, डिवीजन के इंजीनियरिंग से लेकर दूसरे विभागों की जांच हो तो बड़ी संख्या में कर्मचारियों के दुरुपयोग का खुलासा हो सकता है. यह 09 जनवरी 2026 को रेलमंत्री के उस दावों को सिरे से निकार रहा है जिसमें उन्होंने 52 सप्ताह 52 सुधार की बात कही थी.

जारी…

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