- डीजी सोनाली मिश्रा तक पहुंची शिकायतों ने चक्रधरपुर का गिराया ग्राफ, राउरकेला समेत कई प्रभारी निशाने पर
KOLKATA/NDLS. आरपीएफ में स्थानांतरण और पदस्थापना को लेकर हलचल तेज है. रेलवे सुरक्षा बल में एक बार फिर ट्रांसफर और पोस्टिंग की प्रक्रिया TMM (ट्रांसफर मैनेजमेंट मॉड्यूल) सिस्टम के तहत होने वाली है. डीजी सोनाली मिश्रा का स्पष्ट निर्देश है कि स्थानांतरण प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी हो और इसमें किसी प्रकार का कोई भ्रष्टाचार या बाहरी हस्तक्षेप बर्दाश्त नहीं किया जाएगा.
सूत्रों की माने तो आगामी 4 जून तक टीएमएम के आधार पर स्थानांतरण और पदस्थापना की सूची जारी हो सकती है. इसमें अब चंद दिन ही शेष हैं. यही कारण है कि देशभर में आरपीएफ इंस्पेक्टर से लेकर जवानों की धड़कने तेज हैं. हालांकि इसे लेकर सबसे अधिक हलचल दक्षिण पूर्व रेलवे में देखी जा रही है क्योंकि डीजी सोनाली मिश्रा के सीधे निशाने पर SER जोन ही है, जो सीबीआई की छापेमारी के बाद भ्रष्टाचार के मामलों का लेकर लगातार सुर्खियों में रहा है. इसने चक्रधरपुर डिवीजन का ग्राफ नीचे गिराया और इसका असर सीनियर कमांडेंट पी शंकर कुट्टी के तबादले पर भी दिखा.
ऐसा माना जा रहा है कि TMM के तबादलों में डिवीजन के कुछ RPF पोस्ट प्रभारियों पर भी गाज गिर सकती है. क्योंकि डीजी कार्यालय तक लगातार कुछ स्टेशनों पर अवैध गतिविधियों की शिकायतें पहुंच रही है. इसमें अवैध वेंडिंग, रेलवे टिकट की कालाबाजारी, स्क्रैप टाल, गांजा तस्करी, रेलवे संपत्ति की चोरियां समेत दूसरे अनियमितताएं शामिल हैं. अवैध वेंडिंग तो पूरे जोन में लगभग हर स्टेशन और सभी सेक्शन पर ट्रेनों में चल रही है लेकिन इसके एक खास पैटर्न को लेकर राउरकेला खास तौर पर चर्चा में आता रहा है.
आलम यह है कि बीते दिनों तबादला आदेश जारी होने के बाद भी पूर्व ASC/ROU अग्निदेव प्रसाद को बकायदा प्रेस कॉफ्रेेंस कर मीडिया के सामने अवैध वेंडिंग को लेकर स्थिति स्पष्ट करनी पड़ी. पूर्व ASC/ROU ने माना कि स्टेशन और ट्रेनों में अवैध वेंडिंग चल रही और लोग पकड़े भी जाते है लेकिन ये लोग फिर से जुर्माना देकर उसी कार्य में उतर जाते हैं. उन्होंने यह भी सफाई दी कि अवैध वेंडरों से आरपीएफ का कोई तालमेल नहीं होता है. आरपीएफ सीमित संसाधन में बेहतर रिजल्ट दे रही है. फिलहाल राउरकेला आरपीएफ प्रभारी इंस्पेक्टर कमलेश समादार हैं.
हालांकि कमलेश समादार का तीन साल का कार्यकाल यहां पूरा नहीं हुआ है लेकिन पिछले एक वर्ष के दौरान उनके खिलाफ शिकायतों की लंबी सूची डीजी और आईजी कार्यालय तक पहुंची है. ऐसी ही कुछ हाल झारसुगुड़ा प्रभारी योगेंद्र कुमार का भी है. यह TMM ऐसे लोगों के लिए खतरे की घंटी बन गया है. सूत्र बताते हैं कि संभावित एक्शन से बचने के लिए ये प्रभारी लगातार आला अधिकारियों के संपर्क में हैं. उधर अवैध वेंडिंग और अनियमितताओं की मिल रही शिकायतों पर जांच करने कोलकाता से सीआईबी की टीम के राउरकेला पहुंचने की खबर है.
हालांकि आरपीएफ के लोग ही सीआईबी और आईवीजी टीम को RPF का सफेद हाथी करार देने लगे हैं. विभागीय हलकों में ही इस बात की चर्चा होती रही है है कि आरपीएफ के खुफिया विंग के पास बीते सालों में उपलब्धि के नाम पर भी कुछ भी दिखाने को नहीं है. अलबत्ता छोड़ी-मोटी कार्रवाई को अंजाम देकर यह टीम अपना कार्यकाल पूरा कर रही है. ऐसे में राउरकेला से लेकर झारसुगुड़ा तक स्टेशन और ट्रेनों में अवैध वेंडिंग को लेकर कोई बड़ा एक्शन इस यह टीम करेगी यह देखने वाली बात होगी?
फिलहाल नजरें 4 जून के आसपास जारी होने वाली सूची पर टिकी है. देखना दिलचस्प होगा कि इस बार टीएमएम सिस्टम की पारदर्शिता भारी पड़ती है या फिर कुछ अधिकारियों की अंदरूनी जुगलबंदी अपना असर दिखाती है. हालांकि लोग आरपीएफ डिजी सोनाली मिश्रा से यह उम्मीद कर रहे है कि अवैध धंधों में संलिप्त लोगों पर कार्रवाई कर वह भ्रष्टाचार के प्रति अपनी प्रतिबद्धता जरूर दिखायेंगी.
सफर जारी है …




















































































