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ट्रेनों से कटकर हाथियों और वन्यजीवों की मौतों को रोकने के लिए नयी तकनीक लायेगी रेलवे

  • रेलमार्गों पर ऑप्टिकल फाइबर सेंसर एवं आर्टिफीशियल इंटेलीजेंस आधारित कैमरों से होगी निगरानी 
  • असम में राजधानी एक्सप्रेस से कट कर 7-8 हाथियों की मौत पर रेलमंत्री अश्विनी वैष्णव ने दी जानकारी 

NEW DELHI.  भारतीय रेलवे ने देश के करीब तीन हजार किलोमीटर लंबे वन्य क्षेत्रों से गुजरने वाले रेलमार्गों पर ऑप्टिकल फाइबर सेंसर एवं आर्टिफीशियल इंटेलीजेंस आधारित कैमरों पर आधारित तकनीक की मदद से हाथियों एवं अन्य वन्यजीवों को बचाने की एक योजना पर काम शुरू किया है.

रेल, सूचना प्रसारण, इलैक्ट्राॅनिक्स एवं सूचना प्रौ‍द्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने आज यहां रेल मंत्रालय में संवाददाताओं से बातचीत में इस पहल की जानकारी दी. हाल ही में असम में राजधानी एक्सप्रेस से कट कर 7-8 हाथियों की मौत के संदर्भ में वन्यजीवों की रक्षा के लिए रेलवे द्वारा किये जा रहे उपायों के बारे में पूछने पर रेल मंत्री ने कहा कि पूरे देश में पूर्वोत्तर, पूर्वी एवं उत्तरी भारत में करीब 3000 किलोमीटर रेलमार्ग ऐसे क्षेत्रों से गुजरते हैं. इनमें से लगभग 1375 किलोमीटर मार्ग पर इस दिशा में काम चल रहा है.

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उन्होंने कहा कि समूचे रेलमार्ग में पटरियों के साथ-साथ ऑप्टिकल फाइबर केबल (ओएफसी) बिछायी जा रही है जिसमें ऐसे सेंसर लगे हैं जो हाथी के चलने से जमीन में होने वाली धमक को 200-250 मीटर से अधिक दूरी से पहचान कर तरंगीय कंपन पैदा करता है. यह एक सेकेंड से कम समय में निकटतम नियंत्रण कक्ष को सूचित कर देता है और यातायात नियंत्रक तुरंत ही संबंधित स्थान से गुजरने वाली ट्रेन के लोकोपायलट को सूचित कर देता है. इससे लोकोपायलट सतर्क हो जाता है और गति को नियंत्रित कर लेता है.

रेल मंत्री ने कहा कि इसके साथ ही एआई आधारित ऐसे कैमरे विकसित किये जा रहे हैं जिससे कम से कम 500 मीटर की दूरी तक देख सकें. ये कैमरे इंजन के आगे फिट किये जाएंगे और कंट्रोल रूम से संकेत पाते ही सक्रिय हो जाएंगे और रात के घने अंधेरे एवं कोहरे में भी साफ-साफ देख लेंगे कि पटरी पर कौन सा जानवर मौजूद है. इससे लोकोपायलट तुरंत ही ऐहतियाती कदम उठा सकेगा.

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उन्होंने कहा कि दो से तीन साल के भीतर ऐसे रेलमार्गों को इस तकनीक से लैस कर दिया जाएगा जिससे कोई भी वन्यजीव ना मरे.

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