- दक्षिण पूर्व रेलवे मेंस कांग्रेस के एक गुट के नेताओं ने NFIR महामंत्री से मिलकर सुनाई खरी-खरी
NEW DELHI/KOLKATA. यूनियन चुनाव में दपू रेलवे मेंस कांग्रेस की हार का कारण कर्मचारियों की नाराज़गी से नहीं, बल्कि भ्रष्ट, अवसरवादी और गद्दार नेताओं की गंदी राजनीति और स्वार्थपूर्ण हरकतों का नतीजा था. ये वही लोग हैं जिन्होंने संगठन को तोड़ा, कर्मचारियों के हित बेच डाले और निजी स्वार्थ के लिए यूनियन को बदनाम किया.
रेलवे मेंस कांग्रेस की अंतरिम केंद्रीय समिति के महामंत्री एनएल कुमार के नेतृत्व में नई दिल्ली पहुंचे प्रतिनिधिमंडल ने नेशनल फेडरेशन ऑफ इंडियन रेलवेमेन (NFIR) के महामंत्री एम राघवैया से मुलाकात बेबाक़ी से यह बातें कही. लगे हाथ नेताओं ने यह भी चेताया कि ऐसे गद्दारों और दलालों को संगठन से उखाड़ फेंका जाएगा और आने वाले समय में दपू रेलवे मेंस कांग्रेस को फिर से कर्मचारियों की असली आवाज़ के रूप में स्थापित किया जाएगा.

दिल्ली में एनएफआईआर कार्यालय के बाहर एकजुटता जताते अंतरिम केंद्रीय समिति के पदाधिकारी
एनएफआईआर महामंत्री से मिलने के बाद दक्षिण पूर्व रेलवे मेंस कांग्रेस की अंतरिम केंद्रीय समिति की ओर से जारी बयान में बताया गया कि एम राघवैया से मुलाकात में SER जोन के कर्मचारियों से जुड़ी गंभीर समस्याओं और उनके समाधान पर भी गंभीरता से चर्चा की गई. इसमें यह बात रखी गयी कि द.पू. रेलवे जोन में रेलकर्मियों की संख्या के हिसाब से आवासीय क्वार्टर बेहद कम हैं.
मजबूरी में रेलकर्मियों को बाहर पब्लिक क्षेत्रों में महंगे किराए पर रहना पड़ रहा है. आवासीय भत्ता दिए जाने की प्रक्रिया को जानबूझकर इतना उलझा दिया गया है कि कर्मचारी परेशान और शोषित हो रहे हैं. कर्मचारियों का यात्रा भत्ता और ओवरटाइम भुगतान लंबे समय से लटका हुआ है, जिसका तत्काल निपटारा होना चाहिए. HOER के नियमों के अनुसार एस एंड टी विभाग में 8 घंटे का ड्यूटी रोस्टर लागू करने की भी ज़ोरदार मांग उठाई गई. साथ ही सी एंड डब्ल्यू, टीआरडी, एस एंड टी विभाग के कर्मचारियों को रिस्क एंड हार्डशिप भत्ता देने की मांग रखी गई.
प्रतिनिधिमंडल को एनएफआईआर के महामंत्री एम राघवैया ने भरोसा दिलाया कि NFIR हर परिस्थिति में दपू रेलवे मेंस कांग्रेस और रेलकर्मियों के साथ मजबूती से खड़ा है. उन्होंने भरोसा जताया कि सही नेतृत्व और समर्पित कार्यकर्ताओं के बल पर मेंस कांग्रेस आगामी चुनाव में और भी ताक़तवर बनाकर मान्यता को प्राप्त करेगी और रेलकर्मियों की आवाज बनेगी.
मालूम हो कि दक्षिण पूर्व रेलवे मेंस कांग्रेस में अंतरिम कमेटी गठित किये जाने पर मेंस कांग्रेस के मिश्रा गुट के नेताओं ने कड़ी प्रतिक्रिया जतायी थी. केंद्रीय अध्यक्ष प्रशांत कुमार सिन्हा ने बाद में बयान जारी कर दावा किया था कि मेंस कांग्रेस के अवैध सदस्यों ने नयी कमिटी के गठन किया है. यह कमेटी असंवैधानिक है और संगठन और रेलवे की मान्य व्यवस्था के प्रतिकूल हैं. उन्होंने दावा किया था कि जो यूनियन के सदस्य ही नहीं वह भी इस कमेटी में पदाधिकारी बन गये हैं. संगठन में मचे खींचतान के बीच एनएफआईआर महामंत्री के दरबार में अंतरिम कमेटी के पदाधिकारियों की मौजूदगी ने कई सवालों को जन्म दे दिया है.















































































