- 15 हजार रुपये रिश्वत वसूली के प्रकरण में 45 दिन बाद एक्शन में आया आरपीएफ मुख्यालय
- आईजी की पहल पर सीनियर कमांडेंट ने की कारवाई, बोर्ड को भेजी थी जांच कराने की रिपोर्ट
- दो जवानों के सीबीआई गिरफ्तार में आने के बाद भी CIB/SIB/IVG की तय नहीं हुई जिम्मेदारी
CKP/KOLKATA. चक्रधरपुर रेल मंडल में भ्रष्टाचार से जुड़े एक मामले में 45 दिनों बाद आरपीएफ को नियमों के अनुपालन की याद आयी और दो अफसरों को मुख्यालय से अटैच करने का आदेश जारी किया गया है. मामला राउरकेला में कूड़ा चुनने वाली महिला से 15000 रुपये रिश्वत वसूली का है जिसमें बंडामुंडा आरपीएफ पोस्ट के जवान मोहम्मद असरार को सीबीआई ने घूस लेते पकड़ा था. बंडामुंडा में आरपीएफ प्रभारी अरुण कुमार टोकस के लिए पकड़ा गया जवान पोस्ट का बतौर स्पेशल काम करता था. फिलहाल सीनियर कमांडेंट ने बंडामुंडा प्रभारी अरुण कुमार टोकस और सीआईबी के सब इंस्पेक्टर सपन कुमार शांडिल्या को मुख्यालय अटैच कर दिया है. यहां सीआईबी के इंस्पेक्टर सुरेंद्र कुमार हैं, उन पर फिलहाल कोई एक्शन नहीं लिया गया है.
दिलचस्प है कि रेलहंट के इस खुलासे के बाद भी आरपीएफ के सीनियर कमांडेंट ने रेलवे बोर्ड काे भेजी एक्शन टेकेन रिपोर्ट में जवान के गिरफ्तारी की बात तो स्वीकार की लेकिन कारवाई काे जांच के नाम पर टाल दिया था. हालांकि इस बीच एक टीवी न्यूज ने इस मामले में सिक्यूरिटी सर्कुलर के अनुपालन की बात उठायी, जिसमें बताया गया कि दक्षिण पूर्व रेलवे के चक्रधरपुर डिवीजन में सीनियर कमांडेंट दो कानून चला रहे है. बिमलगढ़ में जवान के सीबीआई गिरफ्त में आने के बाद तत्काल प्रभाव से प्रभारी इंस्पेक्टर को हटा दिया गया था जबकि बंडामुंडा में इस एक्शन को डेढ़ माह से अधिक समय तक टाल कर रखा गया, क्यों यह यह बड़ा सवाल है?
यह भी पढ़ें : ROURKELA में CBI ने बंडामुंडा RPF पोस्ट के कांस्टेबल को 15 हजार रुपये घूस लेते पकड़ा, सस्पेंड
सवाल उठाया जा रहा है कि आखिर 45 दिनों तक आरपीएफ कमांडेंट और आईजी को सिक्यूरिटी सुर्कलर की 2022 की याद क्यों नहीं आयी? आखिर भ्रष्टाचार जैसे गंभीर मामलों में इतनी सुस्ती क्यों दिखायी गयी ? इस मामले की जांच को तत्काल प्रभाव से पूरा क्यों नहीं किया गया? अगर यह सब नहीं हुआ तो इसके लिए कौन लोग जिम्मेदार थे? सिक्यूरिटी सकुर्लर 2022 में यह स्पष्ट किया गया कि भ्रष्टाचार के किसी मामले में आरपीएफ पर्सनल के पकड़े जाने पर सीधे तौर पर सुपरवाइजर अधिकारी समेत CIB/SIB/IVG की भी जिम्मेदारी तय की जायेगी, लेकिन चक्रधरपुर रेलमंडल या यूं कहें दक्षिण पूर्व रेलवे में बीते डेढ़ दशक में भ्रष्टाचार को लेकर जीरो टॉलरेंस की नीति सिर्फ कागजों में सिमट कर रह गयी है. इस बार भी एक्शन में सीआइबी प्रभारी सुरेद्र कुमार को एक्शन से दूर रखा गया है.
यह भी पढ़ें : बंडामुंडा में चोरों ने मालगाड़ी का रैक खोलकर गिराया कोयला, आरपीएफ ने जब्त 700 किलो कोल
देर से ही सही चक्रधरपुर रेल मंडल के सीनियर डीएससी पी शंकर कुट्टी ने बंडामुंडा आरपीएफ थाना प्रभारी अरुण कुमार टोकस को सीनियर डीएससी कार्यालय और राउरकेला सीआईबी में तैनात सब-इंस्पेक्टर सपन कुमार शांडिल्य को चक्रधरपुर मंडल मुख्यालय से अटैच करने का आदेश जारी किया है. इस मामले में सीनियर डीएससी पी शंकर कुट्टी ने कार्रवाई की पुष्टि की और कहा कि भ्रष्टाचार के मामलों में रेल मंडल में जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाई गई है. उन्होंने यह भी कहा कि जिस भी आरपीएफ अधिकारी या जवान की संलिप्तता ऐसे मामलों में पाई जायेगी उसके विरुद्ध त्वरित विभागीय जांच कर कठोर कार्रवाई की जाएगी. यहां दिलचस्प यह है कि सीआईबी में पदस्थापित सपन कुमार शांडिल्या पर राउरकेला में अवैध वेंडरों के सरगना से सांठगांठ के आरोप रहे हैं. उसकी फोटो और वीडियो भी सरगना के साथ सामने आयी लेकिन हर बार उसे बचाने का प्रयास जिम्मेदार अधिकारियों ने किया था.
10 अक्टूबर 2025 को पकड़ा गया था बड़ामुंडा पोस्ट का जवान मोहम्मद असरार
मालूम हो कि बीते 10 अक्टूबर को सीबीआई ने छापेमारी कर बंडामुंडा आरपीएफ पोस्ट के जवान मोहम्मद असरार को राउरकेला के बिसरा चौक स्थित एथलेटिक स्टेडियम के पास एक महिला से 15000 रुपये रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार किया था. इस गिरफ्तारी के बाद सीबीआई ने व्यापक जांच शुरू की थी, जिसके क्रम में थाना प्रभारी अरुण टोकास की संलिप्तता की भी जांच की जा रही थी. सीबीआई ने मामले में 24 नवंबर को बंडामुंडा पोस्ट के विकास पांडे समेत दो आरपीएफ सब-इंस्पेक्टरों को राउरकेला सीबीआई कार्यालय में बुला कर लम्बी पूछताछ की थी. हालांकि मोहम्मद असरार की गिरफ्तारी के बाद क्षेत्रीय सामाजिक संगठन के बंडामुंडा आंचलिक सुरक्षा समिति और मिश्रा युवा संघ ने आरपीएफ डीजी सोनाली मिश्रा को पत्र लिखकर बंडामुंडा थाना प्रभारी के निलंबन एवं कड़ी कार्रवाई की मांग की थी.
बंडामुंडा पोस्ट के कार्यक्षेत्र में स्क्रैप चोरी, कोयला चोरी, रेलवे जमीन की अवैध खरीद-बिक्री जैसे मामलों में असामाजिक तत्वों को आरपीएफ का संरक्षण मिलने के आरोप लगते रहे हैं. इन गंभीर आरोपों को देखते हुए दोनों अधिकारियों पर की गई कार्रवाई को लोग सही कदम बता रहे हैं. हालांकि अरुण कुमार टोकस को फिलहाल अटैच किया गया है. अब यह देखने वाली बात होगी कि यहां नयी पोस्टिंग होती है अथवा पोस्ट को अगले आदेश तक लुकऑफ्टर में चलाया जाता है. फिलहाल बंडामुंडा का चार्ज राउरकेला इंस्पेक्टर कमलेश समाद्दार ही देखेंगे. अब यहां पोस्टिंग को लेकर जोर-आजमाइश की भी सूचना है. इसमें पहला नाम अजमैन मिर्जा और दूसरा नाम एके सिंह का आ रहा है. हालांकि अभी यह स्पष्ट नहीं है कि इस दौड़ में कौन-कौन लोग शामिल हैं जिनमें आईजी की पंसद कौन होगा?















































































