BILASPUR. बिलासपुर के मंडल रेल प्रबंधक राजमल खोईवाल का तबादला कर दिया गया है. उनके स्थान पर उमेश कुमार बिलासपुर के नए डीआरएम होंगे. उमेश कुमार फिलहाल वेर्स्टन रेलवे में पदस्थापित हैं. इस तबादले को बिलासपुर रेल हादसे से जोड़कर देखा जा रहा है. यह भी कहा जा रहा है कि रेल हादसे में दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे के एक बड़े अधिकारी पर भी जल्द गाज गिर सकती है. बिलासपुर जोन में यह हादसे अपने आप में सुरक्षा खामियों का बड़ा उदाहरण बन चुका है.
चार नवंबर 2025 को कोरबा-बिलासपुर लोकल मेमू अप लाइन पर खड़ी कोयला लोड मालगाड़ी से टकरा गयी थी. इस हादसे में 12 यात्रियों की मौत हुई थी और 20 से अधिक यात्री घायल हुए थे. हादसे की जांच दक्षिण पूर्व सर्किल, कोलकाता के रेल सुरक्षा आयुक्त बीके मिश्रा ने जांच की. सीआरएम जांच में सामने आये तथ्यों में ही यह बात स्पष्ट हो चुकी थी कि प्रशासनिक विफलता को भी हादसे के लिए जिम्मेदार ठहराया जा सकता है और बड़े अधिकारियों पर गाज गिर सकती है.
हालांकि सीआरएस ने प्रारंभिक रिपोर्ट में रेल हादसे का बड़ा कारण अप्रशिक्षित चालक को बताया था. हादसे के 20 दिन बाद सीआरएस बीके मिश्रा ने असिस्टेंट लोको पायलट रश्मि राज से केन्द्रीय रेलवे हॉस्पिटल में पूछताछ की. दो घंटे तक चली पूछताछ में कई बातें सामने आयी जिसमें यह स्पष्ट था कि हादसे के पीछे लोको पायलटों की चूक के साथ ही प्रशासन भी पूरी तरह जिम्मेदार है.
रेल सुरक्षा आयुक्त मिश्रा ने रिपोर्ट एसईसीआर जोन मुख्यालय और डिवीजन को भी भेजी थी. रिपोर्ट में उन्होंने बताया कि लोकल ट्रेन के हादसे की पूरी गलती रेल प्रशासन की है. विभाग ने चालक को साइको टेस्ट में पास नहीं होने के बाद भी यात्री ट्रेन को चलाने की जिम्मेदारी सौंपी थी. अगर यात्री ट्रेन की कमान किसी को देना था तो उसे सायकोलोजिकल टेस्ट पास चालक को दिया जाना था. रेल प्रशासन की गलती के कारण यह हादसा हुआ है, जिसे सुधार करने की आवश्यकता है.
हादसे के लिए रेल सेफ्टी आयुक्त ने रेल प्रशासन के अलावा चालक को जिम्मेदार ठहराया है. आगामी दिनों में इस तरह की कोई घटना न हो सके, इसके लिए विशेष सुझाव भी दिये हैं.















































































