Guwahati. सिलीगुड़ी रेल पुलिस ने कामाख्या-रांची साप्ताहिक एक्सप्रेस से दो संदिग्ध बैगों में 65 लाख रुपये कैश के साथ दो रेलकर्मियों को गिरफ्तार किया है. रेलकर्मियों से मिली जानकारी के अनुसार यह बैग गुवाहाटी के Sr.CDO/GHY की ओर से उन्हें दिया गया था जिसे उन्हें रांची में उनके ससुर के घर पहुंचाना था. घटना 16 जुलाई 2025 की बतायी जा रही है.
सिलीगुड़ी रेल पुलिस ने जब बैग का लॉक तोड़ा तो उसमें लगभग 65 लाख रुपये की नकदी मिली. इसके बाद तकनीशियन प्रताप कुमार और कामाख्या-रांची साप्ताहिक एक्सप्रेस ट्रेन के कोच अटेंडेंट को को गिरफ्तार कर लिया गया है. तकनीशियन प्रताप कुमार ने कोचिंग डिपो, अगरतला, लामडिंग डिवीजन से कामाख्या ट्रेन पासिंग में हाल में ही ज्वाइन किया है.
बताया जा रहा है कि इससे पहले भी रेलवे अधिकारी द्वारा अधीनस्तों के माध्यम से गोपनीय बैग रांची स्थित ससुर तक पहुंचाये जा चुके हैं. यह भी बताया जाता है कि सीनियर सीडीओ/जीएचवाई डेढ़ माह पहले ही सीनियर डीएमई/कटिहार से गुवाहाटी (GHY) आये थे. वह दो साल तक कटिहार डिवीजन में रहे. यहां उनकी साख को लेकर अब भी रेलकर्मी सवाल उठाते रहे हैं.
रेल पुलिस की पकड़ में आये 65 लाख रुपये के स्राेत की जांच की जा रही है. अब सवाल यह उठाया जा रहा है कि इतनी बड़ी राशि इन डेढ़ माह के कार्यकाल में इस अधिकारी के पास कहां से आयी. अगर ऐसा कुछ हो रहा था तो इसकी जानकारी पीसीएमई/एनएफआर और जीएम/एनएफआर को क्यों नहीं थी ? यह दोनों इसके राजदार थे?
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार एनएफ रेलवे में यह बताया जाता रहा है कि उक्त पदाधिकारी GMNFR के करीबी रहे हैं. 2023 में Eastern Railway से NFR Railway में उनका तबादला और उन्हें सीनियर डीएमई/केआईआर के पद पर नियुक्त कराने में भी इनकी ही अहम भूमिका रही थी.
अब सवाल यह उठ रहा है कि रांची में भारी मात्रा में नकदी प्राप्त करने और उसे ले जाने के मामले में अब तक उक्त अधिकारी के खिलाफ कोई कार्रवाई क्यों नहीं की गयी? अगर इस मामले में कोई जांच अथवा कारवाई चल रही है तो उसकी खुलासा अब तक क्यों नहीं किया गया? क्या इस मामले को दबाने की कार्रवाई की जा रही है? आखिर ऐसे मामलों में हमेशा की तरह अधीनस्थ ग़रीब कर्मचारियों को ही क्यों बली का बकरा बना दिया जाता है.


