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    Home » चक्रधरपुर रेल मंडल में ट्रांसफर-पोस्टिंग नियमों की ‘क्रैश लैंडिंग’? DRM और Sr DCM की कार्यशैली पर गंभीर आरोप!
    रेलहंट स्पेशल

    चक्रधरपुर रेल मंडल में ट्रांसफर-पोस्टिंग नियमों की ‘क्रैश लैंडिंग’? DRM और Sr DCM की कार्यशैली पर गंभीर आरोप!

    Railhunt News DeskBy Railhunt News DeskJuly 20, 2026
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    सीनियर डीसीएम आदित्य चौधरी और डीआरएम तरुण हुरिया (फाइल फोटो)
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    • सेंसेटिव पदों पर तबादले का काला सच,  3 माह में चुनिंदा रेलकर्मियों को उसी पदों पर हो गयी वापस पोस्टिंग 
    • चक्रधरपुर रेल मंडल में ‘पिक एंड चूज’ का खेल! जीएम-विजिलेंस के आदेशों को 90 दिनों में पलटने का अंदरू़नी सच 

    Chakradharpur/Tatanagar. चक्रधरपुर रेल मंडल (South Eastern Railway) के कमर्शियल विभाग में इन दिनों ट्रांसफर-पोस्टिंग को लेकर सवाल उठ रहे हैं. विभाग पर नियमों को दरकिनार कर चहेते कर्मियों को दोबारा पोस्टिंग देने के आरोप लग रहे हैं, जिसे लेकर रेल व्यवस्था की पारदर्शिता पर उंगलियां उठने लगी हैं.

    इस पूरे मामले में चक्रधरपुर रेल मंडल के दो शीर्ष अधिकारियों डीआरएम (DRM) तरुण हुरिया और सीनियर डीसीएम (Sr. DCM) आदित्य चौधरी की कार्यशैली पर सवाल खड़े किए जा रहे हैं. विभाग में चर्चा है कि सीनियर डीसीएम द्वारा कथित प्रशासनिक या विजिलेंस कारणों से हटाए गए कुछ कर्मचारियों को, डीआरएम कार्यालय द्वारा कुछ ही महीनों के भीतर विशेषाधिकारों के तहत दोबारा उन्हीं पदों या स्टेशनों पर तैनात कर दिया गया. विभागीय सूत्रों का दावा है कि इन फैसलों से रोटेशन और विजिलेंस के नियमों का उल्लंघन हुआ है.

    ट्रांसफर सूचियों में रोटेशन नीति पर सवाल, दो आदेशों की टाइमलाइन

    पूरे विवाद की पृष्ठभूमि में साल 2025 में जारी हुए दो बड़े तबादला आदेश हैं, जिनकी प्रक्रिया पर अब सवाल उठ रहे हैं।

    • 7 फरवरी 2025 का आदेश (संख्या: SER/P-CKP/Comml./Trf. posting/Staff/150/2025): राउरकेला रेल हादसे के बाद प्रशासनिक निर्देशों पर कमर्शियल विभाग के 37 कर्मचारियों का सामूहिक तबादला किया गया था. विभागीय सूत्रों का कहना है कि इस सूची में कुछ ऐसे कर्मियों के नाम भी शामिल थे, जिनका हाल ही में तबादला हुआ था और रोटेशन अवधि पूरी नहीं हुई थी. ...देखे आदेश

    • 16 अप्रैल 2025 का आदेश (संख्या: SER/PCKP/COMML/TRF & POSTING/168/2025): रेलवे विजिलेंस के इनपुट्स और प्रशासनिक समीक्षा के बाद कमर्शियल विभाग द्वारा 30 रेलकर्मियों के स्थानांतरण की एक और सूची जारी की गई थी, जिसे विभाग में सुधार के कदम के रूप में देखा गया था. …देखे आदेश

    तीन महीने के भीतर आदेशों में बदलाव और नई पोस्टिंग पर उठे सवाल

    इन तबादला आदेशों के क्रियान्वयन के महज तीन महीने बाद 11 अगस्त 2025 को जारी नए आदेश में विभाग द्वारा कुछ निर्णयों को बदले जाने के मामले सामने आए हैं, जिसे लेकर विभागीय पारदर्शिता पर चर्चाएं तेज हैं.

    (आदेश संख्या: SER/P-CKP/Comml/Transfer & Posting/Staff/210/2025, ई-ऑफिस फाइल संख्या: SER/CKPOCOMM/71/2025-O/o Sr. DCM/CKP/SER) के तहत 11 कर्मियों की पोस्टिंग की गई. दस्तावेजों के अनुसार, इस सूची में शामिल 10 रेल कर्मचारियों को सक्षम प्राधिकारी (डीआरएम) की प्रशासनिक मंजूरी के बाद पुनः उन्हीं स्टेशनों या पदों पर वापस तैनात कर दिया गया, जहां से कुछ समय पूर्व उनका तबादला किया गया था. … देखे आदेश 

    सूत्रों का दावा है कि मर्सी अपील के तहत किए गए इन बदलावों में अंतिम निर्णय डीआरएम कार्यालय स्तर पर लिया गया है, जिसने पूर्व में विजिलेंस इनपुट्स के आधार पर किए गए तबादलों के औचित्य और रोटेशन पॉलिसी के नियमों को लेकर एक नई बहस छेड़ दी है.

    टाटानगर पार्सल/गुड्स में पोस्टिंग पर सवाल, उच्चाधिकारियों के रुख पर चर्चा

    चक्रधरपुर रेल मंडल में रोटेशन और ट्रांसफर नियमों को लेकर उठ रहे सवाल सिर्फ मुख्यालय तक सीमित नहीं हैं, बल्कि इसका असर मंडल के प्रमुख पार्सल/गुड्स में भी देखा जा रहा है. विभागीय सूत्रों के अनुसार, कुछ चुनिंदा स्टेशनों पर लंबे समय से एक ही तरह की प्रशासनिक व्यवस्था काम कर रही है.

    दो दिन पूर्व टाटानगर के लिए जारी एक नए आदेश के बाद इन चर्चाओं को और बल मिला है, जहां प्रशासनिक शुचिता के नियमों को दरकिनार कर पसंदीदा पोस्टिंग देने के आरोप लग रहे हैं. इस पूरे मामले में उच्च रेल प्रबंधन और प्रमुख मुख्य वाणिज्य प्रबंधक (PCCM) कार्यालय की चुप्पी पर भी सवाल उठने लगे हैं.

    इसका सीधा उदाहरण दो दिन पहले जारी हुआ कार्यालय आदेश संख्या: SER/P-CKP/Comml./Transfer & Posting/Staff/288/2026 है, जो कमर्शियल सुपरिंटेंडेंट अमित चौधरी की पोस्टिंग से संबंधित है. यह आदेश ट्रांसफर-पोस्टिंग की रोटेशन नीति के नियमों के उल्लंघन और प्रशासनिक पारदर्शिता की कमी को स्पष्ट रूप से परिलक्षित करता है. …देखे आदेश

    रेलवे के आधिकारिक रिकॉर्ड के मुताबिक, कमर्शियल सुपरिंटेंडेंट अमित चौधरी अपने कुल 28 वर्षों के सेवाकाल में से लगभग 26 वर्षों तक टाटानगर में ही पदस्थापित रहे हैं. विभागीय दस्तावेजों के अनुसार, टाटानगर गुड्स शेड में करीब 10 साल की सेवा के बाद प्रशासनिक/सतर्कता (विजिलेंस) कारणों से उनका स्थानांतरण किया गया था.

    इसके बाद उन्हें पहले टाटानगर में चीफ पार्सल सुपरिंटेंडेंट (CPS) बनाया गया, और फिर कुछ ही महीनों के भीतर दोबारा चीफ गुड्स सुपरिंटेंडेंट (CGS) के रूप में गुड्स शेड में वापस नियुक्त कर दिया गया.

    रोटेशन नीति और नियमों के विपरीत, एक ही रेलकर्मी को प्रशासनिक आपत्तियों के बावजूद टाटानगर के सबसे महत्वपूर्ण और अधिक राजस्व वाले विभागों (पार्सल और गुड्स शेड) में ही क्रमिक रूप से नियुक्त किए जाने को लेकर अब सीनियर डीसीएम (Sr. DCM) कार्यालय की कार्यप्रणाली और मंशा पर सवाल उठने लगे हैं।

    इस पूरे मामले और लग रहे आरोपों के संबंध में संबंधित रेल अधिकारियों से संपर्क कर उनका पक्ष जानने का प्रयास किया गया, उनकी तरफ से फिलहाल कोई प्रतिक्रिया प्राप्त नहीं हुई है.

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    चरमराई रेल व्यवस्था: “लेट डिवीजन” का चला # टैग

    चक्रधरपुर रेल मंडल में ट्रांसफर-पोस्टिंग और प्रशासनिक उठापटक को लेकर जारी विवादों के बीच, मंडल के मुख्य कार्य यानी रेल संचालन और यात्री सुरक्षा की स्थिति पर भी गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं. स्थानीय स्तर पर यह चर्चा तेज है कि प्रशासनिक विचलनों के कारण बुनियादी व्यवस्था प्रभावित हो रही है.

    • ट्रेनों की समयबद्धता प्रभावित: कभी परिचालन के मामले में बेहतर प्रदर्शन करने वाला यह रेल मंडल वर्तमान में ट्रेनों की लेटलतीफी को लेकर यात्रियों की आलोचनाओं का सामना कर रहा है. कई महत्वपूर्ण यात्री ट्रेनें नियमित रूप से रीशेड्यूल और घंटों देरी से चल रही हैं, जिससे यात्रियों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है.

    • सुरक्षा और हादसों की चुनौतियां: हाल के महीनों में मंडल के अंतर्गत कुछ रेल हादसों के मामले भी सामने आए हैं, जिन्होंने रेलवे के सुरक्षा तंत्र पर सवाल खड़े किए हैं. इसमें हाल ही में डीआरएम के निजी सैलून से जुड़ी दुर्घटना की घटना भी शामिल है. रेल विशेषज्ञों का मानना है कि इंफ्रास्ट्रक्चर और सुरक्षा जैसे बुनियादी विषयों पर ध्यान केंद्रित करने के बजाय प्रशासनिक फेरबदल की वजह से परिचालन व्यवस्था प्रभावित हो रही है.

    आखिर रेलवे बोर्ड कब तोड़ेगा चुप्पी?

    एक तरफ जहां भारतीय रेलवे में आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर और तकनीकी अपग्रेडेशन के बड़े दावे किए जा रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ चक्रधरपुर रेल मंडल में रोटेशन और ट्रांसफर नीतियों की अनदेखी प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल खड़े करती है. रेल गलियारों में यह चर्चा आम है कि क्या रेलवे बोर्ड और रेल मंत्रालय के पास मंडल के इन प्रशासनिक घटनाक्रमों की कोई स्पष्ट रिपोर्ट है या नहीं.

    जनरल मैनेजर (GM) और विजिलेंस विभाग के दिशा-निर्देशों के तहत किए गए तबादलों को महज 90 दिनों के भीतर सक्षम प्राधिकारी द्वारा बदले जाने की प्रक्रिया ने शीर्ष नेतृत्व की निगरानी प्रणाली पर भी उंगलियां उठा दी हैं. मंडल के अधिकारी और कर्मचारी संघों से जुड़े सूत्रों का मानना है कि रेलवे की प्रशासनिक शुचिता और पारदर्शिता को बहाल करने के लिए इस पूरे मामले की उच्च स्तरीय और निष्पक्ष जांच होनी अनिवार्य है, ताकि चक्रधरपुर रेल मंडल में नियमों के प्रति विश्वसनीयता बनी रहे.

    उठ रहे सवाल, जिनका जवाब रेलवे जोनल विजिलेंस को खोजना है:

    • संवेदनशील पदों पर तबादले और रोटेशन के नियम क्या केवल चुनिंदा रेलकर्मियों पर ही लागू होते हैं?

    • स्थानांतरण के दौरान स्टेशन बदलने के बजाय केवल पटल (कुर्सी) बदलने के प्रशासनिक निर्णयों का औचित्य क्या है?

    • आधिकारिक तबादला आदेश जारी होने के बाद भी महीनों तक संबंधित रेलकर्मियों को मूल जगह से रिलीज न किए जाने का कारण क्या है?

    • आखिर कुछ रेलकर्मियों को बार-बार पार्सल और गुड्स शेड जैसे संवेदनशील विभागों में ही क्रमिक रूप से पदस्थापित करने के पीछे क्या नियम हैं?

    • टाटा, सीकेपी, राउरकेला और झारसुगुड़ा पार्सल/गुड्स हब में ऐसे कितने कर्मी हैं, जो रोटेशन अवधि पूरी होने के बाद भी वर्षों से एक ही जगह जमे हैं?

    • हर तबादला आदेश के अनुपालन को सुनिश्चित करने के लिए बार-बार प्रशासनिक कंट्रोल ऑर्डर जारी करने की आवश्यकता क्यों पड़ी?

    • क्या पिछले दो वर्षों में जारी हुए तबादला आदेशों के तहत सभी चिन्हित रेलकर्मी अपने मूल पदस्थापन स्थल से रिलीज हो चुके हैं?

    • जुलाई-अगस्त 2025 में हुए तबादलों के पूर्ण अनुपालन से पहले ही उनकी त्वरित वापसी किस नियम के तहत की गई?

    • कमर्शियल विभाग में ‘कूलिंग ऑफ पीरियड’ (Cooling-off Period) का नियम क्या सभी पर समान रूप से लागू होता है या इसमें ‘पिक एंड चूज’ की नीति अपनाई गई है?

    क्रमश : 

    रेलहंट का प्रयास है कि सच रेल प्रशासन के सामने आये. ऐसे में अगर किसी को यह लगता है उसकी बात नहीं सुनी जा रही है तो वह अपना पक्ष whatsapp 9905460502 पर भेज सकते है, उस पर गंभीरता से संज्ञान लिया जायेगा.

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