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    Home » ECR DNR DIV : 31 करोड़ के टेंडर में RDSO एप्रुव कंपनियों के टर्मिनेशन पर GM-PCEE का मौन!, चर्चा में विद्युत विभाग
    रेलहंट स्पेशल

    ECR DNR DIV : 31 करोड़ के टेंडर में RDSO एप्रुव कंपनियों के टर्मिनेशन पर GM-PCEE का मौन!, चर्चा में विद्युत विभाग

    Railhunt News DeskBy Railhunt News DeskDecember 13, 2025
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    • बड़ा सवाल – दानापुर विद्युत विभाग ने रेलवे बोर्ड की गाइड-लाइन और यात्रियों की सुरक्षा को किया दरकिनार !
    • बड़ा आरोप – एजेंसी चयन में तकनीकी अनुभव, सर्टिफाइड वर्कमैन और फेलियर रेसियाे का नहीं रखा गया ध्यान
    • क्या एलएचबी कोचों के आरएमपीयू रख-रखाव के टेंडर में गड़बड़ी के आरोपों की जांच को प्रभावित किया जा रहा!

     PATNA. रेलवे बोर्ड की गाइडलाइन को दरकिनार कर दानापुर मंडल विद्युत विभाग ने निविदा संख्या EL-50-DNR-OPEN-45/2024-25 का निष्पादन किया गया है. यह आरोप निविदा में शामिल RDSO-approved OEM(s) ने रेलवे के आला अधिकारियों को शिकायत सौंपकर लगायी है. मजे की बात यह है कि निविदा प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए की गयी शिकायतों पर सात माह बाद भी कोई एक्शन नहीं लिया गया. इस मामले में #PCEE/ECR से लेकर #GM/ECR के मौन ने RDSO-approved OEM(s) को विचलित कर दिया है. 31 करोड़ के टेंडर में गड़बड़ी की शिकायत लेकर रेलवे बाेर्ड से लेकर रेलवे विजिलेंस और सीवीसी का दरवाजा खटखट चुके ये वेंडर अब न्यायालय की शरण में जाने की तैयारी कर रहे हैं.

    यह भी पढ़ें : ECR DNR DIV : 31 करोड़ की निविदा में RDSO एप्रुव कंपनी का टर्मिनेशन बनेगा गले की फांस, अब जांच के घेरे में कमेटी!

    इस टेंडर काे यात्रियों की सुरक्षा से जाेड़कर देख रहे इन वेंडरों का कहना है कि रेलवे बोर्ड के दिशानिर्देश और टेंडर नोट में यह स्पष्ट किया गया था कि RDSO-approved OEM(s) के लिए तकनीकी बिड में किसी एलिजिबिलिटी क्राइटेरिया की जरूरत नहीं होगी. बावजूद उन्हें बिना कारण बताये टेंडर से बाहर कर दिया गया. निविदा में शामिल एक कंपनी के प्रतिनिधि ने रेलहंट को बताया कि तकनीकी बिड की प्रक्रिया पूरी होते ही मई 2025 में ही उन्होंने यह मामला हर स्तर पर उठाया लेकिन उसका कोई नतीजा सामने नहीं आया है. आरोप है कि जांच को प्रभावशाली लोगों ने दबाकर रखा है. जांच अथवा शिकायत की किसी भी बिंदू की जानकारी अब तक शिकायतकर्ताओं को नहीं दी जा रही है. लिहाजा जल्द ही RDSO-approved OEM(s) इस मामले में बैठक कर कानूनी पहल पर विचार करने जा रहे हैं.

    क्या कहता है रेलवे बोर्ड का दिशानिर्देश और टेंडर नोट और लगाये गये आरोप 

    रेलवे बोर्ड के दिशानिर्देश letter no. 2019/Elect(G)/165/1 dated 22.04.20 के हवाले से निविदा संख्या EL-50-DNR-OPEN-45/2024-25 के नोट में यह स्पष्ट किया गया है कि ”no eligibility criteria is required for RDSO approved vendors/OEMs. However in case of multiple L-1, Tenderer having higher Bid capacity will be awarded the contract. For this purpose all firms are required to submit Annexure – VI, Part 1 of GCC works.” ऐसे में सवाल यह उठाया जा रहा है कि रेलवे बोर्ड की गाइडलाइन को दरकिनार कर RDSO-approved OEM(s) को कैसे टेंडर से बाहर कर दिया ? क्योंकि तकनीकी बिड के बाद ही फाइनेंसियल बिड खुलेगा और तभी किसी एजेंसी की बिड कैपेसिटी का निर्धारण हो सकेगा? जो तकनीकी बिड की प्रक्रिया पूरी होने से पहले संभव नहीं है.

    RDSO-approved OEM(s) ने अपनी शिकायत में यह बात सामने लायी थी और बताया था कि attention to Railway Board Letter No. 2019/Elect(G)/165/1 dated 22.04.20, which clearly exempts ROSO-approved sources from minimum Technical and Financial eligibility criteria for such tenders. This Railway Board letter was part of tender documents, but still ignoring these directives sets the dangerous standard where non-experienced and non-OEM entities are favoured over established, technically qualified sources.

    यात्रियों की सुरक्षा से सीधे जुड़ा है यह मामला 

    दानापुर डिवीजन विद्युत विभाग ने यह टेंडर एलएचबी कोचों में स्थापित विभिन्न आरएमपीयू का व्यापक वार्षिक रख-रखाव अनुबंध के आधार पर प्राथमिक अनुरक्षित ट्रेनों के एसी कोचों में 03 वर्षों के लिए आउटसोर्सिंग एसीसीआई गतिविधि के साथ जारी किया था. आरएमपीयू का तात्पर्य रूफ माउंटेड पैकेज यूनिट से है जो रेलवे कोच की छत पर स्थापित एयर कंडीशनिंग सिस्टम को संदर्भित करता है. आरएमपीयू एक विशिष्ट स्व निहित एयर कंडीशनिंग पैकेज है जिसे विशेष रूप से रेलवे कोचों के लिए डिजाइन किया गया है, ताकि यात्रियों के लिए आरामदायक वातावरण बनाए रखा जा सके. यह यात्रियों की सुरक्षा को सीधे तौर पर प्रभावित करने वाला मामला है. ऐसे में अगर इसमें तकनीकी और दूसरे अर्हताओं का ध्यान नहीं रखा गया तो यह सीधे तौर पर यात्रियों की सुरक्षा को प्रभावित कर सकता है. ऐसी कई घटनाएं बीते दिनों हुई है जो इसका उदाहरण बन सकती हैं.

    एजीएम की अगुवाई में चल रही जांच, Sr DEE (G) का तबादला

    ऐसा सूत्रों का कहना है कि RDSO-approved OEM(s) की शिकायत पर रेलवे बोर्ड ने संज्ञान लिया और पूर्व मध्य रेलवे प्रबंधन स्तर पर एजीएम की अगुवाई में जांच समिति भी बनायी गयी. इसमें मैकेनिकल और पर्सनल के अधिकारी शामिल थे. ऐसा सूत्रों ने बताया कि कमेटी ने निविदा के निष्पादन को लेकर बनायी गयी कमेटी में शामिल Sr DEE (G),Sr DSTE, Sr DFM से इस मामले में स्पष्टीकरण भी मांगा. इस बीच Sr DEE (G) का तबादला हो गया है जिसे इस मामले को जोड़कर देखा जा रहा. हालांकि यह जांच किस निष्कर्ष पर पहुंची, रेलवे की जांच एजेंसियों ने क्या कदम उठाये अब तक स्पष्ट नहीं हो सका है.

    यह भी पढ़ें : जीएम छत्रसाल सिंह को मिल चुका है लीडरशिप व एक्सीलेंस अवार्ड

    31 करोड़ के टेंडर में RDSO एप्रुव कंपनियों के टर्मिनेशन पर फिलहाल #ECR_GM/PCEE मौन हैं, इससे विचलित RDSO-approved OEM(s) इस मामले में कानूनी एक्शन पर मंथन कर रही है जो आने वाले समय में इस निविदा से जुड़े अधिकारियों के लिए परेशानी का कारण बन सकता है.

    अगर भ्रष्टाचार हुआ है तो उसे रोकने की जिम्मेदारी किसकी !

    फिलहाल पूर्व मध्य रेलवे में विद्युत विभाग की कार्यप्रणाली लगातार सवालों के घेरे में हैं. यहां जिस तरह से काम हो रहा, टेंडरों का निष्पादन किया जा रहा है जो काफी चिंताएं पैदा कर रहा है. इसमें तुरंत दखल देने की ज़रूरत जतायी जा रही है. इस लापरवाह रवैये की वजह से यात्रियों की सुरक्षा पर भी सवाल उठाये जा रहे हैं. ऐसे में जरूरी है कि जब शिकायत सामने आयी है तो जीएम और प्रधान मुख्य विद्युत अभियंता पूरे मामले में दखल देकर विस्तृत जांच कराये ताकि सिस्टम के प्रति भरोसा कायम रहे और भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति सिर्फ कागजों पर ही नहीं सीमित रह जाये!

    अधिकारियों और उनके फाइनेंशियल लेन-देन की भी जांच भी जरूरी है. डिपार्टमेंट के परफॉर्मेंस का मूल्यांकन हो. यह जरूरी है कि ELECTRICAL DEPT पर तुरंत ध्यान दिया जाए और उसकी गतिविधियों को कंट्रोल में लाया जाए.  हाल के महीनों में ECR में #CBI ने कई ठेकेदारों और वरिष्ठ रेल अधिकारियों पर रिश्वत के लेन-देन के मामलों में कार्रवाई की है. प्रश्न यह है कि इस कड़ी के शीर्ष पर बैठे अधिकारी खासकर जनरल मैनेजर जो #GCC के तहत कार्रवाई के लिए जिम्मेदार होते हैं, अगर संबंधित अधिकारी-कंपनियों/फर्मों/कॉन्ट्रैक्टरों के विरुद्ध यथोचित कार्रवाई सुनिश्चित की गयी होती तो शायद आज यह स्थिति नहीं आती !

    रेलवे में यह तथ्य अब चर्चा में है कि जब तक शीर्ष अधिकारियों की जिम्मेदारी तय नहीं होगी, तब तक न तो सिस्टम सुधरेगा, न ही सर्विस सुधरेगी, न ही सर्विस की क्वालिटी सुधरेगी, न ही निर्माण कार्यों की गुणवत्ता सुधरेगी, न ही सिस्टम पर देश के लोगों का विश्वास बढ़ेगा. … जारी 

    रेलहंट का प्रयास है कि सच रेल प्रशासन के सामने आये. ऐसे में किसी को अपना पक्ष रखना है तो whatsapp 9905460502 पर भेज सकते है, पूरे सम्मान के साथ उसका संज्ञान लिया जायेगा. 

    danapur electrical edpt tender EAST CENTRAL RAILWAY ECR DNR Division GM-PCEE's silence on the termination of RDSO-approved companies ₹31 crore tender
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