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DANAPUR : बक्सर के यात्री से विभूति एक्सप्रेस में ₹1.50 लाख की छिनतई…, RPF-GRP की भूमिका पर सवाल !

PATNA. यात्रियों की सुरक्षा का मूलमंत्र लेकर चलने वाले RPF की कार्यप्रणाली सवालों के घेरे में है. ट्रेनों से लेकर स्टेशन तक अवैध वेंडिंग की सरपरस्ती को लेकर चर्चा में रहे आरपीएफ के जवान अक्सर दूसरे कई मामलों का लेकर भी चर्चा में आते रहे है जब बल की प्रतिष्ठा तक आंच पहुंच जाती है. ताजा मामला 17 अगस्त 2025 को 12334 डाउन विभुति एक्सप्रेस की है जिसमें एक यात्री से 1.50 लाख रुपये के छिनतई के मामले में ट्रेन की RPF स्कॉट पार्टी और रेल पुलिस की भूमिका सवालों के घेरे में है.

यात्री की शिकायत के बाद हुई पूछताछ में स्कॉट पार्टी के दो जवानों को पहचान की गयी जिन पर यात्री के बैग से ₹1.50 लाख रुपए छीनने का आरोप लगा था. बक्सर में सवार हुए यात्री ने रेल मदद के हेल्पलाइन नंबर 139 पर यह शिकायत की थी. जो कंप्लेन नंबर 2025081712117 दिनांक 17.08.2025 के रूप में दर्ज की गयी.

वेबपोर्टल railwellwishers.com की रिपोर्ट के अनुसार विभुति एक्सप्रेस बक्सर से 21.43 बजे खुली थी जो दानापुर 23.45 बजे पहुंची. रेल मदद में दर्ज शिकायत के आधार पर दानापुर जीआरपी ने ट्रेन में चल रही आरपीएफ के स्कॉट पार्टी के पांचों लोगों को रोक लिया. मौके पर शिकायतकर्ता भी मालिक के साथ रेल थाना पहुंचा. यहां संदिग्ध जवानों की तलाशी ली गयी लेकिन कोई राशि बरामद नहीं हो सकी. हालांकि यात्री ने एस्कार्ट पार्टी के उन दो सदस्यों की पहचान की, जिन पर रुपये छीनने के आरोप लगे थे.

यह बताया जाता है कि आरपीएफ की प्रतिष्ठा दांव पर लगने की सूचना मिलते ही पूरा महका हरकत में आ गया. विभागीय सूत्रों की माने तो शिकायत को दबाने के लिए कहानी गढ़ी गयी कि पैसे घर के लाॅकर में ही छूट गए थे. शिकायतकर्ता से यहां तक लिखवा लिया गया कि उसे कोई शिकायत नहीं है. इसके बाद पूरे मामले को रफा-दफा कर दिया गया. हालांकि आरपीएफ के रिस्पांस रिपोर्ट में यह लिखा गया कि शिकायत थी कि जीआरबी ‘GRB’ ने यात्री के बैग से पैसे निकाल लिए थे और यह राशि 150000 थी.

इस पूरे घटनाक्रम को लेकर आरपीएफ और रेल पुलिस की भूमिका सवालों के घेरे में आ गयी है. यहां सवाल यह उठाया जा रहा है कि ट्रेन में यात्री से रुपये की छिनतई हुई या नहीं ? अगर शिकायत सही थी तो आरपीएफ के स्तर पर क्या जांच और कार्रवाई की गयी? आरपीएफ एस्कार्ट पार्टी के दो जवानों को 11 बजे तक थाना में क्यों बैठा कर रखा गया था? रेल पुलिस ने मामले की सत्यता की जांच के लिए क्या-क्या  कदम उठाये ? अगर शिकायत झूठी अथवा गुमराह करने वाली थी तो यात्री पर क्यों नहीं कार्रवाई की गयी‍? RPF और GRP ने इस मामले को गंभीरता से लेने की जगह हल्के में क्यों निपटा दिया?

चलती ट्रेन में यात्री से रुपयों की छितनई के इस मामले में जांच और कार्रवाई की गति चाहे जो भी रही हो पूरे मामले ने आरपीएफ और जीआरपी की भूमिका को जरूर सवालों के घेरे में लाकर खड़ा कर दिया है.

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