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अलरसा के संस्थापकों में से एक कॉमरेड बी चौधरी का निधन, मिदनापुर में ली अंतिम सांस

रेलहंट ब्यूरो, रांची

ऑल इंडिया लोको रनिंग स्टॉफ एसोसिएशन के संस्थापक सदस्य और पूर्व लोको पायलट कॉमरेड बी चौधरी का 15 अक्टूबर मंगलवार को निधन हो गया है. वह लंबे समय से बीमार चल रहे थे. कामरेड बी चौधरी ने दक्षिण पूर्व रेलवे के आद्रा में अलरसा के स्थापना में अहम भूमिका निभायी थी. उन्होंने पश्चिम बंगाल के मिदनापुर में अंतिम सांस ली. कॉमरेड बी चौधरी के निधन पर अनारा के लोको पायलट व अन्य सहकर्मियों ने भावभीनी श्रद्धांजलि दी है. कामरेड को संगठन का जुझारू साथी बताते हुए रेलकर्मियों ने कहा कि उन्होंने न सिर्फ संगठन की स्थापना में बहुमूल्य योगदान दिया बल्कि हमेशा संगठन के प्रति अपना योगदान देते रहें.

1974 के हड़ताल में बी चौधरी को भी अन्य रेलकर्मियों के साथ 14/2 की धारा लगाकर नौकरी से बर्खास्त कर दिया गया था. इसके बाद उन्होंने लगातार संघर्ष करके 1988 में अपनी नौकरी ज्वाइन की तथा 1989 में रेलवे की सेवा से निवृत्त हो गये. इन्होंने अपनी उम्र के आखिरी पड़ाव तक हर मीटिंग हर बीजीएम हर सम्मेलन में अपना योगदान दिया और लगातार कर्मचारियों के डिफेंस भी करते रहें. रेलकर्मियों ने दो मिनट का मौन रखकर कामरेड बी चौधरी की आत्मा को शांति के लिए प्रार्थना की है.

कॉमरेड बी चौधरी और कामरेड सरोज कुमार धर ने रेल श्रमिकों का कम वेतन, अपमानवीय कार्य शर्ते एवं शोषण के खिलाफ श्रमिक आंदोलन की शुरुआत की. इन्होंने पहली लड़ाई 1960 की एक दिवसीय देशव्यापी सफल रेल श्रमिक हड़ताल थी जिसमें उन्होंने ERMU के नेता के रूप में धर के नेतृत्व में आंदोलन में सफल रहा. इसके बाद धर ने त्यागपत्र देकर रेलवे कमीशन, कोलकाता से 1965 में ‘सहायक विधुत चालक’‌ के रूप में दक्षिण पूर्व रेलवे के ‘ अनारा’ मुख्यालय में ज्वाइन किया. यहां उन्होंने रनिंग स्टाफ के कम वेतन, असीमित ड्यूटी, हाफ पैंटवाली वर्दी, चालकों और सहायक चालकों हेतु अलग-अलग रनिंग रूम, 20 किलोग्राम से अधिक के टूल बॉक्स को ढोने की बाध्यता आदि के खिलाफ संघर्ष किया और इसमें बदलाव कर पाने में सफल रहे. कामरेड को तब कॉमरेड ने देश भर के बिखरे रनिंग कर्मियों को एकजुट करते हुए ट्रेड यूनियन एक्ट के तहत 1970 में विजयवाड़ा अधिवेशन में अलारसा की स्थापना की.

यह भी जाने : कॉमरेड धर ने 14/2 में बर्खास्त सहयोगियों की बहाली के लिए छोड़ दी थी रेलवे की नौकरी

रेलवे की दमनात्मक कार्यवाही से आंदोलन की उपज का परिणाम 14 दिनों की सफल रेल हड़ताल से सामने आया जब रेल प्रबंधन उनकी मांगों को मानने पर मजबूर हुआ. कॉमरेड धर के नेतृत्व में नेगोसिएशन द्वारा पूरी हड़ताल अवधि को स्पेशियल छुट्टी घोषित कराया गया. छ: सूत्री चार्टर ऑफ डिमांड जो पूरे श्रमिकों के हेतु देशव्यापी 1974की रेल हड़ताल की नीव बना, उनमें सम्मानजनक तनख्वाह, रेल श्रमिकों को बोनस., रनिंग स्टाफ को अधिकतम 8 घंटे ड्युटी तथा इन्टेंसिव केटेगरी, मेडिकल डिकेटेग्राइस होने पर बच्चे को नौकरी, टेरिकोटन कपड़े की वर्दी आदि आज भी कॉमरेड की विशाल दूरदर्शिता का अहसास करता है. इस आंदोलन में कामरेड बी चौधरी की भूमिका अग्रणी नेताओं में रही थी.

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