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रेलवे सुरक्षा में चूक : सिमरी बख्तियारपुर स्टेशन पर पैसेंजर ट्रेन के इंजन और 3 डिब्बों में लगी भीषण आग, गहरी नींद में सो रहे थे यात्री

A massive fire broke out on a train in Bihar - 1

Saharsa (Bihar). बिहार के सहरसा जिले में भारतीय रेलवे के सुरक्षा और रखरखाव तंत्र पर गंभीर सवाल खड़ा करने वाला एक बड़ा हादसा सामने आया है. सिमरी बख्तियारपुर रेलवे स्टेशन पर तड़के समस्तीपुर-सहरसा पैसेंजर ट्रेन (गाड़ी संख्या 63344) के इंजन में अचानक भीषण आग लग गई.

देखते ही देखते आग ने ट्रेन की तीन बोगियों को अपनी चपेट में ले लिया. राहत की बात यह रही कि समय रहते यात्रियों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया, जिससे कोई बड़ा जान-माल का नुकसान नहीं हुआ, लेकिन इस घटना ने रेलवे की तकनीकी सतर्कता और सुरक्षा दावों की पोल खोल दी है.

तड़के 3 बजे हादसा: चीख-पुकार और जान बचाने की होड़

मिली जानकारी के अनुसार, यह हादसा तड़के करीब 3:00 बजे हुआ, जब समस्तीपुर-सहरसा पैसेंजर ट्रेन सिमरी बख्तियारपुर स्टेशन पर पहुंची थी. उस वक्त ट्रेन में सवार अधिकांश यात्री गहरी नींद में थे. अचानक इंजन से तेज धुआं और लपटें उठने लगीं.

जैसे ही धुएं की बदबू कोच तक पहुंची, यात्रियों के बीच चीख-पुकार मच गई. बदहवासी और अफरा-तफरी के माहौल में यात्रियों ने तुरंत ट्रेन से नीचे कूदकर और सामान छोड़कर अपनी जान बचाई. यदि ट्रेन स्टेशन पर न रुककर तेज रफ्तार में चल रही होती, तो यह एक बड़े त्रासदी में बदल सकता था.

सुरक्षा तंत्र पर उठे गंभीर सवाल, लापरवाही या तकनीकी नाकामी?

यह घटना सीधे तौर पर रेलवे प्रशासन और मेंटेनेंस विभाग की बड़ी लापरवाही को दर्शाती है. स्टेशन पर खड़ी ट्रेन के इंजन में अचानक इस तरह आग लग जाना कई तीखे सवाल खड़े करता है:

  • मेंटेनेंस जांच में कोताही: क्या ट्रेन को रवाना करने से पहले उसके इंजन और इलेक्ट्रिकल वायरिंग की अनिवार्य जांच की गई थी?

  • फायर सेफ्टी सेंसर की विफलता: इंजन या बोगियों में आग लगने की स्थिति में एलार्म या ऑटोमैटिक सुरक्षा उपकरण काम क्यों नहीं कर सके?

  • रेलवे ट्रैक व कोच का रखरखाव: यात्रियों की सुरक्षा से समझौता कर जर्जर स्थिति में चल रही बोगियों पर ध्यान क्यों नहीं दिया जा रहा?

ढाई घंटे की मशक्कत के बाद पाया गया काबू

आग लगने की सूचना मिलते ही रेलवे सुरक्षा बल (RPF), स्थानीय पुलिस और अग्निशमन विभाग की टीमें मौके पर पहुंचीं. कड़ी मशक्कत के बाद लगभग ढाई घंटे में आग पर पूरी तरह काबू पाया जा सका. इस दौरान स्टेशन परिसर में करीब 3 घंटे तक रेल यातायात बाधित रहा, जिसे सुबह 6 बजे के बाद सामान्य किया जा सका.

प्रशासन ने घटना के कारणों की उच्चस्तरीय जांच के आदेश दे दिए हैं. हालांकि, यात्रियों और स्थानीय लोगों का कहना है कि महज जांच के आदेश देने से रेलवे अपनी सुरक्षा खामियों की जिम्मेदारी से बच नहीं सकता.

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