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इंडियन रेलवे फाइनेंस कॉरपोरेशन को मद्रास हाई कोर्ट से बड़ी राहत, ₹353 करोड़ का GST टैक्स डिमांड नोटिस रद्द, जानें क्या है पूरा मामला

New Delhi/Chennai.

रेल मंत्रालय के अधीन काम करने वाली पीएसयू इंडियन रेलवे फाइनेंस कॉरपोरेशन (IRFC) को मद्रास हाई कोर्ट से बड़ी कानूनी राहत मिली है. अदालत ने राज्य कर विभाग द्वारा जारी किए गए 353.18 करोड़ रुपये के टैक्स डिमांड और रिकवरी नोटिस को रद्द कर दिया है.

यह फैसला रेलवे की इस वित्तीय इकाई के लिए एक बड़ी राहत माना जा रहा है. मालूम हो कि मार्च 2025 में इंडियन रेलवे कैटरिंग एंड टूरिज्म कॉर्पोरेशन (IRCTC) और इंडियन रेलवे फाइनेंस कॉर्पोरेशन (IRFC) को सरकार ने ‘नवरत्न’ का दर्जा दिया था.

जाने क्या है यह मामला

चेन्नई के असिस्टेंट कमिश्नर (स्टेट टैक्स) द्वारा IRFC को ₹353.18 करोड़ का टैक्स डिमांड नोटिस जारी किया गया था. यह मामला इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) के दावे से जुड़ा था. असल में, ITC की यह राशि GSTR-2A में दिख रही थी, लेकिन इसे निर्धारित प्रक्रिया के तहत क्लेम नहीं किया गया था, जिसके कारण यह लैप्स हो गई थी. इसके आधार पर टैक्स अथॉरिटी ने मांग नोटिस और रिकवरी की कार्यवाही शुरू कर दी थी.

हाई कोर्ट का आदेश और निर्देश

IRFC ने इस टैक्स मांग और रिकवरी नोटिस को मद्रास हाई कोर्ट में चुनौती दी थी. मामले की सुनवाई करते हुए हाई कोर्ट ने 27 जुलाई 2026 को अपना फैसला सुनाया (जिसकी प्रति कंपनी को 29 जुलाई को प्राप्त हुई).

अदालत ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि 

  • असिस्टेंट कमिश्नर की ओर से जारी असेसमेंट ऑर्डर और रिकवरी नोटिस दोनों को पूरी तरह रद्द किया जाता है.
  • मामले को नए सिरे से समीक्षा और पुनर्विचार (Re-consideration) के लिए संबंधित टैक्स अधिकारी के पास वापस भेजा जाता है.
  • टैक्स विभाग को आदेश की प्रति मिलने के तीन महीने के भीतर नया आदेश पारित करना होगा.
  • निर्णय लेने से पहले IRFC को अपनी बात रखने का उचित अवसर दिया जाएगा, जिसमें पर्सनल हियरिंग (व्यक्तिगत सुनवाई) भी शामिल होगी.

एक्सचेंज फाइलिंग में कंपनी का बयान

IRFC ने 30 जुलाई 2026 को शेयर बाजारों (BSE और NSE) को दी गई आधिकारिक फाइलिंग में इस अदालती आदेश की जानकारी साझा की. कंपनी ने स्पष्ट किया कि यह मामला पूरी तरह से कर निर्धारण की प्रक्रियात्मक समीक्षा से जुड़ा है. इसमें कंपनी के प्रमोटरों, निदेशकों या की-मैनेजमेंट पर्सन (KMP) के खिलाफ कोई व्यक्तिगत लिटिगेशन शामिल नहीं है.

क्योंकि मामला दोबारा विचार के लिए विभाग को वापस भेजा गया है, इसलिए वर्तमान में किसी भी तरह के सेटलमेंट, जुर्माने या मुआवजे से जुड़ी शर्तें लागू नहीं होती हैं. रेलवे इंफ्रास्ट्रक्चर फंडिंग में जुटी इस प्रमुख पीएसयू के लिए कोर्ट का यह कदम फिलहाल एक बड़ी वित्तीय राहत साबित हुआ है.

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