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    Home » समान ग्रेड पे में मिली पदोन्नति भी MACP में मानी जाएगी, रेलवे ट्रेन मैनेजर विवाद पर सुप्रीम कोर्ट का अहम निर्णय, जाने क्या है मामला
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    समान ग्रेड पे में मिली पदोन्नति भी MACP में मानी जाएगी, रेलवे ट्रेन मैनेजर विवाद पर सुप्रीम कोर्ट का अहम निर्णय, जाने क्या है मामला

    Railhunt News DeskBy Railhunt News DeskJuly 25, 2026
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    • पदोन्नति की गिनती केवल ग्रेड पे के बदलाव से नहीं, बल्कि पद और जिम्मेदारी में आई प्रगति के आधार पर की जाएगी

    NEW DELHI. उच्चतम न्यायालय (Supreme Court) ने रेलवे के गार्ड/ट्रेन मैनेजर कैडर में MACP (Modified Assured Career Progression) योजना के तहत मिलने वाले वित्तीय उन्नयन को लेकर महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक फैसला दिया है.

    जस्टिस संजय करोल और जस्टिस ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह की पीठ ने स्पष्ट किया है कि यदि किसी कर्मचारी को अपने कैडर के भीतर कार्यात्मक पदोन्नति (Functional Promotion) मिली है, भले ही उसका ग्रेड पे (Grade Pay) समान ही क्यों न रहा हो, उसे MACPS के तहत वित्तीय उन्नयन की गणना में ही गिना जाएगा.

    सुप्रीम कोर्ट के इस निर्णय से रेलवे को राहत मिली है, जबकि उच्च ग्रेड पे (4600 या 4800 रुपये) की मांग कर रहे रेलवे ट्रेन मैनेजरों को कोर्ट से झटका लगा है. रेलवे की ओर से इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने CAT और राजस्थान हाईकोर्ट के निर्णय को चुनौती दी गयी थी, जिसे कोर्ट ने निरस्त कर दिया है.

    क्या है मामला

    • मामले की शुरुआत: मुख्य याचिकाकर्ता (हरबंस लाल वर्मा) वर्ष 1976 में पश्चिम मध्य रेलवे (कोटा मंडल) में ‘गुड्स गार्ड’ (Goods Guard) के पद पर भर्ती हुए थे.
    • पदोन्नति का सफर: सेवा काल के दौरान उन्हें पहले पैसेंजर गार्ड (Passenger Guard) और बाद में मेल/एक्सप्रेस गार्ड (Mail/Express Guard) के पद पर पदोन्नत किया गया. उन्होंने मार्च 2009 में 32 वर्षों से अधिक की सेवा पूरी कर सेवानिवृत्ति ली.
    • छठे वेतन आयोग (6th CPC) का असर: छठे वेतन आयोग के लागू होने के बाद रेलवे गार्ड कैडर के वेतनमान का पुनरीक्षण किया गया. इसके तहत गुड्स गार्ड को PB-1 (ग्रेड पे ₹2800) में रखा गया, जबकि उससे उच्च पदों (पैसेंजर गार्ड, सीनियर पैसेंजर गार्ड, मेल/एक्सप्रेस गार्ड) का विलय कर उन्हें PB-2 में एक समान ग्रेड पे ₹4200 प्रदान किया गया.
    • विवाद की वजह: रेलवे बोर्ड द्वारा MACPS लागू किए जाने पर कोटा मंडल ने शुरुआत में संबंधित कर्मचारियों को द्वितीय और तृतीय MACP वित्तीय उन्नयन देते हुए ग्रेड पे ₹4600 और ₹4800 तय कर दिया. लेकिन बाद में रेलवे ने यह कहते हुए इसे वापस ले लिया कि कर्मचारी को पहले ही कैडर के तहत पदोन्नतियां मिल चुकी हैं और मेल/एक्सप्रेस गार्ड का पद इस कैडर का सर्वोच्च (Terminal) पद है, जिससे अधिक ग्रेड पे कैडर सीमा (Cadre Ceiling) के बाहर है.
    • ट्रिब्यूनल और हाईकोर्ट का रुख: कर्मचारियों ने केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण (CAT) और राजस्थान हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया, जहां से उनके पक्ष में फैसला आया. इसके खिलाफ केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में अपील दायर की.

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    सुप्रीम कोर्ट के फैसले के मुख्य बिंदु

    • समान ग्रेड पे पर भी पदोन्नति की गणना: अदालत ने माना कि यदि किसी कर्मचारी ने कैडर के पदानुक्रम में उन्नति की है, तो ग्रेड पे न बदलने मात्र से वह पदोन्नति अमान्य नहीं हो जाती. इसे MACP के लाभों के लिए एक पदोन्नति ही माना जाएगा.
    • तीन वित्तीय उन्नयन की सीमा: जो कर्मचारी गुड्स गार्ड से बढ़ते हुए मेल/एक्सप्रेस गार्ड के अंतिम पद तक पहुंचे हैं, वे MACPS के तहत मिलने वाले सभी तीन वित्तीय उन्नयन के अवसरों का उपभोग कर चुके हैं.
    • कैडर सीमा (Cadre Ceiling) का नियम: कर्मचारी कैडर में उपलब्ध अधिकतम ग्रेड पे (₹4200) से आगे ₹4600 या ₹4800 के ग्रेड पे का दावा नहीं कर सकते, क्योंकि MACP का उद्देश्य पदोन्नति के अभाव में वित्तीय ठहराव को दूर करना है, न कि कैडर की निर्धारित सीमा से अधिक पदोन्नति देना.
    • निचली अदालतों का आदेश रद्द: सुप्रीम कोर्ट ने राजस्थान हाईकोर्ट और कैट (CAT) के उन आदेशों को रद्द कर दिया जिनमें गार्ड्स को ₹4600/₹4800 का ग्रेड पे देने का निर्देश दिया गया था.
    • रिकवरी से दी राहत (No Monetary Recovery): अदालत ने कर्मचारियों के हित में मानवीय रुख अपनाते हुए स्पष्ट किया कि जिन कर्मचारियों को पहले ही अंतिम व लागू आदेशों के तहत लाभ का भुगतान किया जा चुका है, उनसे किसी भी तरह की राशि की वसूली (Recovery) नहीं की जाएगी.

    सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले ने MACPS के सिद्धांतों और कैडर सीमाओं के बीच के संबंध को स्पष्ट कर दिया है. इससे रेलवे प्रशासन को विभिन्न मंडलों में लंबित विवादों को सुलझाने में मदद मिलेगी और यह तय हो गया है कि पदोन्नति की गिनती केवल ग्रेड पे के बदलाव से नहीं, बल्कि पद और जिम्मेदारी में आई प्रगति के आधार पर की जाएगी.

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