Chandauli. रेलवे में श्रमिक सुरक्षा के दावों के बीच डीडीयू रेल मंडल में शनिवार को हुआ हादसा कई सवालों को जन्म दे रहा है. टीआरएस शेड (TRS Shed) में काम के दौरान भारी-भरकम क्रेन पुली टूटकर गिरने और उसकी चपेट में आने से 52 वर्षीय रेलकर्मी टेक्नीशियन-1 प्रमोद कुमार यादव गंभीर रूप से घायल हो गए, जिनकी इलाज के दौरान मौत हो गयी. इस घटना ने कार्यस्थलों पर रेलकर्मियों की बुनियादी सुरक्षा और तकनीकी देखरेख पर बड़ा सवालिया निशान खड़ा कर दिया है.
जर्जर उपकरण और विभागीय लापरवाही, कर्मचारियों का फूटा गुस्सा
इस दुखद हादसे की खबर जैसे ही टीआरएस शेड और आसपास के रेलकर्मियों को मिली, पूरे परिसर में हड़कंप मच गया. मृतक प्रमोद यादव (निवासी: जनसो की मड़ई) के साथी कर्मचारी आक्रोशित हो उठे और उन्होंने कार्यस्थल पर ही धरना-प्रदर्शन शुरू कर दिया. प्रदर्शनकारी कर्मचारियों ने विभागीय प्रबंधन पर बेहद गंभीर आरोप लगाए हैं:
क्या है रेलकर्मियों के आरोप
जर्जर मशीनरी का इस्तेमाल: कर्मचारियों का सीधा आरोप है कि लोको शेड में उपयोग किए जा रहे क्रेन और अन्य भारी उपकरण लंबे समय से जर्जर हो चुके हैं.
रखरखाव में अनदेखी: बार-बार शिकायत किए जाने के बावजूद इन तकनीकी कमियों को समय रहते दुरुस्त नहीं किया गया और न ही पुराने उपकरणों को बदला गया.
जान जोखिम में डाल रहे : कर्मचारियों ने साफ तौर पर कहा कि सुरक्षा मानकों की इस घोर अनदेखी के कारण हर दिन सैकड़ों रेलकर्मी अपनी जान जोखिम में डालकर काम करने को मजबूर हैं.
रेलवे प्रशासन की कार्रवाई: त्वरित सहायता और उच्च स्तरीय जांच के आदेश
मामले की गंभीरता और रेलकर्मियों के बढ़ते आक्रोश को देखते हुए रेलवे के आला अधिकारी तुरंत मौके पर पहुंचे और स्थिति को नियंत्रित किया.
ईस्ट सेंट्रल रेलवे इम्पलॉईज यूनियन (ECREU) रहा मुखर
ईस्ट सेंट्रल रेलवे इम्पलॉईज यूनियन (ECREU) ने रविवार को मंडल रेल प्रबंधक के प्रतिनिधि वरिष्ठ कार्मिक अधिकारी को ज्ञापन सौंपा. यूनियन ने घटना की उच्चस्तरीय एवं निष्पक्ष जांच और दोषियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की मांग की है.

यूनियन के केंद्रीय संगठन सचिव एस.के. शर्मा ने इस दुर्घटना को गंभीर बताया. उन्होंने कहा कि यह घटना रेलवे की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े करती है. शर्मा ने स्पष्ट किया कि कर्मचारी की मृत्यु के मामले में किसी भी प्रकार की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी.
रेलवे प्रशासन ने राहत का लगाया मरहम
घटना से उजपे आक्रोश के बीच रेल प्रशासन ने फौरन ऐसी पहल शुरू करदी जिससे रेलकर्मियों के आक्रोश को संभाला जा सके. इसके लिए DRM उदय सिंह मीना की पहल पर मृतक के परिजनों को अंत्येष्टि के लिए तात्कालिक आर्थिक सहायता राशि दी गयी.
सेवा-लाभों में तेजी: कार्मिक विभाग ने मृतक कर्मचारी के डीसीआरजी (DCRG), अवकाश नगदीकरण, समूह बीमा (GIS), स्टाफ बेनिफिट फंड (SBF) और पारिवारिक पेंशन समेत सभी देय सेवा-परिलाभों की प्रक्रिया को युद्धस्तर पर शुरू कर दिया है. प्रशासन ने इन औपचारिकताओं को एक सप्ताह के भीतर पूर्ण करने का भरोसा दिया है.
अनुकंपा नियुक्ति की प्रक्रिया: दिवंगत प्रमोद यादव के आश्रित को रेलवे की योजना के तहत प्राथमिकता के आधार पर शीघ्र अनुकंपा नियुक्ति देने की कार्रवाई भी शुरू कर दी गई है.
उच्च स्तरीय तकनीकी जांच का आश्वासन : हादसे के मूल कारणों का पता लगाने और जिम्मेदारी तय करने के लिए डीआरएम द्वारा एक उच्च स्तरीय तकनीकी जांच समिति का गठन किया गया है, जो इस पूरी चूक की गहन पड़ताल करेगी.
संपादकीय टिप्पणी
कब सुरक्षित होंगे हमारे ‘कर्मवीर’?
यह हादसा महज़ एक संयोग नहीं, बल्कि औद्योगिक सुरक्षा नियमों के प्रति बरती जा रही उस शिथिलता का परिणाम है, जिसकी कीमत एक श्रमिक को अपनी जान देकर चुकानी पड़ी. यह कोई पहली घटना नहीं है. रेलवे जैसे विशाल तंत्र में जहां 24 घंटे भारी मशीनरी के बीच काम होता है, वहां जर्जर उपकरणों का संचालन होना प्रशासनिक जवाबदेही पर बड़ा सवाल है. उम्मीद है कि डीआरएम द्वारा गठित उच्च स्तरीय तकनीकी समिति इस लापरवाही की तह तक जाएगी और दोषियों पर सख्त कार्रवाई सुनिश्चित करेगी, ताकि भविष्य में किसी और प्रमोद यादव को अपनी जान न गंवानी पड़े.
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