- यात्रियों की जान से खिलवाड़ करने वाले लीजधारी को ओवरलोडिंग के लिए 78,000 जुर्माना लगाकर राहत देने की तैयारी
- सालों से चल रहे ओवरलोडिंग के खेल को रोकने के लिए अधिकारिक स्तर पर नहीं तय हुई जिम्मेदारी, नहीं हुई जांच
- मीडिया स्टिंग से पकड़ाये ओवरलोडिंग को अपनी उपलब्धि बताने में जुटे हैं टाटानगर के सीपीएस और रेल अधिकारी
- जानकारों का दावा – रेल प्रशासन या विजिलेंस टाटानगर स्टेशन का सीसीटीवी फुटेज जांच ले तो बड़ा घोटाला सामने आयेगा
TATANAGAR. चक्रधरपुर रेल मंडल के टाटानगर स्टेशन पर अहमदाबाद एक्सप्रेस के पार्सल वैन में क्षमता से 50 फीसदी अधिक माल लादे (ओवरलोडिंग) जाने की पुष्टि हुई है. रेल प्रशासन इस चूक के लिए लीजधारी को 78,000 रुपये का जुर्माना लगाकर राहत देने की तैयारी में है. पार्सल ओवरलोडिंग का सच सामने आने के बाद से DRM तरुण हुरिया और Sr. DCM आदित्य चौधरी के मौन ने रेल सुरक्षा को कटघरे में खड़ा कर दिया है. सवाल यह उठाया जा रहा कि क्या चक्रधरपुर मंडल रेल प्रशासन किसी बड़े हादसे के इंतजार में है?
दरअसल, 130 से 170 किमी/घंटे की रफ्तार वाली हाई-स्पीड ट्रेनों में ओवरलोडिंग के इस खेल में न तो अब तक किसी की जवाबदेही तय हुई है और न ही स्टेशनों पर निगरानी की पुख्ता व्यवस्था अथवा जांच के ही निर्देश जारी किये गये है. टाटानगर में ओवरलोडिंग पकड़े जाने के बाद अधिकारियों ने मामले को अहमदाबाद और हावड़ा स्टेशनों के हवाले करके अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ लिया है. डिवीजन के जिम्मेदार अधिकारियों के इस मौन को नियमों की धज्जियां उड़ाने वाले पार्सल सिंडिकेट गिरोह को परोक्ष रूप से संरक्षण देने के रूप में ही देखा जा रहा है.
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दिलचस्प बात यह है कि सालों से चल रही इस खुली लूट और लापरवाही पर जब मीडिया की ‘थर्ड आई’ ने सच सामने ला दिया, तो टाटानगर के सीपीएस (CPS) से लेकर डिवीजन के अधिकारी अब गंभीर चूक पर पर्दा डालने के लिए इस मजबूरी की कार्रवाई और ओवरलोडिंग की जांच को अपनी ‘पीठ थपथपाने’ वाली महान उपलब्धि के रूप में पेश करने की बेशर्म कोशिशों में जुटे हैं.
टाटानगर के सीपीएस अमित चौधरी ने तो यहां तक कह दिया कि अगर वह वजन नहीं करते तो क्या मीडिया के स्टिंग से ओवरलोडिंग साबित हो जाती! टाटानगर सीपीएस अमित चौधरी, सीनियर डीसीएम आदित्य चौधरी के खासमखास माने जाते है और उनकी टाटानगर में पिछले दरवाजे से पोस्टिंग भी सुर्खियों में रही थी. रेलकर्मियों का कहना है कि यही कारण है कि इस मामले में अब तक सीनियर डीसीएम के स्तर से कोई जांच कमेटी नहीं बनायी जा रही है !
पार्सल लीज माफिया ने टाटानगर को बना रखा है टर्मिनेटिंग स्टेशन, राजधानी, आजाद-हिंद और नीलांचल में ओवरलोडिंग का खेल
टाटानगर स्टेशन बीते सालों से पार्सल लीज माफिया और भ्रष्ट रेल अधिकारियों के गठजोड़ का बड़ा अड्डा बन चुका है. सूत्रों की माने तो पार्सल लीज माफिया ने सोची-समझी रणनीति के तहत टाटानगर को अपना ‘टर्मिनेटिंग स्टेशन’ (माल उतारने-चढ़ाने का मुख्य केंद्र) बनाया है. इसमें बड़ी भूमिका सीपीएस की होती है.
टाटानगर में भुवनेश्वर राजधानी, पुणे आजाद हिंद और नीलांचल में भी लीज ओवरलोडिंग की खेल बेखौफ जारी है. यहां ओवरलोड माल टाटानगर में उतारकर दूसरी ट्रेनों में बुक कर भेज दिया जाता है. सूत्रों का यहां तक कहना है कि अगर रेल प्रशासन या विजिलेंस विभाग स्टेशन के सीसीटीवी फुटेज की जांच कर ले तो बड़ा घोटाला सामने आ जायेगा.
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टाटानगर की घटना में अहमदाबाद से लोडिंग और हावड़ा काे डिस्टीनेशन बताकर चक्रधरपुर रेल प्रशासन अपनी जिम्मेदारियों को लेकर आंखों पर पट्टी बांधने की कोशिश कर रहा है. जब लंबी दूरी की ट्रेनों में पार्सल लीज माफिया टाटानगर को ही ‘टर्मिनेटिंग स्टेशन‘ की तरह इस्तेमाल कर रहे हैं. स्थानीय अधिकारियों की मौन सहमति के बिना टाटानगर स्टेशन पर ओवरलोड माल उतारकर दूसरी ट्रेनों में भेजने का सुरक्षित खेल नामुमकीन है.
130 की रफ्तार और सुरक्षा भगवान भरोसे !
रेलवे के तकनीकी जानकारों के अनुसार टाटानगर से गुजरने वाली कई हाई-स्पीड ट्रेनें 130 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से दौड़ती हैं. जब किसी पार्सल वैन (VPH) की क्षमता सिर्फ 4 टन की हो और उसमें 6 टन यानी 50 फीसदी से भी ज्यादा माल लाद दिया जाए, तो यह सीधे तौर पर एक ‘चलता-फिरता टाइम बम’ बन जाती है. ऐसे में अगर एक्सल और सस्पेंशन अतिरिक्त भार से टूटे तो बड़ा हादसा तय है. यही नहीं पहियों और बेयरिंग पर क्षमता से अधिक दबाव के कारण हॉट एक्सल से आग लगने का खतरा भी होता है.
रेलवे पार्सल की ओवरलोडिंग पर रेलहंट की नजर बनी रहेगी … क्रमश :
रेलहंट का प्रयास है कि सच रेल प्रशासन के सामने आये. ऐसे में किसी को अपना पक्ष रखना है तो whatsapp 9905460502 पर भेज सकते है, पूरे सम्मान के साथ उसका संज्ञान लिया जायेगा.
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