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    Home » TATANAGAR : 4 टन की पार्सल बोगी में 6 टन लोडिंग की पुष्टि, पार्सल घोटाले पर क्यों मौन हैं CKP DRM!
    रेलहंट स्पेशल

    TATANAGAR : 4 टन की पार्सल बोगी में 6 टन लोडिंग की पुष्टि, पार्सल घोटाले पर क्यों मौन हैं CKP DRM!

    Railhunt News DeskBy Railhunt News DeskJune 18, 2026
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    सीनियर डीसीएम आदित्य चौधरी और डीआरएम तरुण हुरिया (फाइल फोटो)
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    • यात्रियों की जान से खिलवाड़ करने वाले लीजधारी को ओवरलोडिंग के लिए 78,000 जुर्माना लगाकर राहत देने की तैयारी
    • सालों से चल रहे ओवरलोडिंग के खेल को रोकने के लिए अधिकारिक स्तर पर नहीं तय हुई जिम्मेदारी, नहीं हुई जांच 
    • मीडिया स्टिंग से पकड़ाये ओवरलोडिंग को अपनी उपलब्धि बताने में जुटे हैं टाटानगर के सीपीएस और रेल अधिकारी 
    • जानकारों का दावा – रेल प्रशासन या विजिलेंस टाटानगर स्टेशन का सीसीटीवी फुटेज जांच ले तो बड़ा घोटाला सामने आयेगा 

    TATANAGAR. चक्रधरपुर रेल मंडल के टाटानगर स्टेशन पर अहमदाबाद एक्सप्रेस के पार्सल वैन में क्षमता से 50 फीसदी अधिक माल लादे (ओवरलोडिंग) जाने की पुष्टि होने का दावा किया जा रहा है. जानकारी के अनुसार रेल प्रशासन इस मामले में नियमानुसार 78,000 रुपये का जुर्माना लीजधारी पर लगाने की तैयारी में है. हालांकि, इस संवेदनशील मामले पर आधिकारिक स्तर से कोई विस्तृत बयान न आने के कारण कई गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं. हाई-स्पीड ट्रेनों में ओवरलोडिंग के इस खेल को लेकर यात्रियों की सुरक्षा और स्थानीय निगरानी तंत्र पर सवाल उठ रहे हैं कि क्या अधिकारिक स्तर पर जिम्मेदारी तय करने में ढील दी जा रही है? क्या चक्रधरपुर मंडल रेल प्रशासन किसी बड़े हादसे के इंतजार में है?

    दरअसल, 130 से 170 किमी/घंटे की रफ्तार वाली ट्रेनों में ओवरलोडिंग के इस खेल में न तो अब तक किसी की जवाबदेही तय होने की सूचना है और न ही स्टेशनों पर निगरानी की पुख्ता व्यवस्था दिख रही है. टाटानगर में ओवरलोडिंग पकड़े जाने के बाद स्थानीय स्तर पर सख्त कार्रवाई के बजाय मामले को अहमदाबाद और हावड़ा स्टेशनों के पाले में डाल दिए जाने से अधिकारियों की कार्यशैली पर सवाल उठ रहे हैं. डिवीजन के जिम्मेदार अधिकारियों का यह मौन पार्सल सिंडिकेट को परोक्ष रूप से शह मिलने जैसी गंभीर आशंकाओं को जन्म देता है.

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    दिलचस्प बात यह है कि सालों से चल रही इस कथित लापरवाही पर जब मीडिया ने सच सामने ला दिया, तो टाटानगर के सीपीएस (CPS) से लेकर डिवीजन के अधिकारी अब इस मजबूरी की कार्रवाई और ओवरलोडिंग की जांच को अपनी बड़ी उपलब्धि के रूप में पेश करने की कोशिशों में जुटे हैं.

    टाटानगर के सीपीएस अमित चौधरी का कथित तौर पर कहना है कि अगर वह वजन नहीं करते तो क्या केवल मीडिया के दावे से ओवरलोडिंग साबित हो जाती? रेलवे गलियारों में चर्चा है कि सीपीएस अमित चौधरी और सीनियर डीसीएम आदित्य चौधरी के बीच बेहतर कामकाजी समीकरण रहे हैं, और उनकी टाटानगर में तैनाती को लेकर भी पूर्व में कई तरह की चर्चाएं सुर्खियों में रही थीं.  यही कारण है कि रेलकर्मियों के एक वर्ग द्वारा यह आशंका जताई जा रही है कि इसी विभागीय नजदीकी के चलते अब तक इस गंभीर मामले में सीनियर डीसीएम के स्तर से किसी उच्च स्तरीय जांच कमेटी का गठन नहीं हो सका है. हालांकि इस मामले में सीनियर डीसीएम का पक्ष जानने का प्रयास किया गया, लेकिन उनकी प्रतिक्रिया नहीं मिल सकी है. उनका पक्ष आते ही उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा.

    पार्सल लीज माफिया ने टाटानगर को बना रखा है टर्मिनेटिंग स्टेशन, राजधानी, आजाद-हिंद और नीलांचल में ओवरलोडिंग का खेल 

    पार्सल लीज सिंडिकेट से जुड़े सूत्रों की मानें तो, टाटानगर स्टेशन बीते कुछ समय से पार्सल ओवरलोडिंग और नियमों की अनदेखी करने वालों के एक बड़े केंद्र के रूप में उभर रहा है. सूत्रों का दावा है कि एक सोची-समझी रणनीति के तहत टाटानगर को ‘टर्मिनेटिंग स्टेशन’ (माल उतारने-चढ़ाने का मुख्य केंद्र) की तरह इस्तेमाल किया जा रहा है, और इस पूरे खेल में पार्सल कार्यालय के स्थानीय प्रबंधन की भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं.

    आरोप है कि टाटानगर में भुवनेश्वर राजधानी, पुणे आजाद हिंद और नीलांचल एक्सप्रेस जैसी महत्वपूर्ण ट्रेनों में भी लीज ओवरलोडिंग का खेल चल रहा है. सूत्रों के अनुसार, यहां कथित रूप से क्षमता से अधिक माल उतारकर उसे दूसरी ट्रेनों में बुक करके आगे भेज दिया जाता है. जानकारों का तो यहां तक कहना है कि अगर रेल प्रशासन या विजिलेंस विभाग निष्पक्षता से स्टेशन के सीसीटीवी फुटेज और वजन के रिकॉर्ड की गहन जांच कर ले, तो इस पूरे मामले में बड़ी अनियमितताएं सामने आ सकती हैं.

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    टाटानगर की इस घटना में लोडिंग अहमदाबाद से होने और डेस्टिनेशन हावड़ा होने का हवाला देकर चक्रधरपुर रेल प्रशासन कथित तौर पर अपनी प्राथमिक जिम्मेदारियों से बचता नजर आ रहा है.

    तकनीकी जानकारों और सूत्रों का कहना है कि जब लंबी दूरी की ट्रेनों में पार्सल लीज सिंडिकेट टाटानगर को ही एक तरह से ‘टर्मिनेटिंग स्टेशन’ की तरह इस्तेमाल कर रहे हैं, तो स्थानीय स्तर पर बिना किसी बड़ी प्रशासनिक अनदेखी या ढिलाई के टाटानगर स्टेशन पर ओवरलोड माल उतारकर दूसरी ट्रेनों में भेजने का यह खेल लंबे समय तक चलना संभव नहीं दिखता. यही कारण है कि स्थानीय निगरानी तंत्र की भूमिका पर भी अब गंभीर सवाल उठने लगे हैं.

    130 की रफ्तार और सुरक्षा भगवान भरोसे !

    रेलवे के तकनीकी जानकारों के अनुसार टाटानगर से गुजरने वाली कई हाई-स्पीड ट्रेनें 130 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से दौड़ती हैं. जब किसी पार्सल वैन (VPH) की क्षमता सिर्फ 4 टन की हो और उसमें 6 टन यानी 50 फीसदी से भी ज्यादा माल लाद दिया जाए, तो यह सीधे तौर पर एक ‘चलता-फिरता टाइम बम’ बन जाती है. ऐसे में अगर एक्सल और सस्पेंशन अतिरिक्त भार से टूटे तो बड़ा हादसा तय है. यही नहीं पहियों और बेयरिंग पर क्षमता से अधिक दबाव के कारण हॉट एक्सल से आग लगने का खतरा भी होता है.

    रेलवे पार्सल की ओवरलोडिंग पर रेलहंट की नजर बनी रहेगी … क्रमश : 

    रेलहंट का प्रयास है कि सच रेल प्रशासन के सामने आये. ऐसे में किसी को अपना पक्ष रखना है तो whatsapp 9905460502 पर भेज सकते है, पूरे सम्मान के साथ उसका संज्ञान लिया जायेगा.

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