PATNA. पूर्व मध्य रेलवे का निर्माण संगठन जनवरी 2026 में महेन्द्रूघाट (पटना) स्थित कार्यालय में सीबीआई की छापेमारी के बाद सुर्खियों में आया था. सीबीआई महेन्द्रूघाट कार्यालय के अलावा डेहरी-ऑन-सोन में कई स्थानों पर छापे मारकर निर्माण परियोजनाओं में ठेके, बिल पास करने और तकनीकी मंजूरियों के बदले बड़े पैमाने पर घूसखोरी वाले सिंडिकेट का खुलासा किया. इस छापेमारी में लगभग ₹45 लाख नकद के अलावा महत्वपूर्ण दस्तावेज और डिजिटल साक्ष्य जब्त करने के अलावा 4 लोगों को पकड़ा भी गया था.
इसके ठीक बाद जीएम ने लेखा विभाग (Accounts Department) में वर्षों से एक स्थान पर जमे लेखा कर्मियों का तबादला भी किया. तब ऐसा प्रतीत हो रहा था कि “रोटेशन ट्रांसफर” और “पारदर्शिता” को हर स्तर पर अम्लीजामा पहनाया जायेगा लेकिन ऐसा हुूआ कुछ नहीं. अब यह विभाग एक बार फिर से एक अधिकारी की निर्माण संगठन में पदस्थापना को लेकर चर्चा में आया है. यह अधिकारी हैं लेखा विभाग के चर्चित वरीय अधिकारी एमएम हसन. इनकी पोस्टिंग निर्माण संगठन में की गयी है. इन्हें FA&CAO/CON बनाया गया है.

हालांकि इस तबादले में विजय तुकाराम, संकल्प नारायण को भी इधर से उधर किया गया है. इस तबादलों में तेज तर्रार माने जाने वाले अधिकारी एमएम हसन को FA&CAO/CON के अलावा पटना वर्कशॉप प्रोजेक्ट और GELF की अतिरिक्त जिम्मेदारी भी सौंपी गयी है. एमएम हसन पूर्व मध्य रेलवे हाजीपुर मुख्यालय में FA &CAO/F&G के पद पर थे जिन्हें अब निर्माण संगठन में FS&CAO/Con/MHX की जिम्मेदारी सौंपी गयी है. अब बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि इस अहम पद पर एमएम हसन की पोस्टिंग को लेकर चर्चा क्यों तेज है? इसमें साल 2017 से जुड़ा एक मामला सुर्खियां बन रहा है जब हसन दानापुर मंडल में वरीय मंडल वित्त प्रबंधक थे.
सीनियर डीएफएम रहने के दौरान एमएम हसन दानापुर मंडल क्रीड़ा संध के सचिव भी थे. तब जगजीवन स्टेडियम की व्यवस्था को निजी हाथों में सौंपा गया था. इस प्रक्रिया में हसन के कुछ निर्णयों पर सवाल उठाये गये थे और उसे वित्तीय अनियमितता तक करार दिया गया था लेकिन यह मामला सुर्खियों में नहीं आया और तत्कालीन डीआरएम की जानकारी के बावजूद दब गया. कहा जाता है कि स्टेडियम के टेंडर में Earnest money की राशि डिवीजनल स्पोर्ट्स ऐसाेसिएशन के नाम से जमा करा ली गयी थी जबकि इसी निविदा में Performance guarantee का भुगतान FA&CAO/ECR/HJP के नाम से लिया गया था.
क्रीड़ा संघ के सचिव की इस व्यवस्था पर लेखा विभाग के कनीय अधिकारियों ने सवाल भी उठाया था. हालांकि कुछ लोगों ने इस नियम सम्मत भी करार दिया था और यह मामला शांत हो गया. हालांकि सीनियर डीएफएम रहने के दौरान आवास के अनाधिकृत इस्तेमाल को लेकर भी हसन सवालों के घेरे में आये थे. चर्चा तो यहां तक है कि दानापुर से तबादले के बाद भी इन्होंने बंगला खाली नहीं किया और इस मद में डेमरेज रेंट अब तक बकाया है ! खैर अब भ्रष्टाचार और अनियमितताओं के लिए चर्चित रहे ECR के निर्माण संगठन में बतौर FA&CAO/CON एमएम हसन को बड़ी जिम्मेदारी मिली है. यह देखने वाली बात यह होगी कि सीबीआई की लगातार धमक के बीच निर्माण संगठन के घालमेल में हसन किस तरह अपनी जिम्मेदारियों का निवर्हन करते है. नयी पोस्टिंग के लिए हसन को शुभकामनाएं …!!!
रेलहंट का प्रयास है कि सच रेल प्रशासन के सामने आये. ऐसे में किसी को अपना पक्ष रखना है तो whatsapp 9905460502 पर भेज सकते है, पूरे सम्मान के साथ उसका संज्ञान लिया जायेगा.


















































































