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चक्रधरपुर में ट्रेनों की लेट-लतीफी पर डीआरएम का घेराव, उधर…टाटा में विधायक सरयू को सफाई देने पहुंचे रेलवे एरिया मैनेजर

  • डीआरएम को लोगों ने सुनाई खरी-खरी, मौके पर नहीं नजर आये नये सीनियर डीओएम मनीष पाठक        
  • झामुमो नेता ने रेल चक्का जाम करने की दी चेतावनी, कहा – जनहित में जनता के लिए आंदोलन होगा    

CHAKRADHARPUR/TATA. ट्रेनों के विलंब को लेकर बार-बार तकनीकी कारणों का हवाला देने वाले चक्रधरपुर डीआरएम तरुण हुरिया सोमवार को जनता की दरबार में बुरी तरह घिरे नजर आये. ट्रेनों की लेटलतीफी पर डीआरएम तरुण हुरिया को कार्यालय से बाहर बुलाकर लोगों ने जमकर खरी-खोटी सुनाई. लोगों के सवालों के आगे डीआरएम हुरिया निरुत्तर नजर आये. लोगों ने एक हफ्ते का वक्त डीआरएम को दिया और चेताया कि अगर इस दौरान ट्रेनों की लेटलतीफी ठीक नहीं हुई तो रेल चक्का जाम होना तय है.

डीआरएम के घेराव और प्रदर्शन के बीच टाटानगर में एक अहम घटनाक्रम के बीच रेलवे एरिया मैनेजर विधायक सरयू राय को स्पष्टीकरण देने उनके कार्यालय पहुंचे. यहां कुल 13 ट्रेनों की सूची भी विधायक को सौंपी गयी, इसमें टाटानगर से समय पर खुलने और कुछ के समय पर पहुंचने का विवरण शामिल है. विधायक को यह भी बताया गया कि हाल के दिनों में मालगाड़ियों के परिचालन में दो प्रतिशत की कमी की गयी है. इस तरह यात्री ट्रेनों को प्राथमिकता देकर परिचालन समय सुधारने का प्रयास किया जा रहा. मालूम हो टाटानगर में विधायक सरयू के धरना-प्रदर्शन के बाद से ही रेल प्रशासन दबाव में है.

वहीं, सोमवार को चक्रधरपुर में डीआरएम के घेराव में लोगों का आक्रोश सिर चढ़कर बोल रहा था. लोगों ने ऐसे-ऐसे सवाल दागे कि डीआरएम तरुण हुरिया के साथ तारणहार के रूप में खड़े सीनियर डीसीएम की बोलती ही बंद हो गयी. दिलचस्प बात यह रही कि डिवीजन में परिचालन संभालने वाले नये सीनियर डीओएम मनीष पाठक मौके पर नजर नहीं आये. लोगों का आक्रोश ऐसा था कि वह कुछ भी सुनने-समझने को तैयार नहीं थे. ट्रेनों के विलंब को लेकर आन्दोलन का नेतृत्व कर रहे झामुमो केन्द्रीय सदस्य रामलाल मुंडा ने सीधी चेतावनी दे डाली कि एक हफ्ते में ट्रेनों की लेटलतीफी अगर ठीक नहीं हुई तो वे रेल चक्का जाम कर देंगे. जनहित में जनता के लिए आंदोलन करना उनका लक्ष्य है, ऐसे में केस मुकदमों का कोई डर नहीं.

आपके लिए स्पेशल ट्रेन है…कभी आम यात्री के साथ ट्रेन में चले, दुख-दर्द का पता चल जायेगा

डीआरएम से लेागों ने सवाल किया कि वह बताये टाटा से चक्रधरपुर पहुंचने में एक मेमू और एक्सप्रेस ट्रेन को क्या समय लगना चाहिए. हकीकत में रेल मंडल में ट्रेनों की रफ़्तार कितनी धीमी है, क्या उन्होंने इसका आंकलन किया है. आप के लिए स्पेशल ट्रेन होती है, कभी आम गरीब आदमी के साथ उनकी ट्रेन में बैठकर चला कीजिये, आपको सारा दुख दर्द पता चल जायेगा. आम जनता के सवालों के आगे डीआरएम मौन थे तो सीनियर डीसीएम बेबश नजर आये. अंत में डीआरएम को लोगों ने एक मांग पत्र सौंपकर ट्रेनों की लेटलतीफी को ठीक करने का अल्टीमेटम दिया.

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डीआरएम ने फिर अलापा पुराना राग, तकनीकी परेशानी का रोया रोना 

प्रदर्शन के बाद डीआरएम ने मीडिया से रूबरू होते हुए कहा कि ट्रेनों को समय पर चलाने का हर संभव प्रयास किया जा रहा है. बहुत जल्द यात्री ट्रेनों के परिचालन में सुधार होगा. हालांकि जब उन्होंने यात्री ट्रेनों के विलंब के कारणों पर पुराना राग भी अलापा. लेकिन इसका असर प्रदर्शन कर रहे लोगों पर नहीं पड़ा. उन्होंने डीआरएम पर गुस्सा जाहिर करते हुए एक हफ्ते का अल्टीमेटम दे दिया है.

यह संघर्ष रेलवे के खिलाफ नहीं, यात्री ट्रेनों की लेटलतीफी खत्म करने के लिए है : सरयू 

टाटानगर में रेलवे एरिया मैनेजर के स्पष्टीकरण के बाद विधायक सरयू राय ने मीडिया से कहा कि उन्हें एक चार्ट सौंपा गया है. इसमें 13 यात्री ट्रेनों के टाटानगर से समय पर खुलने और कुछ के समय पर पहुंचने का विवरण शामिल है. इसमें साउथ बिहार एक्सप्रेस, टाटा-थावे और स्टील एक्सप्रेस जैसी ट्रेनों का उल्लेख है. यात्री ट्रेनों को प्राथमिकता देकर समयबद्ध संचालन सुनिश्चित करने का आश्वासन भी रेलवे ने दिया है.

सरयू राय ने स्पष्ट कहा कि आंकड़ों से ज्यादा महत्वपूर्ण यात्रियों की सुविधा है. आम लोगों की अपेक्षा सिर्फ इतनी है कि ट्रेनें समय पर आएं और जाएं. उन्होंने दोहराया कि उनका संघर्ष रेल प्रशासन के खिलाफ नहीं, बल्कि यात्री ट्रेनों की लेटलतीफी खत्म करने के लिए है.

उन्होंने सोशल मीडिया पर सामने आ रहे देरी के मामलों का जिक्र करते हुए रेल प्रशासन से पारदर्शिता बरतने और प्रतिदिन ट्रेनों के संचालन की रिपोर्ट जारी करने की मांग की. साथ ही चेतावनी दी कि यदि स्थिति में सुधार नहीं हुआ तो आंदोलन के अगले चरण की घोषणा की जाएगी.

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