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आरपीएफ-जीआरपी

रेलहंट की रिपोर्ट पर लगी मुहर… राउरकेला रेलवे पार्सल से लाखों का गांजा जब्त, निशाने पर CPS और IPF

  • जीआरपी ने आरपीएफ का बिगाड़ा खेल, रेलवे पार्सल कर्मियों की मिलीभगत से सालों से चल रहा अवैध धंधा
  • रेलहंट में कई बार गांजा तस्करी को लेकर आरपीएफ और कॉमर्शियल के अधिकारियों को किया था आगाह  

ROURKELA. चक्रधरपुर रेलमंडल के राउरकेला रेलवे स्टेशन पर आरपीएफ की निगहबानी और पार्सल कर्मियों की मिलीभगत से सालों से चल रहे गांजा तस्तकरी के एक बड़े खेल का पर्दाफाश जीआरपी की टीम ने कर दिया है. इस कारवाई में जीआरपी ने लगभग 120 किलो गांजा पकड़ा है जिसकी कीमत 35 लाख रुपये से अधिक बतायी जा रही है. रेलहंट ने लगातार इस बारे में रेलवे के उच्चाधिकारियों और आरपीएफ के जिम्मेदार लोगों को आगाह करता रहा कि गांजा तस्करी का यह खेल राउरकेला और झारसुगुड़ा रेलवे स्टेशन पर आरपीएफ अधिकारियों की जानकारी और मिलीभगत से चल रहा है.

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गांजा तस्करी के इस अवैध धंधे में रेलवे पार्सल के कर्मचारियों की मिलीभगत है जो लीज वैन में बिना किसी जांच के चढ़ाया जाता है. कई बार राउरकेला से चढ़ाया गया गांजा आरपीएफ ने ही रांची, बोकारो के अलावा दूसरे स्टेशनों पर जब्त किया  लेकिन राउरकेला और झारसुगुड़ा में आरपीएफ के जिम्मेदार मुंह मोड़कर अवैध कारोबार को शह देते रहे. स्पष्ट है कि बिना आरपीएफ के सहयोग और पार्सल कर्मियों की मिलीभगत के यह संभव नहीं है ? रेलवे पार्सल में बड़ी मात्रा में गांजा बरामदगी के बाद CPS और IPF की भूमिका सवालों के घेरे में है.

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जीआरपी ने गुरुवार की दोपहर पार्सल कार्यालय में छापा मारकर दो बड़े बोरों को जब्त किया. यह माल रेलवे पार्सल की लाज से दिल्ली भेजा जाना था. मजिस्ट्रेट की मौजूदगी में बोरे खोले गए, तो उनमें से कई छोटे पैकेटों में गांजा भरा मिला. लगभग 150 स्कूली बैग में भी गांजा भरा हुआ था. जांच में यह बात सामने आयी कि पार्सल की बुकिंग दिल्ली के लिए की गयी थी जिसे संबलपुर-जम्मूतवी एक्सप्रेस से भेजने की तैयारी थी. इस बीच जीआरपी ने माल जब्त कर सबका खेल बिगाड़ दिया. स्टेशन पार्सल से बड़ी मात्रा में गांजा की बरामदगी से आरपीएफ और रेलवे कॉमर्शियल कर्मियों की पोल तो खुल चुकी है लेकिन अब दोनों विभाग अपना-अपना दाग धोने में जुट गये है.

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चक्रधरपुर सीनियर डीसीएम का बयान हास्यास्पद, गांजा की जगह विस्फोटक होता तो…   

राउरकेला स्टेशन पर गांजा बरामदगी के बाद चक्रधरपुर रेल मंडल के सीनियर डीसीएम आदित्य चौधरी का बयान सामने आया. इसमें उन्होंने मीडिया को बताया है कि यह पार्सल राउरकेला स्टेशन से नहीं, बल्कि संबलपुर मंडल की लीज पर दी गई ठेका कंपनी के माध्यम से बुक किया गया था. उन्होंने ठेका कंपनी को निरस्त करने की अनुशंसा की है.

सीनियर डीसीएम का बयान को रेलवे के लोग ही हस्यास्पद बता रहे. रेलकर्मियों ने ही सवाल किया कि पार्सल लीज किसी कंपनी को किसी डिवीजन से दी गयी है, अगर माल राउरकेला में उतरा गया अथवा राउरकेला से चढ़ाया जाने वाला है तो उतारने के बाद और चढ़ाने से पहले उसकी बुकिंग और मैनुफेस्टो की जांच, वजन आदि की जिम्मेदारी किसकी है? अगर गांजा की जगह बोरों में विस्फोटक होता तो क्या सीनियर डीसीएम का बयान यही होता ?

आरपीएफ के सहायक कमांडेंट ने क्या कहा .. यह भी जाने  

रेलवे स्टेशन पर अवैध धंधों को रोकने की जिम्मेदारी संभालने वाले आरपीएफ के सहायक कमांडेंट अग्निदेव प्रसाद ने मीडिया से बातचीत में कहा कि आरपीएफ की फ्लाइंग स्क्वाड को गांजा तस्करी की सूचना मिली थी, जिसके बाद कार्रवाई कर जब्त खेप को जीआरपी के हवाले किया गया. एएससी का यह बयान दिलचस्प ही नहीं काफी कुछ कह जाता है. अक्सर ऐसे मामलों में आरपीएफ अपनी उपलब्धि को भुनाने से पीछे नहीं हटता और तत्काल पूरा मामला मीडिया के सामने लाया जाता है लेकिन इस बार ऐसा कुछ नहीं हुआ? क्यों … हालांकि रेलवे के दोनों अधिकारियों का जो बयान मीडिया में आया है उसमें विरोधाभास है. वहीं जीआरपी एक को हिरासत में लेकर पूछताछ कर रही है. अब जीआरपी राउरकेला की जांच किसी दिशा में जाती है यह देखने वाली बात होगी …. तब तक…

Railhunt News Desk
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