- सीबीआई ने लालू प्रसाद यादव, राबड़ी देवी और मीसा भारती समेत 16 को बनाया था आरोपी
- अंतिम चार्जशीट में 78 लोग आरोपित, इसमें रेलवे में नौकरी पाने वाले 38 उम्मीदवार भी शामिल
NEW DELHI. दिल्ली के राऊज एवेन्यू कोर्ट ने लैंड फॉर जॉब मामले में केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) की ओर से दर्ज एफआईआर के मामले में आरोप तय करने के मामले पर सुनवाई टाल दिया है. स्पेशल जज विशाल गोगने ने मामले की 15 दिसंबर को सुनवाई करने का आदेश दिया. कोर्ट ने सीबीआई को निर्देश दिया कि वो इस मामले के सभी आरोपितों के संबंध में विस्तृत वेरिफिकेशन रिपोर्ट दाखिल करें. 8 दिसंबर को कोर्ट को बताया गया था कि इस मामले के कुछ आरोपितों की मौत हो चुकी है. उसके बाद कोर्ट ने सीबीआई को आरोपितों की मौत का वेरिफिकेशन कर कोर्ट में स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करें.
इससे पहले कोर्ट आरोपितों के खिलाफ आरोप तय करने पर दो बार फैसला टाल चुका है. 10 नवंबर और 4 दिसंबर को कोर्ट किसी न किसी वजह से फैसला टाल चुका है. कोर्ट ने सीबीआई के मामले में आरोप तय करने पर 25 अगस्त को फैसला सुरक्षित रख लिया था.
लालू यादव ने इस मामले में सीबीआई की ओर से दर्ज एफआईआर को निरस्त करने और ट्रायल कोर्ट में चल रही कार्यवाही पर रोक की मांग के लिए दिल्ली उच्च न्यायालय में याचिका दायर किया है. इस मामले में आरोपित राबड़ी देवी ने प्रिंसिपल एंड डिस्ट्रिक्ट जज के समक्ष याचिका दायर कर जज विशाल गोगने की कोर्ट से दूसरी कोर्ट में ट्रांसफर करने की मांग की है. प्रिंसिपल एंड डिस्ट्रिक्ट जज के समक्ष याचिका दायर याचिका अभी लंबित है.
उच्च न्यायालय में सुनवाई के दौरान लालू यादव की ओर से पेश वकील कपिल सिब्बल ने कहा था कि इस मामले में अभियोजन चलाने के लिए जरुरी अनुमति नहीं ली गई. ऐसे में पूरी जांच की गैरकानूनी है. बिना जरुरी अनुमति के जांच शुरु नहीं की जा सकती है. सिब्बल ने कहा था कि इस मामले में पूरी कार्यवाही ही गलत है. सुनवाई के दौरान सीबीआई की ओर से पेश वकील ने कहा था कि लालू यादव की ओर से जानबूझकर ट्रायल कोर्ट में आरोप तय करने पर दलीलें नहीं रख रहे हैं.
उच्चतम न्यायालय ने 18 जुलाई को ट्रायल कोर्ट की कार्यवाही पर रोक लगाने से इनकार कर दिया था. 7 अक्टूबर, 2022 को लैंड फॉर जॉब मामले में सीबीआई ने लालू प्रसाद यादव, राबड़ी देवी और मीसा भारती समेत 16 आरोपितों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल किया था. ट्रायल कोर्ट ने 25 फरवरी को सीबीआई की ओर से दाखिल चार्जशीट पर संज्ञान लिया था. सीबीआई ने 7 जून, 2024 को इस मामले में अंतिम चार्जशीट दाखिल किया था जिसमें 78 लोगों को आरोपित बनाया गया है. इन 78 आरोपितों में से रेलवे में नौकरी पाने वाले 38 उम्मीदवार भी शामिल हैं.















































































