पोलैंड की फैबलाकएक कंपनी में साल 1958 में निर्मित स्टीम इंजन का इस्तेमाल फिल्म सुल्तान-ए-दिल्ली की शूटिंग में किया जायेगा. स्टीम इंजन को रेलवे ने धरोहर घोषित कर रखा है. महाराष्ट्र के भूसावल शेड में रखे गये इंजन को 2017 में मरम्मत कराकर रेवाड़ी शेड लाया गया. अब उसे फिल्म ही शूटिंग के लिए अमृतसर ले जाया जा रहा है.
शनिवार 20 मार्च को यह इंजन विशेष ट्रेन से रोहतक पहुंचा तो इसे देखने के लिए लोग जमा हो गये. लोगों इंजन पर चढ़कर सेल्फी भी ली. यहां इंजन 20 मिनट तक रुका. रेलकर्मियों के अनुसार यह इंजन 64 वर्ष पुराना है. अब स्टीम इंजन चलन में नहीं है. सिर्फ फिल्म की शूटिंग के लिए ही इसका इस्तेमाल किया जाता है. रोहतक से इसे अमृतसर ले जाया गया.
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार इस इंजन का निर्माण पोलैंड की लाकोमाटिव कंपनी फैबलाक ने किया था. कोयले से चलने वाले स्टीम लोको 7000 का व्हील अरेंजमेंट 4-6-2 है. इसे पेसिफिक टाइप भी कहा जाता है. इसमें दो एक्सल पर चार लीडिंग (प्रमुख) पहिये होते हैं.
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