- पूर्व मध्य रेलवे में एक बार फिर आरपीएफ व वाणिज्य विभाग आये आमने-सामने
- 13 मई को टीटीई को आरपीएफ जवानों की पिटाई का देशव्यापी हुआ था आक्रोशत
रेलहंट ब्यूरो, पटना
रेलवे स्टेशन पर यात्रियों की बेहतर सेवा के लिए एक ओर जहां आरपीएफ के जवानों को पुरस्कृत किया जा रहा है वहीं चंद जवानों की मनमानी के कारण फोर्स को कई बार शर्म से सिर झुकानी पड़ जाती है. ताजा वाकया पटना स्टेशन का है जहां आरपीएफ के एक जवान ने जोन के मुख्य वाणिज्य प्रबंधक (पीसीसीएम) को न सिर्फ अपशब्द कहें बल्कि उनपर रायफल तक तान दी. घटना 23 अगस्त की रात 10 बजे पटना जंक्शन के प्लेटफॉर्म नंबर एक पर घटी. पीसीसीएम जेएन मेहता आरसीटी की रुटीन बैठक में हिस्सा लेने पटना आये थे और ऑफिसर्स रेस्ट हाउस में ठहरे थे.
बतौर पीसीसीएम रात 10 बजे खाना खाने के बाद टहलने की नीयत से वह स्टेशन प्लेटफॉर्म पर आये और आईएसएस (इंटीग्रेटेड सिक्योरिटी सिस्टम) के सामने से गुजर रहे थे तभी जवान ने आवाज देकर उन्हें रोका और दुर्व्यवहार किया. जवान उन्हें अपने कब्जे में लेकर पोस्ट में ले जाना चाहते थे लेकिन जीएम को काल करने की बात पर उन्हें छोड़ा गया. पीसीसीएम से उलझने वाले जवान ने उन्हें गोली मारने तक की चेतावनी तब दे दी थी जब उन्होंने अपना परिचय रेलवे के एक उच्च पदाधिकारी के रूप में दिया था. बहरहाल वाणिज्य विभाग के पदाधिकारियों की पहल पर मामले को तत्काल तो सुलझा लिया गया लेकिन इस घटना ने दानापुर स्टेशन पर टीटीई के साथ आरपीएफ जवानों की उदंडता की याद को ताजा कर दिया है.
पूर्व मध्य रेलवे के मुगलसराय के तैनात जवान सबरजीत ने 13 मई को मुगलसराय से श्रमजीवी एक्सप्रेस के एसी कोच में ड्यूटी करते हुए आ रहे डिप्टी सीटीआई पंकज कुमार की दानापुर स्टेशन पर अपने साथियों के साथ मिलकर जमकर पिटाई की थी. टीटीई ने ट्रेन में आ रहे जवान को एसी कोच में चढ़ने आपत्ति जतायी थी. इसके बाद जवान ने अपने सहयोगियों के साथ मिलकर टीटीई की जमकर पिटाई कर दी. इसका विरोध दानापुर स्टेशन पर तैनात रेलकर्मियों ने जताया और आरपीएफ पोस्ट का घेराव किया. मौके पर पहुंचे आरपीएफ कमांडेंट ने जवानों के घेरे से डिप्टी सीटीआई को मुक्त कराया था.
इस घटना के विरोध में इंडियन रेलवे टिकट चेकिंग स्टॉफ आर्गनाइजेशन ने 15 मई को देश व्यापी विरोध प्रदर्शन कर स्टेशनों पर काला बिल्ला लगाया था. इसके बाद पूर्व मध्य रेलवे के मुगलसराय के तैनात जवान सबरजीत को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया था. इस घटना के बाद से ही आरपीएफ जवानों की मनमानी के खिलाफ आवाज उठायी जाने लगी थी. एक बार फिर वाणिज्य विभाग के किसी जोनल अधिकारी से आरपीएफ जवान के दुर्व्यवहार ने नया बखेड़ा खड़ा कर दिया है. अब तक इस मामले में रेल प्रशासन ने किसी स्तर पर कोई कार्रवाई नहीं की है.
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हालांकि आरोपी जवान ने अपने अधिकारियों के सामने यह तर्क दिया कि वह अपनी डयूटी कर रहा था और ऐसे समय में किसी आला अधिकारी अथवा आम यात्री में भेदभाव करना उनके लिये नामुमकीन था. अब सवाल यह उठाया जा रहा है कि परिचय देने के बावजूद पीसीसीएम के साथ किया गया दुर्व्यवहार कितना उचित था? ऐसे में जब आरपीएफ में ऊपर से नीचे तक भ्रष्टाचार चरम पर है, सुरक्षा उपायों की लगातार अनदेखी की जा रही है, रेलवे स्टेशन से लेकर ट्रेनों में बेखौफ हॉकर चल रहे है, सीसीटीवी समेत तमाम उपकरण लगाये जाने के बावजूद उनकी मॉनिटरिंग में लापरवाही से बड़ी से बड़ी घटनाएं घट रही है फिर रेलवे के एक जिम्मेदारी पदाधिकारी के साथ पटना जैसे स्टेशन पर घटी यह घटना कहीं सोची-समझी रणनीति और साजिश का हिस्सा तो नहीं है?
सवाल कई है जिसका जबाव रेलवे वाणिज्य विभाग और आरपीएफ के अधिकारियों को देना है. ऐसे में सिर्फ एक बार यह कही जा सकती है कि सुरक्षा के नाम पर किसी व्यक्ति के साथ ऐसी बदसलूनी मान्य नहीं है चाहे वह कोई आम यात्री ही क्यों न हो. रेलवे पदाधिकारियों को आरपीएफ जवानों के इस कृत्य पर रोक लगाने के प्रभावी उपाय करने चाहिए.
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