रिटर्न के आडिट और आंतरिक जांच में 882 करोड़ रुपये का कम मूल्य लेने का खुलासा
नई दिल्ली. रेलवे में भ्रष्टाचार और अनियमितता की बात को स्वीकार करते हुए सरकार ने गुरुवार को बताया कि पिछले पांच सालों के दौरान रेलवे स्टेशनों के रिटर्न के आडिट और आंतरिक जांच में 882 करोड़ रुपये का कम मूल्य लेने का मामला सामने आया जिसमें से 682 करोड़ रुपये की वसूली की गई. लोकसभा में केशव प्रसाद मौर्य के पूरक प्रश्न के उत्तर में रेल मंत्री सदानंद गौड़ा ने कहा कि रेलवे में भ्रष्टाचार है, अनियमितता है. उन्होंने कहा कि स्टेशनों पर आमदनियों का समुचित लेखांकन सुनिश्चित करने के लिए विभागीय तंत्र है जिसमें यातायात लेखा कार्यालय द्वारा स्टेशन विवरणियों की आंतरिक जांच करना और वाणिज्यिक एवं लेखा विभागों द्वारा निरीक्षण तथा नियमित जांच करना शामिल है. उन्होंने कहा कि विभागीय जांच के अलावा भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक कार्यालय द्वारा भी सांविधिक लेखा परीक्षा की जाती है. रेल मंत्री ने बताया कि 2009.10 से 2013.14 के दौरान पिछले पांच वर्षों के रेलवे स्टेशनों के रिटर्न की आडिट और आंतरिक जांच में 882 करोड़ रुपये कम मूल्य लेने का मामला सामने आया जिसमें से 682 करोड़ रुपये की वसूली की गई. गौड़ा ने कहा कि जांच के दौरान पाए गए कम मूल्य लेने संबंधित अनियमितताओं को डेबिट किया जाता है और संबंधित पक्षों या कर्मचारियों से राशि वसूल की जाती है.
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