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KHARAGPUR : ट्रेन की चपेट में आकर ट्रैकमैन की मौत, उठी मांग…सुरक्षा से लापरवाही पर जिम्मेदारी ले रेलवे !

KHARAGPUR. ड्यूटी पर तैनात एक और ट्रैकमैन की ट्रेन की टक्कर से मौत हो गयी. मरने वाला ट्रैकमैन 54 साल का मोहम्मद मंज़ूर हैदर खड़गपुर शहर के वार्ड नंबर 5 के देबलपुर कलकती इलाके में रहता था. घटना शनिवार सुबह खड़गपुर स्टेशन से सटे नीमपुरा यार्ड के पास आइमा इलाके में खड़गपुर-बालेश्वर लाइन पर हुई. ‘गैंगमैन वर्कर्स यूनियन’ ने घटना में रेलवे पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए विरोध दर्ज कराया है. 2005 में लेफ्ट वर्कर्स ऑर्गनाइज़ेशन के तहत गैंगमैन वर्कर्स यूनियन के आंदोलन के कारण ही मंज़ूर हैदर और कई दूसरे लोगों को नौकरी मिली थी.

आंदोलन को खड़गपुर के लेफ्ट वर्कर्स लीडर अनिल दास उर्फ ​​’भीमडा’ ने लीड किया था. शनिवार के दुखद हादसे के बाद वे मरने वाले के परिवार के साथ खड़े रहे और ज़्यादा से ज़्यादा मुआवज़ा और पत्नी को नौकरी देने की मांग की. रेलवे पुलिस और परिवार के सूत्रों के मुताबिक, मंज़ूर रेलवे में ट्रैकमैन की पोस्ट के तहत की-मैन का काम करता था. शनिवार सुबह भी वह काम कर रहा था. खड़गपुर के आइमा इलाके में एक्सप्रेस ट्रेन की चपेट में आने से उसकी मौके पर ही मौत हो गई. सूचना मिलने पर खड़गपुर GRP ने शव बरामद किया और उसे अस्पताल ले गई. खड़गपुर सबडिवीजन अस्पताल में पोस्टमार्टम के बाद शनिवार शाम तक शव देवलपुर में उसके घर पहुंच गया. जैसे ही उनके पति की बॉडी घर पहुंची, उनकी पत्नी पुतुल खातून फूट-फूट कर रोने लगीं.

यह भी पढ़ें : South Eastern Railway : छह माह में नौ रेलकर्मियों की ऑन ड्यूटी गयी जान!, ट्रैक मेंटेनरों की मौतें चिंताजनक

बताया जा रहा है कि मंजुर का इकलौता बेटा नॉर्थ बंगाल के एक कॉलेज में MBBS की पढ़ाई कर रहा है. पिता की मौत की खबर मिलते ही वह वहां से चला गया. इस घटना में रेलवे की तरफ से बहुत बड़ी लापरवाही का आरोप लगाते हुए अनिल दास ने कहा, “जब ट्रैकमैन लाइन पर काम करते हैं, तो उनके साथ एक लुकमैन होता है. हमारे आंदोलन की वजह से रेलवे की अलग-अलग ब्रांच में इसे शुरू किया गया था. खड़गपुर-बालेश्वर लाइन पर वह सिस्टम अभी तक क्यों नहीं शुरू किया गया, यह हमारा सवाल है. अगर लुकमैन नहीं है, तो ट्रैकमैन या कीमैन के पास एक ऑटोमैटिक मशीन होनी चाहिए. इससे उन्हें लाइन पर ट्रेन आने का मैसेज जाता है. इस मामले में, मंजुर के पास वह भी नहीं था. इसलिए, रेलवे किसी भी तरह से इस मौत की जिम्मेदारी से बच नहीं सकता.”

अनिल ने आगे आरोप लगाया कि यह हादसा तब हुआ जब एक डाउन संबलपुर-शालीमार एक्सप्रेस ने उन्हें टक्कर मार दी. पुलिस ने करीब 2-3 घंटे बाद बॉडी बरामद की. इस बारे में खड़गपुर GRP के एक अधिकारी ने कहा, “हमें जैसे ही जानकारी मिली, हमने बॉडी बरामद कर ली और उसे हॉस्पिटल भेज दिया.” उन्होंने यह भी कहा कि बॉडी सुबह 11 बजे तक बरामद कर ली गई थी. हालांकि इस बारे में खड़गपुर डिवीजन के DRM ललितमोहन पांडे से संपर्क करने की कोशिश की गई, लेकिन यह संभव नहीं हो पाया. हालांकि, रेलवे के एक पब्लिक रिलेशन ऑफिसर ने कहा कि रेलवे परिवार के साथ खड़ा रहेगा. उन्हें नियमों के अनुसार मुआवजा और दूसरे फायदे भी मिलेंगे.

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