- मुंबई से बीटेक और एमटेक करने के बाद रेलवे में ग्रुप डी की ज्वाइन की नौकरी
- देशव्यापी बहस का केंद्र बने श्रवण, रोजगार का संकट या सरकारी नौकरी का स्थायित्व
रेलहंट ब्यूरो, जमशेदपुर
रेलवे ग्रुप डी में ट्रैकमैन के पद पर ज्वाइन करने वाले आईआईटीएन श्रवण कुमार इन दिनों देशव्यापी बहस के केंद्र में हैं. रेलवे ज्वाइन करने के उनके कदम को एक बड़ा वर्ग रोजगार की कमी से जोड़कर देख रहा है तो दूसरी ओर लोग इसे सरकारी नौकरी के स्थायित्व व जॉब सिक्योरिटी के कारण उठाया गया कदम बता रहे. धनबाद रेलमंडल में 30 जुलाई को ट्रैकमैन के रूप में नौकरी शुरू करने वाले श्रवण को लेकर रेलवे अधिकारियों की भी चिंता बढ़ गयी है. स्वयं सीनियर डीईएन को-आर्डिनेशन बीके सिंह ने श्रवण को बुलाकर उनके रेलवे ज्वाइन करने के पीछे का सच जानने का प्रयास किया है तो डीआरएम धनबाद अनिल कुमार मिश्रा ने भी श्रवण की काउंसेलिंग कर यह जानने का प्रयास किया कि आखिर आईआईटी मुंबई की यह प्रतिभा मल्टीनेशनल कंपनियों की चकाचौंध को छोड़कर रेलवे में ग्रुप डी की नौकरी में क्यों आयी?
इसका जबाव धीरे-धीरे सामने आने लगा है. श्रवण कुमार मूल रूप से बिहार के रहने वाले है जहां के अधिकांश युवकों में मैट्रिक पास करने के बाद से ही सरकारी नौकरी पाने की ललक देखी जाती है. बड़ी संख्या में बिहार के युवक देश के विभिन्न हिस्सों में सरकारी नौकरियों में बड़े ओहदे पर प्रतिनियोजित भी है. स्वयं श्रवण कुमार ने रेलवे अधिकारियों से बातचीत में यह संकेत दिया कि सरकारी नौकरी में जॉब सिक्योरिटी होती है. यही कारण है कि उन्होंने यह कदम उठाया. श्रवण का मानना है कि उनके लिए विकल्प खुले है और उन्होंने कई प्रतियोगी परीक्षाएं दी है जिनका रिजल्ट आना बाकी है. हां, यह जरूरी है कि उनकी प्राथमिकता सरकारी नौकरी ही है. श्रवण के बड़े भाई रंजीत कुमार पटना में पीडब्ल्यूडी में है.
इधर, रेलवे के स्तर पर वर्तमान ग्रेड में ही श्रवण की बेहतरी के लिए मंथन शुरू हो गया है. माना जा रहा है कि शुरुआती प्रशिक्षण अवधि के बाद उन्हें शीघ्र ही इंजीनियरिंग कंट्रोल अथवा दूसरे तकनीकी कार्य में प्रतिनियोजित कर उनकी सेवा ली जा सकती है. हालांकि रेलवे में पैरवी और पहुंच के लिए प्रतिनियोजन एक आसान रास्ता माना जाता है. देश के कई रेलमंडल में बड़ी संख्या में चतुर्थ वर्गीय कर्मियों को मूल कार्य स्थल से हटाकर कार्यालयों में प्रतिनियोजित कर सेवा ली जा रही है. कुछ ऐसा कदम श्रवण के साथ भी किया जा सकता है.
श्रवण ने साल 2010 में आईआईटी बॉम्बे के मेट्रोलॉजी एंड मैटेरियल साइंस ब्रांच में इंटीग्रेटेड डुअल डिग्री कोर्स में एडमिशन लिया था. साल 2015 में उन्हें बीटेक और एमटेक की डिग्री दी गई. पढ़ाई पूरी होने के बाद उन्होंने रेलवे ग्रुप डी परीक्षा की तैयारी कर उसे क्रैक किया. अब वह धनबाद रेलवे स्टेशन पर ट्रैकमैन का काम देख रहे हैं, उनकी पोस्टिंग 30 जुलाई को धनबाद रेल मंडल में की गई हैं. इसके बाद से ही यह बहस छिड़ गयी है कि आखिरकार आईआईटी बॉम्बे से पढ़े श्रवण कुमार ने बहु राष्ट्रीय कंपनियों में नौकरी की जगह रेलवे ग्रुप डी के पद पर नौकरी करने की क्यों सोची? हालांकि इसका जबाव भी श्रवण ने दिया कि सरकारी नौकरी में जॉब सिक्योरिटी होती है. उनके कई दोस्त प्राइवेट सेक्टर में हैं, लेकिन वह सरकारी नौकरी ही करना चाहते थे. हालांकि ग्रुप डी ज्वाइन करने से पूर्व श्रवण को कार्य प्रकृति की अधिक जानकारी नहीं थी. उन्हें यह लगा था कि उन्हें तकनीकी कार्य मिलेगा.
लेखक, कुमार मनीष, स्थानीय पत्रिका लहर चक्र के संपादक हैं, सूचनाओं पर आधारित समाचार में किसी सूचना अथवा टिप्पणी का स्वागत है, आप हमें वाट्सएप 6202266708 या मेल railnewshunt@gmail.com पर भेज सकते है हम उसे पूरा स्थान देंगे.
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