तारकेश कुमार ओझा
कोरोना के खतरे , लॉक डाउन , अन लॉक और सोशल डिस्टेसिंग के अपने तकाजे हो सकते हैं , लेकिन लगातार जाम होते ट्रेनों के पहियों का मसला केवल इस वर्ग की पेट से ही नहीं जुड़ा है . जीवन के कई अहम फैसले और ढेरों कसमें – वादे भी इनकी जिंदगी की पटरी पर स्तब्ध खड़े रह कर सिग्नल हरी होने का इंतजार कर रहे हैं . किसी को लगातार टल रही भांजी की शादी की चिंता है तो कोई बीमार चाचा के स्वास्थ्य को लेकर परेशान है . दुनिया की तमाम दलीलें और किंतु – परंतु उनकी चाह और चिंता के सामने बेकार है , क्योंकि अनिश्चितता की अंधेरी सुरंग में बंद उनकी बदकिस्मती के ताले की चाबी सिर्फ और सिर्फ रेलवे के पास है .- योगा एक्सप्रेस में खूनी झड़प: दरवाजे पर खड़े होने के विवाद में दिल्ली मेट्रो के सुरक्षा गार्ड की पीट-पीटकर हत्या, 8 गिरफ्तार - June 20, 2026
- रेलवे का सर्जिकल स्ट्राइक : आज से लागू हुआ नया नियम, 10 हजार तक होगा जुर्माना, अवैध वेंडिंग में जायेंगे जेल ! - June 20, 2026
- TATANAGAR : 4 टन की पार्सल बोगी में 6 टन लोडिंग की पुष्टि, पार्सल घोटाले पर क्यों मौन हैं CKP DRM! - June 18, 2026















































































