तारकेश कुमार ओझा
कोरोना के खतरे , लॉक डाउन , अन लॉक और सोशल डिस्टेसिंग के अपने तकाजे हो सकते हैं , लेकिन लगातार जाम होते ट्रेनों के पहियों का मसला केवल इस वर्ग की पेट से ही नहीं जुड़ा है . जीवन के कई अहम फैसले और ढेरों कसमें – वादे भी इनकी जिंदगी की पटरी पर स्तब्ध खड़े रह कर सिग्नल हरी होने का इंतजार कर रहे हैं . किसी को लगातार टल रही भांजी की शादी की चिंता है तो कोई बीमार चाचा के स्वास्थ्य को लेकर परेशान है . दुनिया की तमाम दलीलें और किंतु – परंतु उनकी चाह और चिंता के सामने बेकार है , क्योंकि अनिश्चितता की अंधेरी सुरंग में बंद उनकी बदकिस्मती के ताले की चाबी सिर्फ और सिर्फ रेलवे के पास है .- जालंधर कैंट : रेलवे का एक और घूसखोर सीनियर सेक्शन इंजीनियर गिरफ्तार, सीबीआई 66 हजार की रिश्वत में उठाया, जाने 2% कमीशन की क्या है पूरी कहानी - August 5, 2026
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