NEW DELHI. केंद्रीय रेल एवं खाद्य प्रसंस्करण उद्योग राज्य मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू का मोदी मंत्रिमंडल से इस्तीफा राजनीति के गलियारों में चर्चा का विषय बन गया है. राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सलाह पर भारतीय संविधान के अनुच्छेद 75(2) के तहत उनका इस्तीफा तत्काल प्रभाव से स्वीकार कर लिया है.
औपचारिक रूप से यह कदम उनके राज्यसभा कार्यकाल के समापन (21 जून) के बाद आया है, लेकिन राजनीतिक विश्लेषक इसे केवल एक संवैधानिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि पंजाब की राजनीति में एक नए घटनाक्रम के संकेत के रूप में देख रहे हैं.
इस्तीफे के पीछे की परिस्थितियां और संवैधानिक पहलूसंवैधानिक प्रावधानों के अनुसार, यदि कोई व्यक्ति संसद के किसी भी सदन (लोकसभा या राज्यसभा) का सदस्य नहीं रहता है, तो वह अधिकतम 6 महीने तक ही बिना सांसद रहे मंत्री पद पर बना रह सकता है.
रवनीत बिट्टू, जो अगस्त 2024 से जून 2026 तक राजस्थान से राज्यसभा सांसद रहे, उनका कार्यकाल 21 जून को समाप्त हो गया था.हालांकि कार्यकाल खत्म होने के बाद कुछ हफ्तों तक वे पद पर बने रहे, लेकिन अब बीजेपी द्वारा उन्हें दोबारा राज्यसभा न भेजे जाने के निर्णय के बाद उन्होंने औपचारिक रूप से पद छोड़ दिया है.
पंजाब चुनाव बिट्टू के इस्तीफे की बड़ी वजह
पंजाब विधानसभा चुनाव पर नजरइस इस्तीफे के पीछे की सबसे बड़ी वजह पंजाब की आगामी राजनीति मानी जा रही है. पूर्व मुख्यमंत्री बेअंत सिंह के पोते रवनीत सिंह बिट्टू पंजाब में बीजेपी का एक प्रमुख और मजबूत सिख चेहरा हैं.राजनीतिक विशेषज्ञों के अनुसार, उनके इस्तीफे के पीछे की मुख्य वजहें निम्नलिखित हैं:
ग्राउंड पॉलिटिक्स में वापसी: बिट्टू ने हाल ही में अपने बयानों में पंजाब लौटने और राज्य की राजनीति में सक्रिय होने की इच्छा जताई थी.2027 के चुनाव की कमान: भारतीय जनता पार्टी पंजाब में शिरोमणि अकाली दल (SAD) से गठबंधन की संभावनाओं को दरकिनार कर अपने दम पर चुनाव लड़ने की तैयारी में है. ऐसे में बीजेपी को राज्य स्तर पर एक बड़े जमीनी नेता की जरूरत है.
सिख चेहरे की जरूरत: पंजाब में आम आदमी पार्टी (AAP) की सरकार और कांग्रेस के आंतरिक कलह के बीच बीजेपी खुद को एक मजबूत विकल्प के रूप में पेश करना चाहती है. रवनीत बिट्टू इस रणनीति के केंद्र में हो सकते हैं.
रवनीत बिट्टू का बयान:”प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति जी का आभार. भारत सरकार में राज्य मंत्री के रूप में देश और विशेषकर मेरे प्रिय पंजाब की सेवा करना मेरे लिए गर्व की बात रही. जनसेवा और राष्ट्रवाद की मेरी यात्रा नए संकल्प के साथ जारी रहेगी.”
कौन हैं रवनीत सिंह बिट्टू
रवनीत सिंह बिट्टू पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री बेअंत सिंह के पोते हैं. बेअंत सिंह की 1995 में हत्या कर दी गई थी. रवनीत सिंह बिट्टू ने 2009 में लोकसभा में आनंदपुर साहिब का प्रतिनिधित्व किया था. इसके बाद 2014 और 2019 में लुधियाना से जीत हासिल की थी. कांग्रेस में अपने राजनीतिक करियर के दौरान उन्होंने लोकसभा में पार्टी के नेता और निचले सदन में पार्टी के व्हिप के रूप में भी काम किया.
रवनीत सिंह बिट्टू का केंद्रीय मंत्रिमंडल से बाहर होना किसी राजनीतिक विदाई का संकेत नहीं, बल्कि दिल्ली की सत्ता से निकलकर पंजाब की जमीनी राजनीति में एक बड़ी सियासी पारी शुरू करने की रणनीति का हिस्सा नजर आता है.
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