अराजपत्रित कर्मचारियों के लिए स्व-अनुरोध स्थानांतरण (Own Request Transfer) के नियमों में बड़ा संशोधन
नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट (NOC) की बाध्यता खत्म, HRMS पोर्टल से पारदर्शी तरीके से होगी प्रक्रिया
रिलीविंग और प्रभार हस्तांतरण (Handing Over) में देरी रोकने के लिए ब्रांच अफसरों और DRM की जवाबदेही तय
NEW DELHI. रेलवे ने अपने लाखों कर्मचारियों के हित में एक दूरगामी और कल्याणकारी निर्णय लिया है. रेलवे बोर्ड ने अपने नए सर्कुलर (RBE No. 61/2026) के तहत स्व-अनुरोध स्थानांतरण (Own Request Transfer) की पूरी नीति में व्यापक संशोधन किया है. इस नई नीति का मुख्य उद्देश्य लंबे समय से कार्यरत कर्मचारियों को उनके गृह मंडल या पसंदीदा स्थानों पर स्थानांतरित होने में प्राथमिकता देना और संपूर्ण स्थानांतरण प्रक्रिया को डिजिटल, निष्पक्ष व पारदर्शी बनाना है.
1. 20 साल की सेवा पूरी करने वाले कर्मचारियों को विशेष प्राथमिकता
रेलवे बोर्ड द्वारा जारी दिशानिर्देशों के अनुसार, जिन अराजपत्रित (Non-Gazetted) रेल कर्मचारियों ने 20 वर्ष या उससे अधिक की नियमित सेवा पूरी कर ली है, उन्हें स्व-अनुरोध स्थानांतरण मामलों में सर्वोच्च प्राथमिकता (Priority) दी जाएगी.
अब तक स्थानांतरण के आवेदनों के महीनों और सालों तक लंबित रहने की शिकायतें आती थीं. नई व्यवस्था के तहत, लंबी सेवा दे चुके वरिष्ठ कर्मचारियों के आवेदनों को त्वरित गति से निपटाया जाएगा, ताकि वे अपने जीवन के उत्तरार्ध में परिवार के निकट या अपनी पसंद के स्थान पर सेवा दे सकें.
2. HRMS पोर्टल से स्वचालित और पारदर्शी व्यवस्था (NOC प्रक्रिया समाप्त)
स्थानांतरण प्रक्रिया को सुगम और मानवीय हस्तक्षेप से मुक्त करने के लिए रेलवे ने HRMS (Human Resource Management System) पोर्टल की भूमिका को केंद्रीय बना दिया है:
- मंथली प्रायोरिटी लिस्ट: हर महीने की पहली तारीख को HRMS पोर्टल स्वचालित रूप से 20 वर्ष से अधिक सेवा वाले कर्मचारियों की एक एकीकृत वरीयता सूची (Priority List) तैयार करेगा.
- वरीयता का आधार: इस सूची का निर्धारण केवल कर्मचारी की कुल नियमित सेवा अवधि (Years of Regular Service) के घटते क्रम (Descending Order) में होगा.
- ऑटोमैटिक ट्रांसफर ऑर्डर: संबंधित कैडर या विभाग में स्वीकृत पद (Vacancies) उपलब्ध होते ही HRMS प्रणाली के माध्यम से सीधे ट्रांसफर ऑर्डर जारी कर दिए जाएंगे.
- NOC की बाध्यता खत्म: अब कर्मचारियों को जिस मंडल या ज़ोन में जाना है, वहां की स्वीकार्य इकाई (Accepting Unit) से अलग से ‘अनापत्ति प्रमाण पत्र’ (NOC) प्राप्त करने के लिए चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे. पूरी प्रक्रिया सिस्टम-ड्रिवेन होगी.
3. कैडर, विभाग और वर्कशॉप कर्मचारियों के लिए स्पष्ट नियम
सर्कुलर में यह स्पष्ट किया गया है कि स्थानांतरण के दौरान रेलवे के प्रशासनिक ढांचे और कार्यकुशलता से कोई समझौता नहीं किया जाएगा:
- कैडर परिवर्तन नहीं: यह नीति केवल उसी कैडर, विभाग और श्रेणी (Grade/Category) के भीतर लागू होगी जिसमें कर्मचारी वर्तमान में कार्यरत है. स्थानांतरण के दौरान श्रेणी या कैडर बदलने की अनुमति नहीं होगी.
- प्रोडक्शन यूनिट्स व वर्कशॉप: कारखानों (Workshops) और उत्पादन इकाइयों (Production Units) में कार्यरत कर्मचारियों के लिए भी आवश्यकता और उपलब्धता के आधार पर यह प्रक्रिया समान रूप से लागू की जाएगी.
4. रिलीविंग और प्रभार हस्तांतरण (Handing Over) पर कड़ा रुख
अक्सर देखा जाता है कि ट्रांसफर ऑर्डर जारी होने के बावजूद नियंत्रक अधिकारी कर्मचारियों को कार्यमुक्त (Relieve) करने में महीनों लगा देते हैं. रेलवे बोर्ड ने इस पर सख्त निर्देश दिए हैं:
- अधिकारियों की सीधी जिम्मेदारी: यदि किसी कर्मचारी के पास स्टोर, स्टॉक शीट या कोई अन्य प्रशासनिक/वित्तीय प्रभार (Charge) है, तो उसका समय पर हैंडओवर कराना संबंधित ब्रांच ऑफिसर (Branch Officer) और Controlling JAG Officer की व्यक्तिगत जिम्मेदारी होगी.
- बहानेबाज़ी पर रोक: केवल प्रभार हस्तांतरण (Charge Handover) में देरी का बहाना बनाकर किसी भी कर्मचारी की रिलीविंग को बेवजह रोका नहीं जा सकेगा.
- DRM स्तर पर मासिक समीक्षा: स्थानांतरण और रिलीविंग में हो रही देरी की निगरानी के लिए मंडल रेल प्रबंधक (DRM) स्तर पर हर महीने एक उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक आयोजित की जाएगी, जिससे लंबित मामलों का तुरंत निस्तारण हो सके.
आयेगी पारदर्शिता, पक्षपात की गुंजाइश होगी कम
रेलवे बोर्ड का यह फैसला कर्मचारियों के कल्याण और प्रशासनिक दक्षता की दिशा में एक मील का पत्थर साबित होगा. एक तरफ जहां 20 साल से अधिक समय से सेवा दे रहे कर्मचारियों को उनके मनचाहे स्थान पर जाने का अवसर मिलेगा, वहीं दूसरी ओर HRMS के इस्तेमाल से पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता आएगी और बिचौलियों तथा पक्षपात की गुंजाइश पूरी तरह समाप्त हो जाएगी. रिलीविंग की समय-सीमा तय होने और वरिष्ठ अधिकारियों की जवाबदेही निर्धारित होने से रेल कर्मचारियों में असंतोष कम होगा और रेलवे के परिचालन में अधिक उत्पादकता देखने को मिलेगी.
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