- दक्षिण तटीय रेलवे ने जारी किया ‘मोस्ट अर्जेंट’ आदेश; ऑन-रोल कर्मचारियों, हादसों और मौतों का मांगा पूरा हिसाब
- 8 CPC के सामने पेश होगा रेलकर्मियों की कठिन कार्यशैली का ब्योरा, जोखिम भत्ते में भारी बढ़ोतरी की जगी उम्मीद
Visakhapatnam. भारतीय रेलवे के लाखों कर्मचारियों के लिए 8वें केंद्रीय वेतन आयोग (8th Central Pay Commission) से जुड़ी एक बेहद महत्वपूर्ण और बड़ी खबर आ रही है. रेलवे बोर्ड के निर्देश पर अब विभिन्न श्रेणियों के रेलकर्मियों द्वारा ड्यूटी के दौरान सामना किए जाने वाले “जोखिम और कठिनाई” (Risk & Hardship) का सटीक और सत्यापित डेटा जुटाने की प्रक्रिया युद्ध स्तर पर शुरू कर दी गई है.
इस कदम से यह साफ संकेत मिल रहे हैं कि आगामी वेतन आयोग में कड़े और चुनौतीपूर्ण माहौल में काम करने वाले रेलकर्मियों के वर्किंग कंडीशन को बेहतर बनाने और उनके भत्तों में सम्मानजनक बढ़ोतरी करने के लिए रेलवे प्रशासन ने अपनी तैयारी तेज कर दी है.
अधिसूचना जारी: ‘मोस्ट अर्जेंट’ श्रेणी में रखा गया काम
दक्षिण तटीय रेलवे (South Coast Railway), विशाखापट्टनम के प्रधान कार्यालय (कार्मिक विभाग) द्वारा जारी आधिकारिक पत्र संख्या No. SCoR/P-HQ/Welfare/8 th pay Comm/2026 (दिनांक: 17.07.2026) के माध्यम से सभी संबंधित अधिकारियों, मंडलों और कारखानों को इस संबंध में सख्त निर्देश जारी किए गए हैं. यह आदेश रेलवे बोर्ड के पत्र संख्या PC-VII/2026/8 CPC/10 (दिनांक 07.07.2026) के संदर्भ में जारी किया गया है. मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए प्रशासन ने इस पूरी कसरत को “MOST URGENT” (अत्यंत महत्वपूर्ण) श्रेणी में वर्गीकृत किया है और सभी विभागों को गूगल शीट के माध्यम से डेटा तुरंत अपलोड करने को कहा है.
क्यों खास है यह डेटा और क्या होगा इसका असर?
रेलवे द्वारा जुटाए जा रहे इस डेटा का सीधा संबंध कर्मचारियों की जेब और उनकी सुरक्षा से है. भारतीय रेलवे में ट्रैकमेन, कीमैन, रनिंग स्टाफ (लोको पायलट, सहायक लोको पायलट, गार्ड) और सी एंड डब्ल्यू (C&W) जैसे ग्राउंड स्टाफ बेहद कठिन, दुर्गम और जोखिम भरे हालातों में चौबीसों घंटे काम करते हैं.
8वें वेतन आयोग के समक्ष रेलकर्मियों का पक्ष मजबूती से रखने के लिए रेलवे बोर्ड एक एकीकृत डेटाबेस (Consolidated Database) तैयार कर रहा है. इसके जरिए वेतन आयोग को यह समझाया जाएगा कि भारतीय रेल को सुरक्षित चलाने के लिए कर्मचारी अपनी जान जोखिम में डालकर किस स्तर की कठिनाइयों का सामना करते हैं. इस ब्योरे के आधार पर ही 8वें वेतन आयोग में रिस्क और हार्डशिप अलाउंस (जोखिम और कठिनाई भत्ता) के स्लैब और दरों को नए सिरे से तय या अपग्रेड किया जाएगा.
इन तीन बिंदुओं पर मांगा गया है मुख्य ब्योरा
- जारी अधिसूचना के अनुसार, सभी मंडलों और विभागों से निर्धारित प्रोफॉर्मा के तहत निम्नलिखित तीन मुख्य जानकारियां मांगी गई हैं.
- स्वीकृत और कार्यरत कर्मचारियों की संख्या (Men on Roll) यानि विभिन्न श्रेणियों में इस समय कुल कितने कर्मचारी ऑन-ड्यूटी तैनात हैं.
- ड्यूटी के दौरान होने वाली मृत्यु (Death) यानि कार्यस्थल या ड्यूटी के वक्त हादसों के कारण जान गंवाने वाले रेलकर्मियों की संख्या.
- गंभीर चोटें (Grievous Injuries) यानि ड्यूटी के दौरान गंभीर रूप से घायल या अपंग हुए कर्मचारियों का पूरा प्रामाणिक रिकॉर्ड.
कर्मचारी यूनियनों में बढ़ी हलचल
रेलवे बोर्ड के इस प्रशासनिक कदम के बाद रेल कर्मचारी यूनियनों में भी हलचल तेज हो गई है. यूनियनों का लंबे समय से आरोप रहा है कि ग्राउंड स्टाफ के जोखिम के मुकाबले उन्हें मिलने वाला रिस्क अलाउंस बेहद कम है.
जानकारों का मानना है कि यदि सभी जोन से यह डेटा पूरी निष्पक्षता और सटीकता के साथ भेजा जाता है, तो 8वें वेतन आयोग के पास कर्मचारियों के भत्तों और सामाजिक सुरक्षा को दोगुना करने का एक मजबूत वैधानिक आधार होगा. फिलहाल, दक्षिण तटीय रेलवे ने अपने सभी विंग्स को इस डेटा को पूरी तरह सत्यापित कर बिना किसी देरी के जमा करने का आदेश दिया है.
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