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सिस्टर लॉबी सिस्टम के विरोध मेंउतरे ट्रेन चालक, कहा – 16 घंटा रेस्ट सुनिश्चित करे रेल प्रशासन

CHAKRADHARPUR. दक्षिण पूर्व रेलवे जाेन के चक्रधरपुर रेल मंडल में रेलवे प्रशासन ने रेलवे रनिंग कर्मचारियों के लिए “सिस्टर लॉबी” सिस्टम की शुरुआत की है. इस नई व्यवस्था के तहत राउरकेला और बंडामुंडा, टाटानगर और आदित्यपुर तथा जुरुली और बांसपानी की क्रू लॉबी को आपस में मर्ज किया जा रहा है. इस नई व्यवस्था के खिलाफ आज राउरकेला रेलवे क्रू लॉबी में ट्रेन चालकों ने जमकर विरोध प्रदर्शन किया. ट्रेन चालकों ने प्रदर्शन के दौरान सिस्टर लॉबी का विरोध करने के साथ ही हेड क्वार्टर में ट्रेन चालकों की 16 घंटा रेस्ट को सुनिश्चित करने की मांग की.

मालूम रहे कि इस नई व्यवस्था के अनुसार अब ट्रेन चालक (लोको पायलट) और सहायक लोको पायलट जिस स्टेशन पर ड्यूटी के दौरान रिलीव होंगे, वहीं ड्यूटी ऑफ करेंगे. इसके बाद उन्हें अपने 16 घंटे के अनिवार्य विश्राम (रेस्ट) समय के भीतर ही अपने हेडक्वार्टर पहुंचना होगा. ड्यूटी पर लौटते समय भी उन्हें अपने हेडक्वार्टर में छोड़ी गई निजी गाड़ी लेकर घर जाना पड़ेगा.

इस नई व्यवस्था ने ट्रेन चालकों के बीच कई व्यावहारिक सवाल खड़े कर दिए हैं. सबसे बड़ा प्रश्न यह है कि ड्यूटी से रिलीव होने के बाद वे अपने घर या हेडक्वार्टर तक कैसे पहुंचेंगे, क्योंकि रिलीविंग प्वाइंट से उन्हें जीप या अन्य परिवहन सुविधा उपलब्ध नहीं कराई जाएगी. ऐसे में ट्रेन चालकों को निजी साधनों या सार्वजनिक परिवहन पर निर्भर रहना पड़ेगा, जिससे समय और ऊर्जा दोनों की खपत बढ़ेगी.

रेलवे बोर्ड की गाइडलाइन के अनुसार ड्यूटी समाप्त होने के बाद ट्रेन चालकों को समुचित और पर्याप्त विश्राम देना अनिवार्य है, ताकि वे अगली ड्यूटी के लिए शारीरिक व मानसिक रूप से पूरी तरह फिट रह सकें. लेकिन सिस्टर लॉबी सिस्टम लागू होने के बाद यदि चालक अपने 16 घंटे के रेस्ट में से ही कई घंटे हेडक्वार्टर आने-जाने में खर्च करेंगे, तो वास्तविक विश्राम समय में निश्चित रूप से कमी आ जाएगी. ट्रेन चालकों का मानना है कि इससे न केवल उनकी कार्यक्षमता प्रभावित होगी, बल्कि थकान बढ़ने के कारण रेल सुरक्षा पर भी असर पड़ सकता है.

रनिंग स्टाफ के बीच यह चर्चा तेज है कि पर्याप्त विश्राम न मिलने की स्थिति में रेल दुर्घटनाओं की संभावना बढ़ सकती है. उनका कहना है कि जब रेलवे स्वयं सुरक्षित परिचालन और “सेफ्टी फर्स्ट” की नीति पर जोर देता है, तो फिर ऐसी व्यवस्था क्यों लागू की जा रही है, जिससे रेस्ट टाइम प्रभावित हो.

राउरकेला और बंडामुंडा के ट्रेन चालकों में इस नए नियम को लेकर खासा असंतोष देखा जा रहा है. कर्मचारियों के बीच यह भी चर्चा है कि चक्रधरपुर रेलमंडल के वरिष्ठ विद्युत अभियंता (Sr DEE) ने इस व्यवस्था का समर्थन किस आधार पर किया है. ट्रेन चालकों का कहना है कि यदि प्रशासन ने सिस्टर लॉबी लागू की है तो साथ ही समुचित ट्रांसपोर्ट सुविधा और रेस्ट मैनेजमेंट की भी ठोस व्यवस्था करनी चाहिए, ताकि कर्मचारियों की सुरक्षा और रेल परिचालन दोनों प्रभावित न हों. अब देखना यह होगा कि रेलवे प्रशासन कर्मचारियों की इन चिंताओं पर क्या कदम उठाता है और क्या इस नई व्यवस्था में आवश्यक संशोधन किए जाते हैं या नहीं.

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