Connect with us

Hi, what are you looking for?

Rail Hunt

न्यूज हंट

SER/CKP : नक्सली बंद में मुख्यालय से बाहर थे RPF कमांडेंट, बिना सुरक्षा ट्रैक पेट्रोलिंग, विस्फोट में गैंगमैन की मौत से उठे कई सवाल …!

Untitled design - 1
  • 28 जुलाई से 3 अगस्त तक शहीद सप्ताह और  3 अगस्त को पांच राज्यों में नक्सलियों ने बुलाया था बंद 
  • रेलवे ट्रैक पर लाल बैनर कर नक्सलियों ने दी थी चेतावनी, रात में ब्लास्ट कर जता दिया था अपना इरादा  
  • करमपदा सेक्शन में 24घंटे में तीन विस्फोट, एक रेलकर्मी की मौत, नेतृत्व विहीन दिखी आरपीएफ की टीम  

CHAKRADHARPUR. चक्रधरपुर रेलमंडल के करमपदा सेक्शन में नक्सलियों की चेतावनी को गंभीरता से नहीं लिया जाना रेलवे को काफी भारी पड़ा है. रविवार की सुबह रेलवे ट्रैक पर विस्फोट से रेलवे ट्रैकमैन एतवा ओराम (58) की मौत हो गयी जबकि बुधराम मुंडा गंभीर रूप से घायल हो गया. उसे बेहतर इलाज के लिए राउरकेला रेफर किया गया है.

इस घटना को सुरक्षा से बड़ी चूक के रूप में देखा जा रहा है. रेलकर्मियों का कहना है कि शनिवार व रविवार की दरम्यानी रात ही नक्सलियों ने विस्फोट कर पटरी को उड़ा दिया था. इसकी जानकारी के बाद भी बिना सुरक्षा जांच के की-मैनों को पेट्रोलिंग पर भेजा गया. तो क्या यह सुरक्षा से बड़ी चूक नहीं थी?

नक्सली विस्फोट में घायल रेलकर्मी

मालूम हो कि 28 जुलाई से ही नक्सलियों का शहीद सप्ताह चल रहा था. लगातार पोस्टरबाजी कर सुरक्षा बलों को चेतावनी दे रहे थे. शनिवार की रात 11 बजे के ठीक बाद विमलगढ़ सेक्शन के किलोमीटर संख्या 478/1 के समीप पहला विस्फोट कर नक्सलियों ने पटरी उड़ाकर अपनी मौजूदगी का संदेश दिया. स्पष्ट था कि वह स्थान नक्सलियों के टारगेट पर था. सूचना आरपीएफ को मिली लेकिन सुबह 6.40 बजे  रेलवे की टीम सीआरपीएफ और आरपीएफ की टीम मौके पर पहुंची.

सुरक्षा की जांच भी की गयी. इस बीच सुबह लगभग 9.30 बजे विस्फोट स्थल से चंद कदम की दूरी पर किलाेमीटर संख्या 477/33.34 के समीप दूसरा विस्फोट हुआ. बताया जाता है कि यहां पटरी की जांच के के क्रम में हुए विस्फोट की चपेट में पेट्रोलिंग पार्टी के दो रेलकर्मी आ गये. इसमें एक की मौत हो गयी. रविवार की शाम भी नक्सलियों की ओर से यहां विस्फोट को अंजाम दिये जाने की बात सामने आयी है.

सुरक्षा की मॉनिटरिंग भगवान भरोसे… घटना की जवाबदेही तय करने की मांग  

अब सवाल यह उठाया जा रहा है कि नक्सली बंद में सुरक्षा उपायों की मॉनिटरिंग रेलमंडल में कौन कर रहा था? आरपीएफ की टीम को कहां से दिशा-निर्देश मिल रहे थे? नक्सली बंद को लेकर जिला पुलिस के साथ आरपीएफ ने तालमेल बनाकर सुरक्षा के क्या उपाय किये थे ? विस्फोट की सूचना के बाद सुरक्षा बल की और क्या-क्या एहतियाती उपाय किये गये? बिना पूरी जांच के पेट्रोलिंग पार्टी को लाइन पर कैसे रवाना कर दिया गया?

शशि मिश्रा, डिवीजनल को-ऑर्डिनेटर, SERMC

दक्षिण पूर्व रेलवे मेंस कांग्रेस के मंडल संयोजक शशि मिश्रा ने इसे सुरक्षा की गंभीर चूक बताते हुए रेलकर्मियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने और घटनाक्रम की जबावदेही तय करने की मांग रेल प्रशासन से की है.

नक्सलियों की चेतावनी नजरअंदाज, RPF कमांडेंट पहुंच गये थे टाटानगर !  

नक्सली बंद और नक्सलियों की चेतावनी को RPF ने कितनी गंभीरता से लिया इसकी झलक कमांडेंट पी शंकर कुट्टी के निरीक्षण दौरे से हो जाती है. एक सप्ताह के नक्सली बंद और 3 अगस्त के पांच राज्यों के बंद के बीच शनिवार को RPF के सीनियर कमांडेंट चक्रधरपुर मुख्यालय में नहीं थे. उन्होंने इस दौरान टाटानगर निरीक्षण का कार्यक्रम तय कर लिया था.

चक्रधरपुर आरपीएफ के सीनियर कमांडेंट

आरपीएफ के लोगों का कहना है कि कमांडेंट साहब अक्सर टाटा अथवा राउरकेला में निरीक्षण कार्यक्रम शनिवार को ही बनाते है और रविवार को ही मुख्यालय वापस लौटते हैं. आरपीएफ के सूत्रों की माने तो करमपदा सेक्शन में नक्सली बैनर लगाये जाये और ब्लास्ट की सूचना कमांडेंट को टाटा में ही मिली. सुबह 9.30 बजे दूसरा विस्फोट और एक रेलकर्मी की मौत की सूचना भी उन्हें टाटानगर में ही मिली. हालांकि दोपहर बाद कमांडेंट टाटानगर से चक्रधरपुर मुख्यालय के लिए रवाना हुए.

नक्सली घटना के बाद कमांडेंट की गंभीरता पर स्वयं आरपीएफ के लोग ही सवाल उठा रहे है. कई वरीय इंस्पेक्टरों ने रेलहंट से बातचीत में कहा कि सुरक्षा व व्यवस्था को लेकर ऐसी स्थिति पहले कभी नहीं आयी थी. ऐसा प्रतीत होता है कि चक्रधरपुर डिवीजन में RPF नेतृत्व विहीन व पंगु हो चुका है!

विस्फोट में चली गयी जान 58 साल के रेलकर्मी की मौत, पत्नी का रो-रोकर बुरा हाल 

माओवादी विस्फोट में रेलकर्मी एतवा उरांव की मौत के बाद उसके घर में मातम का माहौल है. बिमलगढ़ स्थित एतवा ओराम के रेलवे क्वार्टर के सामने पत्नी की रुदन से पूरा माहौल गमगीन था. रेलकर्मियों का कहना है कि माओवादी बंदी के बावजूद 58 साल के बुजुर्ग को रेल प्रशासन ने माओवादियों का सामना करने के लिए निहत्थे बिना सुरक्षा जंगल में छोड़ दिया. नतीजा है कि एक परिवार बेसहारा हो गया.

रेलहंट का प्रयास है कि सच रेल प्रशासन के सामने आये. ऐसे में अगर किसी को यह लगता है उसकी बात नहीं सुनी जा रही है तो वह अपना पक्ष whatsapp 9905460502 पर भेज सकते है, उसे पूरा स्थान दिया जायेगा. 

Spread the love

अभी अभी

You May Also Like

न्यूज हंट

59 महीने बाद महानिदेशक लेखापरीक्षा ने लिया संज्ञान, डिवीजन में चल रहे गोलमाल की खुली पोल  SSE/P.WAY/DDU South और North की मिलीभगत से हुआ...

आरपीएफ-जीआरपी

BHOPAL. जबलपुर सीबीआई की टीम ने गुरुवार देर रात सागर में कार्रवाई करते हुए DyCE-II/Con/WCR को एक लाख रुपए की रिश्वत लेते रंगे हाथ...

आरपीएफ-जीआरपी

SER आईजी के मौन ने सिस्टम को बद से बदतर बनाया, सफेद हाथ बनकर रह गये CIB-SIB-IVG ASC/ROU अग्निदेव प्रसाद का आंध्र प्रदेश के...

रेल यूनियन

पूर्व रेलवे के पीसीएसटी से मिले यूनियन नेता, लंबित मांगों पर हुई लंबी वार्ता  KOLKATA. इंडियन रेलवे सिग्नल एंड मेंटेनर्स यूनियन (IRSTMU) ने 8वे...