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चक्रधरपुर डिवीजन ने जिस फर्म को किया प्रतिबंधित, टाटानगर में उसे ही टेंडर देने की तैयारी

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  • 1.88 करोड़ के क्लीनिंग कार्य के लिए इलेक्ट्रिक लोको शेड में निविदा फाइनल करने की चल रही प्रक्रिया 

चक्रधरपुर. रेल प्रशासन ने विभिन्न आरोपों की जांच-पड़ताल के बाद कार्य में अनियमितता को लेकर बिलासपुर की फर्म मेसर्स गणेश प्रसाद सिंह को दो साल के लिए डिबार (प्रतिबंधित) कर दिया है. चक्रधरपुर रेल मंडल के सीनियर डिवीजनल मेकेनिकल इंजीनियर के कार्यालय से जारी पत्र में फर्म को किसी प्रकार का ठेका लेने से दो साल के लिए प्रतिबंधित किया गया है. फर्म गणेश प्रसाद सिंह पर दो साल के लिए पाबंदी लगाने का पत्र 09 मई 2022 को जारी किया गया. यह प्रतिबंध 11.04.2024 तक के लिए लगाया गया है.

दूसरी ओर उसी फर्म को टाटानगर में क्लीनिंग कार्य का ठेका देने की तैयारी भी चल रही है. जानकारी के अनुसार चक्रधरपर डिवीजन के टाटानगर इलेक्ट्रिक लोको शेड में 1.88 करोड़ रुपये की निविदा निकली गयी है जो दो साल के लिए सफाई कार्य की है. बताया जाता है कि निविदा फाइनल करने की प्रक्रिया अंतिम चरण में है. इस निविदा के फाइनेंशियल बीड में डिबार्ड की गयी बिलासपुर की फर्म मेसर्स गणेश प्रसाद सिंह एल-वन श्रेणी आयी है.

रेलवे की व्यवस्था के अनुसार टेंडर में जिस फर्म को एल 1 में सूचीबद्ध किया जाता है उसी के नाम एकरारनामा करने का आदेश निर्गत किया जाता है.  ऐसी स्थिति में रेलवे महकमे में यह सवाल तैर रहा है कि डिवीजन में दो साल के लिए डिबार्ड की गयी फर्म को टाटानगर में टेंडर कैसे दिया जा रहा है? रेलवे महकमे में ही इस फर्म केा टेंडर दिये जाने की कहानी भी तैर रही है. बताया जा रहा है कि संबंधित विभाग के अधिकारी नियमों की अपने तरह से व्याख्या कर इस फर्म के लिए रास्ता बना रहे हैं ताकि उसे एल-1 के आधार पर टेंडर दिया जा सके. 

इसके लिए आधार यह बनाया जा रहा है कि यह फर्म को डिबार करने की तिथि से पहले ही निविदा खोली जा चुकी है जिसमें बिलासपुर के फर्म एल-1 रही है. अब यहां दिलचस्प है कि जिस एजेंसी को चक्रधरपुर डिवीजन में क्लीनिंग कार्य में लापरवाही को लेकर ही दो साल के लिए बैन किया गया है क्या उसे क्लीनिंग कार्य का ही टेंडर अगले दो साल के लिए किसी अन्य स्टेशन पर दिया जा सकता है? अगर ऐसा होता है तो डिबार्ड (प्रतिबंध) का क्या मतलब रह जायेगा. हालांकि इस विषय को लेकर रेलवे अधिकारी भी मंथन कर रहे हैं.

जिस एजेंसी को चक्रधरपुर डिवीजन में क्लीनिंग कार्य में लापरवाही को लेकर ही दो साल के लिए बैन किया गया है क्या उसे क्लीनिंग कार्य का ही टेंडर अगले दो साल के लिए किसी अन्य स्टेशन पर दिया जा सकता है? अगर ऐसा होता है तो डिबार्ड (प्रतिबंध) का क्या मतलब रह जायेगा.

टाटानगर इलेक्ट्रिक लोको शेड में सफाई कार्य के इस टेंडर पर अंतिम निर्णय #srdeetrstata सीनियर डीईई/टीआरएस/टाटा को लेना है. बताया जाता है कि इससे पहले भी चक्रधरपुर डिवीजन में ऐसी ही परिस्थिति उत्पन्न हो चुकी है जिसमें प्रतिबंधित फर्म के साथ एकरारनामा को रद्द कर दिया गया है. यहां यह बताना होगा कि इस निविदा में तीन फर्म ने हिस्सा लिया था. इसमें एल-1 बिलासपुर की फर्म मेसर्स गणेश प्रसाद सिंह रही है. जबकि एल-2 में  दिवाकर शर्मा और पवन शर्मा की फर्म है. यहां अभी पवन शर्मा की फर्म ही सफाई कार्य कर रही है.

#clenning_work_tatanagar #Deebar agency

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