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खराब परफॉर्मेंस बताकर चलता किये गये रेलवे के 6 बड़े अधिकारी, दी गयी अनिवार्य सेवानिवृत्ति

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NEW DELHI. रेलमंत्री अश्विनी वैष्णव ने 52 हफ्तों में 52 सुधारों की घोषणा की थी, लेकिन कई जोन से लेकर डिवीजन तक यह मजाक बनकर रह गयी है. रेलवे में बढ़ रहे भ्रष्टाचार में पूरा तंत्र संलिप्त नजर आ रहा. वर्षों से रोटेशन-पालिसी को कड़ाई से लागू करने की बात तो कही जाती है लेकिन डिवीजन से लेकर जोन तक के अधिकारी इसकी लगातार अनदेखी कर रहे. कभी प्रशासनिक रुचि तो कभी दूसरे तर्क देकर अपने निर्णय को सही ठहराने का प्रयास किया जा रहा.

Rotation के नाम पर कुछ नहीं हो रहा है. जिसकी लाठी उसकी भैंस की की तर्ज पर कंट्रोल आर्डर पर ही तबादलों की बाढ़ लायी गयी है. आला अधिकारी तमाशबीन बने हुए है. सालों से एक ही स्थान पर घुमा-फिराकर लोगों को पोस्टिंग दी जा रही है. जुगाड़ और भ्रष्टाचार की परकाष्ठा के बीच रेलवे ने खराब परफॉर्मेंस बताकर 6 बड़े अधिकारियों को अनिवार्य रिटायरमेंट दे दिया है.

रेलवे ने 32 अधिकारियों को किया जबरन रिटायर, सर्विस रिव्यू वाले कर्मचारियों में दहशत

यह कार्रवाई भारतीय रेलवे स्थापना संहिता (IREC) के नियम 1802(ए) के तहत की गई है, जो कि रेलवे को सार्वजनिक हित में अधिकारियों को समय से पहले सेवा से हटाने का अधिकार देता है. यह एक्शन कार्य दायित्व में खराब प्रदर्शन को लेकर की लिया गया है. कहा तो यहां तक जा रहा कि अधिकारियों के स्वार्थ और लालच के कारण नुकसान रेलवे की छवि का हो रहा था.

रिटायरमेंट पर भेजे गए अधिकारी अहम और ऊंचे ओहदे की जिम्मेदारी निभा रहे थे. सीएमई/प्रोजेक्ट/मुख्यालय, उत्तर रेलवे, एनएफ-एचएजी/आईआरएसएमई, दक्षिण पश्चिम रेलवे, SG/IRSI, दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे, SC/IRSI, पूर्वी रेलवे, ग्रेड-1 (अंडर सेक्रेटरी/डिप्टी डायरेक्टर), RBSS, और PPS, RBSS शामिल है.

इन्हें दी गयी अनिवार्य सेवानिवृत्ति 

  • सीएमई/प्रोजेक्ट/मुख्यालय, उत्तर रेलवे
  • एनएफ-एचएजी/आईआरएसएमई, दक्षिण पश्चिम रेलवे
  • SG/IRSI, दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे
  • SC/IRSI, पूर्वी रेलवे
  • ग्रेड-1 (अंडर सेक्रेटरी/डिप्टी डायरेक्टर), RBSS
  • PPS, RBSS

रेलवे की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि कार्रवाई को रेलवे के भीतर जवाबदेही और कार्यकुशलता को मजबूत करने की दिशा में उठाये गये कदम के रूप में देखा जाना चाहिए. नियम 1802(ए) का इस्तेमाल उन कर्मचारियों के खिलाफ किया जाता है, जिनका प्रदर्शन निर्धारित मानकों के अनुरूप नहीं होता है.

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार इस सख्त कदम जरिए रेलवे प्रशासन ने अपने कर्मचारियों और अधिकारियों को साफ मैसेज दिया है कि किसी भी लेवल पर लापरवाही, अक्षमता या कमजोर प्रदर्शन को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा. साथ ही, सभी अधिकारियों और कर्मचारियों से ये उम्मीद की गई है कि वे अपनी ड्यूटी का निर्वहन पूरी जिम्मेदारी और ईमानदारी के साथ करें.

यह कदम रेलवे के अंदर अनुशासन और बेहतर कामकाज सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास माना जा रहा है. भारतीय रेलवे में अधिकारियों (Officers) को हटाने यानी सेवा से निकालने, निलंबित करने या जबरन रिटायर करने के लिए स्पष्ट नियम बनाए गए हैं. ये नियम मुख्य रूप से केंद्रीय सरकारी सेवा नियमों के तहत आते हैं, क्योंकि रेलवे कर्मचारी केंद्र सरकार के कर्मचारी होते हैं.

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