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युवा जगत : चुनावी मुद्दों में कहां है पशुधन !!

अमितेश कुमार ओझा

कुछ महीने पहले हमारे राज्य पश्चिम बंगाल समेत कई प्रदेशों में विधानसभा के चुनाव हुए ,जिसमें विभिन्न राजनीतिक पार्टियों द्वारा विभिन्न प्रकार के चुनावी मुद्दे लेकर पार्टियां चुनावी मैदान में उतरी. किसी ने युवाओं को प्राथमिकता दी तो किसी ने महिलाओं को . इन्हीं चुनावी मुद्दों के बीच टीएमसी पार्टी द्वारा पश्चिम बंगाल में सरकार का गठन किया गया . दूसरे राज्यों में भी सरकारें गठित हो गई . लेकिन इन चुनावी मुद्दों में मुझे कहीं भी किसी निरीह पशु या किसी पशु से संबंधित विषय की बातें कही नजर नहीं आयी .

अमितेश कुमार

आखिर सरकार सिर्फ मनुष्य के जीवन को ध्यान में रखते हुए जल ,सड़क ,बिजली जैसे विषय पर ही अपनी ध्यान देती रहेगी , तो फिर असहाय जीव जंतुओं को ध्यान रखने की जिम्मेदारी आखिर किसकी है ? . सरकार चाहे तो अपने मुद्दों में सड़क पर रहने वाले पशुओं के लिए हॉस्पिटल ,खाना की नियमित व्यवस्था, वैक्सिनेशन जैसे विषय को भी अपने मुद्दो में शामिल कर इन विषय पर भी ध्यान दे सकती है . क्योंकि इसके अभाव में ये बेचारे आजीवन दारुण कष्ट झेलने को अभिशप्त हैं .

अभी कुछ दिन पहले इलाहाबाद हाईकोर्ट द्वारा गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित करने को केंद्र सरकार को निर्देश दिया गया. लेकिन अभी उत्तर प्रदेश के अधिकांश किसान सड़क पर घूमने वाले सांड,गाय ,नील गाय जैसे पशुओं से बेहद परेशान हैं . किसानों द्वारा लगाए गए फसल का अधिकतर भाग इन पशुओं द्वारा नष्ट कर दिया जाता है . मेरे कहने का तात्पर्य यह कि माननीय उच्च न्यायालय के निर्देशों का पालन करते हुए इन गायों के लिए गौ शालाऔर पशु अस्पताल में अच्छे इलाज जैसे मामलों पर भी ध्यान देना जरूरी है . भविष्य में अगर चुनावी मुद्दों में इन सभी निरीह पशुओं के जीवन से संबंधित विषय का भी जिक्र हो तो शायद देश के पशु प्रेमियों में उस पार्टी के प्रति एक रुचि जगेगी .

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