- छह LP(G) के म्यूचुअल ट्रांसफर पर रोक का नहीं आया आदेश, चालकों में आक्रोश के फूटे स्वर
- पदोन्नति पोस्टिंग में अनियमितता के बाद म्यूचुअल ट्रांसफर करके फिर से चर्चा में “Sr.DEE (OP)
- चार्जशीट जारी करने के कई रिकार्ड टूटे, सात माह बाद भी शराबखोरी कांड की पूरी नहीं हुई जांच !
CKP/KOL. कहते हैं ना कि नेचर और सिग्नेचर कभी बदलता नहीं है और यह अकाट्य सत्य भी है कि कुत्ते के पूंछ में कितना भी घी लगा दिया जाए वह कभी सीधी नहीं हो सकती. इन दिनों यही हाल हो गया है चक्रधरपुर रेलमंडल के रनिंग विभाग (ओपी) का. यहां कर्मयोगी रेल चालक सिस्टम की नियति मानकर सालों से ब्रांच लाइन से मेन लाइन में आने को प्रतीक्षारत है तो दूसरी ओर यूनियन के चाटूकार नेता और भ्रष्ट अफसर से मिलीभगत कर कुछ लोको पायलट सर्वशक्तिमान साबित करते हुए येन-केन-प्रकरेण (म्यूचुअल ट्रांसफर) मेन लाइन के स्टेशनों पर काबिज हो जा रहे हैं.

वर्तमान में इस ओपी विभाग के प्रमुख एसके मीना पूर्व में चक्रधरपुर मंडल में ही टीआरडी विभाग के प्रमुख थे. टीआरडी विभाग के प्रमुख रहते एसके मीना ने विभाग के ही कर्मयोगी कर्मचारी रामना का तबादला डांगुवापोसी कर विकोटिकृत मानसिकता का दर्शन कराया था. चापरासी रामना का तबादला वहां किया गया जहां चपरासी का पद ही नहीं था. तब यह बात चर्चा में आयी कि साहब के घर में काम करने से इंकार करने की सजा रमना को मिली. हालांकि बाद में दबाव देकर रमना से स्वीकृति दर्ज करा ली गयी.
खैर कर्मयोगी रमना को तत्कालीन डीआरएम अरुण जतोह राठौर से भी न्याय नहीं मिला, जाने उनकी कहानी … करें (क्लिक)
टीआरडी से ओपी में आने के बाद बतौर विभागीय प्रमुख एसके मीना ने एक से डेढ़ साल के कार्यकाल में ऐसा कोई सकारात्मक सुधारात्मक कदम नहीं उठाया है कि इन्हें ईमानदार कहा जा सकें लेकिन इन्होंने अपने कुकृत्यों से व्यवस्था को शर्मशार करने में कोई कोर कसर नहीं रख छोड़ी है. ALP से LP(G) की पदोन्नति पोस्टिंग में लेन-देने के आरोपों के बीच डीआरएम को स्वयं हस्तक्षेप करना पड़ा. पुरानी सूची रद्द कराकर नयी सूची जारी करायी गयी. इस घटना के बाद Sr.DEE (OP) एसके मीना का प्री-मेच्योर तबादला भी हुआ, लेकिन इसके बाद उन्होंने कुछ ऐसा कर दिया जो आम तौर पर कोई बड़ा अफसर नहीं करता है.
खुद का ट्रांसफर आदेश जारी होने के बाद भी बड़ा नीतिगत निर्णय लेते हुए सालों से बंद ‘म्यूचुअल ट्रांसफर’ का आवेदन लेकर 24 घंटे में ही छह LP(G) को मनपसंद पोस्टिंग दे दी. ऐसा कर एक तरह से उन्होंने डीआरएम आदेश को ही चुनौती दी. इससे पहले कि Sr.DEE (OP) अन्य चहेते लोको पायलटों को ‘म्यूचुअल ट्रांसफर’ का फायदा दे पाते डीआरएम ने मीडिया में आयी खबरों के बाद हस्तक्षेप किया और 04.02.2026 को Sr.DPO ने तत्काल प्रभाव से सभी तरह के विभागीय ‘म्यूचुअल ट्रांसफर/लॉबी ट्रांसफर’ पर रोक लगा दी. हालांकि इस आदेश में यह स्पष्ट नहीं किया गया है Sr.DEE (OP) द्वारा पूर्व में ‘म्यूचुअल ट्रांसफर’ के नाम पर छह लोको पायलटों की पोस्टिंग को रद्द किया गया है अथवा नहीं ?
ओपी में सबसे अधिक रिकार्ड चार्जशीट भी Sr.DEE (OP) के कार्यकाल में जारी किये गये. लेकिन अधिकांश मामले बीच में ही निबटा दिये गये. इसमें एमसीएल (सरडेगा) रनिंग रूम का चर्चित शराबखोरी कांड भी शामिल है. किसी भी रनिंग रूम में बाहर से खाद्य अथवा पेय पदार्थ ले जाने पर रोक है. बावजूद रनिंग रूप में शराब को शीतल पेय बताकर जांच आगे बढ़ी लेकिन लोको पायलटों और सुरक्षा से जुड़े इस गंभीर मामले की जांच आश्चर्यजनक रूप से सात माह बाद भी पूरी नहीं हो सकी है.
इसका एक आरोपी Sr.DEE (OP) का चहेता बताया जाता है. जो झारसुगुड़ा में बालू-सीएमएस टेंडर मैनेज करता है और ठेकेदार व Sr.DEE (OP) के बीच की कड़ी है. यह रेलवे मेंस यूनियन से जुड़ा है और मंडल संयोजक एमके सिंह का करीबी बताया जाता है. यूनियन के किसी ब्रांच का पदाधिकारी नहीं होते हुए भी अमूमन उसे हर ब्रांच मीटिंग अथवा डिवीजन दौरे के लिए यूनियन की ओर से स्पेयरिंग सूची में शामिल किया जाता रहा है!
विभाग में चर्चा तो यहां तक है कि Sr.DEE (OP) ने इस लोको पायलट को सरडेगा रनिंग रूम के केयरटेकर बनाकर खूब फायदा पहुंचाया. दो-दो आईडी से इसने झारसुगुड़ा और सरडेगा में ड्यूटी दिखायी. इसका खुलासा रेलहंट ने पूर्व में किया था. जब सरडेगा रनिंग रूम में आग लगी और मामला गंभीर हो गया तब इस लोको पायलट को सीनियर डीईई ने अपने प्रभाव का इस्तेमाल कर जांच से ही बाहर कर दिया. इसके बाद उसकी जगह दूसरे सीसी को बली का बकरा बना चार्जशीट थमा देने की बात कही गयी. कहां तो यहां तक जाता है कि Sr.DEE (OP) ने सिस्टम की खामियों को उजागर करने वाले लोको पायलटों को टार्गेट करते हुए नियमों के विपरीत जोन से बाहर अधिकारियों को भेजकर जांच के नाम पर अनैतिक तरीके से सजा तय करायी.
पिछले दिनों रेलमंडल में कुछ ट्रेन चालकों का म्यूचुअल ट्रांसफर हुआ है. यह अच्छी पहल है. इस मामले में AILRSA ने एक प्रयास शुरू किया है कि इस सेवा/सुविधा का लाभ अन्य ट्रेन चालकों भी मिले. ताकि लंबे समय से दूर दराज क्षेत्र में कार्य कर रहे रनिंग कर्मचारियों को अपने निजी स्थान पर कार्य करने का मौका मिले.
केपी मुंडा, मंडल सचिव, AILRSA
म्यूचुअल ट्रासंफर से SERMU संगठन का कोई रिश्ता नहीं है. रेलवे प्रशासन जो भी निर्णय लेता है वो निर्णय अगर रेल कर्मियों के हित में है तो हम उसे सपोर्ट करते है. हमारा संगठन भ्रष्टाचार का विरोध करता है और आगे भी करता रहेगा.
एमके सिंह, मंडल संयोजक, SERMU
अपने कार्यकाल में Sr.DEE (OP) ने हर उस कर्मचारी पर पूरा ध्यान रखा जो उनकी कसौटी पर खरे उतरे. सीसी कार्यकाल खत्म होने के बाद भी कई लोग छह माह से साल भर तक उसी स्थान पर कार्य करते रहे. बाद में Sr DPO ने इसके लिए आदेश जारी किया. एक लोको पायलट तो बिना मान्य क्राइटेरिया पूरी किये (किलोमीटर) ही सीसी बना और तीन टर्म से अधिक बार यह जिम्मेदारी निभा चुका है. यह जांच का विषय है. हालांकि ओटी का पेमेंट समय पर बिना किसी कटौती के कराने का अच्छा रिकार्ड भी एसके मीना के ही नाम है. रनिंग रूम में क्षमता से अधिक वाहन का टेंडर भी इन्होंने कराया लेकिन कई रनिंग रूम में केयर टेकर और चीएफ क्रू कंट्रोलर से मिलीभगत कर ठेकेदार खटारा वाहनों का परिचालन कर रहे. ऐसा कर चालकों की जान जोखिम में डाला जा रहा है. विस्तृत रिपोर्ट शीघ्र …
ऐसा भी नहीं है वरीय पदाधिकारी इन मामलों से अवगत नहीं है. दक्षिण पूर्व रेलवे के PCEE सभी जानकारी के बाद भी किंकर्तव्यविमूढ़ बने हुए हैं तो समझा जा सकता है कि विभाग की यथास्थिति क्या होगी! यानि व्यवस्था राम भरोसे चल रही. चालकों में व्याप्त असंतोष किसी बड़ी दुर्धटना को निमंत्रण दे रहा है, यह कहना कोई अतिशयोक्ति नहीं होगी.
रेलहंट का प्रयास है कि सच रेल प्रशासन के सामने आये. ऐसे में किसी को अपना पक्ष रखना है तो whatsapp 9905460502 पर भेज सकते है, पूरे सम्मान के साथ उसका संज्ञान लिया जायेगा.













































































