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KGP DIV : स्टेशन मास्टर और ट्रेन मैनेजर में तकरार, चार्ज देने से पहले ही रिलीव दिखा दिये गये गार्ड साहब !  

  • राखामाइंस स्टेशन पर 12 घंटे से अधिक ड्यूटी के बाद भी रिलीफ नहीं करने पर हुआ विवाद 
  • स्टेशन मास्टर बिना वर्दी के पहुंचे थे ड्यूटी, आम व्यक्ति की तरह कार्यों का कर रहे थे निष्पादन 

KHARAGPUR. दक्षिण पूर्व रेलवे के खड़गपुर रेलमंडल स्थित राखामाइंस रेलवे स्टेशन पर ट्रेन मैनेजर और स्टेशन मास्टर के बीच तकरार हो गयी. घटना शनिवार सुबह की है. ट्रेन मैनेजर का आरोप था कि 12 घंटे से अधिक ड्यूटी करने के बाद भी स्टेशन मास्टर ने उन्हें रिलीफ नहीं किया. हालांकि बाद में चार्ज देने से पहले ही उसे रिलीफ कर दिया गया.

इस घटना का वीडियो वायरल हो गया है जिसे एक ऑनलाइन चैनल पर देखा जा सकता है. वायरल वीडियो में स्टेशन मास्टर और ट्रेन मैनेजर के बीच तू-तू-मैं-मैं हो रही है. इस मामले में गौरतलब बात यह है कि वीडियो में स्टेशन मास्टर की कुर्सी संभाल रहा अधिकारी सामान्य ड्रेस में हैं. वह स्टेशन मास्टर के कार्यों का निष्पादन करते भी दिख रहे.

रेलवे के सूत्रों की माने तो दिखायी पड़ रहे स्टेशन मास्टर अक्सर बिना यूनिफॉर्म के ही ड्यूटी पर होते हैं. इन्हें यूनिफॉर्म में तभी देखा जाता है जब किसी अधिकारी का दौरा होता है. सूत्रों का यह भी कहना है कि वीडियो में दिख रहे स्टेशन मास्टर का बीते 20 अगस्त को एक मेमू ट्रेन के डिरेलमेंट के बाद राखा माइंसस्टेशन पर तबादला किया गया था.

यहां सवाल यह उठाया जा रहा है कि रेलवे बोर्ड की गाइडलाइन के अनुसार रनिंग स्टाफ की ड्यूटी ऑन से साइन ऑफ तक 11 घंटे से अधिक नहीं होनी चाहिए. लेकिन रनिंग ड्यूटी नौ घंटे से अधिक नहीं लेना है जो संरक्षा नियमों के अनुसार है. जबकि निर्धारित मानदंड के अनुसार नौ घंटे से अधिक ड्यूटी अत्यंत परिचालन अनिवार्यता होने पर ही ली जा सकती है जिसकी सूचना प्रशासन को नौ घंटे की समाप्ति के दो घंटे पूर्व रनिंग कर्मचारी को देनी होगी.

अनिवार्य परिचालन आवश्यकता को लेकर रेलवे बोर्ड के पत्रांक RB 120/2016 में बताया गया है कि यह दैविक आपदा, भूकंप, दुर्घटना, बाढ़, आंदोलन और उपकरणों की विफलता के समय ही प्रसांगित होगा. जबकि राखामाइंस स्टेशन पर घटित घटना के दौरान ट्रेन मैनेजर का आरोप है कि 12 घंटे पूरे होने के बाबजूद उन्हें अतिरिक्त ड्यूटी करने पर मजबूर किया गया ? यही नहीं उन्हें ड्यूटी से रिलीज पहले ही दिखा दिया गया है जबकि उस समय तक आगे की ड्यूटी के लिए ट्रेन मैनेजर ने चार्ज लिया ही नहीं था.

ऐसे में यह कहा जा रहा है कि ड्यूटी तो 12 घंटे से अधिक की ली जाती है लेकिन रेलवे बोर्ड के सेफ्टी गाडइ से बचाने के लिए ट्रेन मैनेजरों को पहले ही रिलीव दिखा दिया जाता है.

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