- चक्रधरपुर रेल मंडल में नहीं थम रहे हादसे, ग्रुप-डी रेलकर्मियों की जान खतरे में, जिम्मेदार कौन !
- ART में पदस्थापित ट्रैक मेंटेनर को डीएमटी मालगाड़ी में माल लोडिंग कार्य में लगाने पर उठे सवाल
CKP/TATA. चक्रधरपुर रेल मंडल में लापरवाही की घटनाएं लगातार ग्रुप-डी श्रेणी के रेलकर्मियों की जान पर भारी पड़ती नजर आ रही है. हाल के दिनों में एक के बाद एक सामने आ रहे हादसे इस बात की गवाही दे रहे हैं कि निचले स्तर के रेलकर्मियों से बिना पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था के जोखिम भरे कार्य कराए जा रहे हैं. इसका खामियाजा उन्हें गंभीर चोट, अपंगता और कभी-कभी अपनी जान गंवाकर चुकाना पड़ रहा है. राउरकेला के बाद अब डांगोवापोसी में एक हादसे में रेलकर्मी 10 फीट की ऊंचाई से गिरकर घायल हो गया. घटना बीते गुरुवार की है.
ग्रुप-डी में कार्यरत ट्रैक मेंटेनर मेघनाथ गोप डीएमटी मालगाड़ी में माल लोडिंग के दौरान करीब दस फीट की ऊंचाई से सीधे रेल पटरी पर गिर पड़ा. बताया जा रहा है कि इस जोखिम भरे कार्य में किसी भी प्रकार की सुरक्षा व्यवस्था उपलब्ध नहीं कराई गई थी. संतुलन बिगड़ने से वह कमर के बल नीचे गिर गया, जिससे उसे गंभीर चोटें आईं.
ROURKELA : रेलवे ओवरब्रिज पर बड़ा हादसा, नीचे से गुजर रही थी मालगाड़ी, … ऊपर लटका रहा रेलकर्मी
घायल रेलकर्मी मेघनाथ गोप डांगोवापोसी गवापोशी में ट्रैक मेंटेनर के पद पर कार्यरत है और एआरटी (एक्सीडेंट रिलीफ ट्रेन) टीम का सदस्य भी है, जिसका मुख्य कार्य रेल दुर्घटनाओं के दौरान राहत एवं बचाव कार्य करना होता है. बावजूद इसके उसे डीएमटी मालगाड़ी में माल लोडिंग जैसे अत्यंत खतरनाक कार्य में लगाया गया. हादसे के बाद सहकर्मियों ने उसे तत्काल नोवामुंडी स्थित टिस्को अस्पताल में भर्ती कराया, जहां उसका इलाज जारी है.
यह कोई पहली घटना नहीं है. इसी माह 8 तारीख को राउरकेला रेलवे स्टेशन के समीप आईओडब्लू विभाग में कार्यरत 56 वर्षीय ग्रुप-डी कर्मचारी नंदलाल लकड़ा को बिना किसी ट्रैफिक ब्लॉक और सुरक्षा उपकरण के फुट ओवर ब्रिज पर कार्य करने भेज दिया गया था. कार्य के दौरान वह ऊंचाई से गिरकर ओएचई लाइन की चपेट में आ गया, जिससे वह बुरी तरह झुलस गया. फिलहाल उसका इलाज राउरकेला स्थित इस्पात जनरल अस्पताल के बर्न यूनिट में चल रहा है. इस गंभीर घटना के बावजूद अब तक संबंधित अधिकारियों पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है.
चिंताजनक तथ्य यह भी है कि बीते कुछ महीनों में रेलवे ट्रैक पर पेट्रोलिंग के दौरान ट्रेन की चपेट में आकर करीब एक दर्जन रेलकर्मियों की मौत हो चुकी है. लगातार हो रहे इन हादसों के बावजूद रेलवे प्रशासन की चुप्पी और उदासीन रवैया कई सवाल खड़े कर रहा है.
रेल कर्मियों का कहना है कि जब तक इन मामलों में जिम्मेदार अधिकारियों पर सख्त और उदाहरणात्मक कार्रवाई नहीं होगी, तब तक इस तरह के हादसे रुकने वाले नहीं हैं. उल्लेखनीय है कि चक्रधरपुर रेल मंडल के डीआरएम जहां भ्रष्टाचार और अफसरशाही पर अंकुश लगाने के प्रयास कर रहे हैं, वहीं कुछ अधिकारियों की मनमानी और लापरवाही के कारण ग्रुप-डी कर्मचारी अपनी जान जोखिम में डालने को मजबूर हैं.
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर कब तक रेलवे प्रशासन की लापरवाही की कीमत निचले स्तर के रेलकर्मी अपनी जान देकर चुकाते रहेंगे.















































































