- कोचिंग ट्रेन में रात के समय 12 घंटे की ड्यूटी को लेकर सेफ्टी नियमों पर सहयोगियों ने उठाये सवाल
JAMSHAEDPUR. दक्षिण पूर्व रेलवे के टाटानगर से दुखद खबर आ रही है. यहां जनशताब्दी में ड्यूटी खत्म कर लॉबी लौट रहे लोको पायलट की अचानक तबीयत बिगड़ गयी. उन्हें अस्पताल ले जाया गया लेकिन इलाज के दौरान उनकी मौत हो गयी है. मौत का कारण हार्ट अटैक बताया जा रहा है. टाटा के लोको पायलट मेल/एक्सप्रेस निर्मल दास को अंतिम संस्कार के लिए लोको पायलट के ही ड्रेस में ले जाया गया. लोको पायलट के मृत्यु के कारणों को लेकर रेलवे अभी मौन है. निर्मल दास दिसंबर में ही सेवानिवृत्त होने वाले थे
निर्मल दास की ड्यूटी 27 अगस्त 2025 को 12021 एक्सप्रेस में थी. उन्हें TO 21.15 में बुक किया गया और वापसी BARBIL से 12022 में थी. ट्रेन विलंब थी और इस दौरान आफ ड्यूटी सुबह लगभग 9:00 बजे हुई. रेलकर्मियों कहना है कि रात में असुरक्षित रूप से ट्रेन परिचालन कराया गया. यह रेलवे बोर्ड के नियमों के विपरीत था और निर्धारित वर्किंग ऑवर के नियमों के भी खिलाफ.
लगभग 12 घंटे ड्यूटी के बाद ड्यूटी ऑफ करके जब वह बाइक स्टैंड की ओर लॉबी में जा रहे थे तभी बेहोश होकर गिर पड़े. उन्हें उल्टी हुई. इसके बाद आनन-फानन में निर्मल दास को सहयोगियों ने रेलवे अस्पताल पहुंचाया. यहां से उन्हें MEDITRINA अस्पताल रेफर किया गया. मेडिट्रिन अस्पताल ने जांच के बाद ब्रह्मानंद हॉस्पिटल रेफर कर दिया और रास्ते में ही दोपहर 15.30 बजे उनका निधन हो गया.
कोचिंग ट्रेन में 12 घंटे की ड्यूटी और वह भी पूरी रात सेफ्टी नियमों पर सवाल उठाती है. लोको पायलट की मौत और ड्यूटी आवर को लेकर रेल प्रशासन मौन है. रेलकर्मियों का कहना है कि बड़बिल जनशताब्दी में टाटा से बड़बिल और वापसी टाटा तक ड्यूटी होती है. लेकिन सेक्शन में मालगाड़ियों को दी जाने वाली प्राथमिकता ने बड़बिल जनशताब्दी जैसी ट्रेनों की भी दुर्दशा कर दी है. इससे लोको पायलट भी प्रभावित है लेकिन उनके लिए बोलने को रेलवे यूनियनें भी तैयार नहीं है. यह घटना भी इसी का नतीजा है.













































































