CKP DIVISION
- 26 अगस्त की रात राउरकेला रेलखंड के पानपोश और कुलुंगा रेलवे स्टेशनों के बीच 29 रिले हुए थे चोरी
- ट्रेन परिचालन बाधित होने से आरपीएफ की बढ़ी थी बेचैनी, जाल बिछाकर रेलकर्मी को किया गिरफ्तार
BANDAMUNDA. रेलवे के लोकेशन बॉक्स से लगातार हो रही रिले चोरी करने के मामले में बंडामुंडा आरपीएफ ने सिग्नल विभाग में एक रेलकर्मी को गिरफ्तार किया है. गिरफ्तार रेलकर्मी की पहचान राउरकेला सिग्नल विभाग में हेल्पर के पद पर कार्यरत सूरज बांदे के रूप में हुई है. यह बताया जा रहा है कि आरोपी सूरज बांदे पिछले कई महीनों से एक चोर गिरोह के साथ मिलकर रेलवे संपत्ति की चोरी को अंजाम दे रहा था.
आरोपी रेलवे ट्रैक किनारे मौजूद लोकेशन बॉक्स से रिले चोरी करने में वह चोर गिरोह को मदद करता था. बंडामुंडा और राउरकेला रेल खंड के कई हिस्सों से लगातार बड़ी संख्या में रिले चोरी की घटनाएं हो रही थीं, जिससे रेलवे संचालन और सुरक्षा पर गंभीर खतरा हो गया था. 26 अगस्त की रात राउरकेला रेलखंड के पानपोश और कुलुंगा रेलवे स्टेशनों के बीच स्थित लोकेशन बॉक्स से 29 रिले की चोरी ने आरपीएफ की नींद उड़ा दी थी. यह मामला राउरकेला आरपीएफ में दर्ज किया गया था. जांच के क्रम में सूरज बांदे की गिरफ्तारी हुई है.

आरपीएफ की गिरफ्त में सिग्नल का कर्मचारी
हालांकि इस मामले के उद्भेदन में बंडामुंडा आरपीएफ की भूमिका अहम रही. बडामुंडा आरपीएफ की टीम चोरी की घटना पार नजर रख रही थी. गुप्त सूचना पर आरपीएफ ने राउरकेला सिग्नल विभाग का हेल्पर सूरज बांदे को पकड़ा. आरपीएफ के अनुसार चोरी के इस पूरे गिरोह का मास्टरमाइंड यही है. आरपीएफ की पूछताछ में पहले तो सूरज ने टाल-मटोल की लेकिन सख्ती से पूछताछ में जुर्म कबूल कर लिया. आरपीएफ ने आरोपी के पास से चोरी किए गए रिले भी बरामद किए हैं.
गिरफ्तारी के बाद आरपीएफ ने सूरज बांदे को गुरुवार को राउरकेला कोर्ट में पेश किया. जमानत याचिका खारिज करते हुए उसे न्यायिक हिरासत में भेज दिया. आरोपी सूरज बांदे मूल रूप से झारखंड के पश्चिम सिंहभूम जिला अंतर्गत मनोहरपुर का निवासी है, लेकिन फिलहाल नौकरी के दौरान राउरकेला रेलवे कॉलोनी में रह रहा था.
जुलाई और अगस्त में हुई थी बड़ी चोरियां
उल्लेखनीय है कि पिछले जुलाई महीने में बंडामुंडा क्षेत्र से बड़ी मात्रा में रिले चोरी की घटना सामने आई थी. इसके बाद से ही आरपीएफ सक्रिय होकर आरोपियों की तलाश में जुटी थी. हाल ही में 26 अगस्त की रात राउरकेला रेलखंड के पानपोश और कुलुंगा रेलवे स्टेशनों के बीच स्थित लोकेशन बॉक्स से 29 रिले चोरी कर लिए गए थे. इस मामले में राउरकेला आरपीएफ ने अज्ञात आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू की थी. अब सूरज बांदे की गिरफ्तारी से इन मामलों की गुत्थी सुलझने की संभावना बढ़ गई है.
रेल संपत्ति की चोरी जैसी घटनाओं को गंभीर अपराध की श्रेणी में रखा जाता है, क्योंकि इससे ट्रेनों की सुरक्षा और संचालन सीधे प्रभावित होता है. गिरोह के पकड़े जाने पर आरपीएफ ने राहत की सांस ली है. माना जा रहा है कि गिरोह के अन्य सदस्यों की गिरफ्तारी भी जल्द हो सकती है.
एक रिले 15 हजार का, अब तक लाखों की चोरी
रेलवे सिग्नल का एक रिले अमूमन 15 हजार रुपये कीमत का आता है. सिग्नल प्रणाली के लिए अब इस रिले की चोरी से ट्रेनों के परिचालन में बाधा आती है और इससे हादसे भी संभव है. अब तक जो तथ्य सामने आये है उसके अनुसार यह चोरी लाखों की है और इस मामले की जांच भी गहराई से की जानी चाहिए. रेलवे सूत्रों के अनुसार रिले का उपयोग रेलवे सिग्नल में ही किया जा सकता है. ऐसे में यह जांच का विषय है कि अब तक चोरी किये गये रिले को कहां बेचा गया और इसका खरीदार कौन है?












































































