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ट्रेनों की लेट-लतीफी से हर दिन हजारों यात्री परेशान, रेलवे ने माल ढुलाई में फिर रचा कीर्तिमान !

  • 2025-26 में नवंबर तक एक अरब टन माल ढुलाई का आंकड़ा किया पार
  • SER) के सीकेपी डिवीजन में समय से चल रही ट्रेनें भी लड़खड़ाने लगती है

NEW DELHI. रेलवे की माने तो उसकी माल ढुलाई प्रदर्शन देश की आर्थिक रीढ़ को लगातार मजबूत कर रहा है. चालू वित्त वर्ष 2025-26 में 19 नवंबर तक कुल माल ढुलाई ने एक अरब टन का आंकड़ा पार कर लिया है. रेल मंत्रालय ने शनिवार को बताया कि इस दौरान कुल माल ढुलाई 102 करोड़ टन से अधिक रही. हां, यह अलग बात है कि यात्री ट्रेनों की पंक्चुअलिटी (Punctuality) का प्रतिशत चौकाने वाला रहा है. कुछ जोन में तो प्रीमियम ट्रेनों को छोड़ दे तो दूसरी ट्रेनें लगातार विलंब से चल रही है, खासकर उन जोनों में जो लोडिंग में नंबर वन बनने की हाेड़ में यात्री ट्रेनों के समय पालन को भगवान भराेसे छोड़ चुके है.

अगर दक्षिण पूर्व रेलवे (SER) और दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे (SECR) में ट्रेनों के समय पालन का आंकलन किया जाये जो जो स्थिति सामने आयेगी वह रेलवे के आला अधिकारियों को असहज करने के लिए काफी होगी. इसका बड़ा कारण यात्री ट्रेनों के घंटों से विलंब से चलना शामिल है.  दक्षिण पूर्व रेलवे (SER) के सीकेपी डिवीजन में तो स्थिति विस्फोटक होती जा रही है. यहां समय से चल रही ट्रेनें भी लड़खड़ाने लगती है. इसे लेकर यात्रियों के मौन आक्रोश के बीच नवंबर में पेश लोडिंग राजस्व का आकड़ा रेलवे की प्राथमिताओं को काफी कुछ स्पष्ट कर देता है.

रेलवे द्वारा जारी बयान में कहा गया, ‘यह उपलब्धि प्रमुख क्षेत्रों से व्यापक समर्थन को दर्शाती है. कोयला सबसे बड़ा योगदानकर्ता रहा, जिसकी मात्रा 50.5 करोड़ टन है. इसके बाद लौह अयस्क 11.5 करोड़ टन, सीमेंट 9.2 करोड़ टन, कंटेनर व्यापार 5.9 करोड़ टन, कच्चा लोहा और तैयार इस्पात 4.7 करोड़ टन, उर्वरक 4.2 करोड़ टन, खनिज तेल 3.2 करोड़ टन, खाद्यान्न तीन करोड़ टन, इस्पात संयंत्रों के लिए कच्चा माल लगभग दो करोड़ टन और अन्य माल 7.4 करोड़ टन रहा.’

 

बयान में कहा गया कि दैनिक माल ढुलाई लगभग 44 लाख टन पर मजबूत बनी हुई है, जो पिछले वर्ष के 42 लाख टन से अधिक है और यह बेहतर संचालन दक्षता और लगातार मांग को दर्शाता है.

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