- रेलवे ने किया दावा तो प्रशासन ने लगा दिया अपना बोर्ड
जबलपुर. सिविल लाइन में अरबों की एक जमीन को लेकर रेलवे व राज्य प्रशासन आमने-सामने हैं. रेलवे ने जमीन पर दावा जताया तो मध्य प्रदेश शासन ने आनन-फानन में जमीन पर अपना बोर्ड लगाकर दावा ठोंक दिया है. बर्न कम्पनी से वापस ली गई जमीन की कीमत 1.72 अरब रुपये बतायी जा रही है. यहां रेलवे के दावे के बाद प्रशासन ने अपना बोर्ड लगा दिया है.
यह जमीन पुराने आरटीओ के पास है. स्थानीय रांझी के तहसीलदार श्यामनंदन चंदेले ने मीडिया से बातचीत में दावा किया कि इस जमीन को लेकर कोई विवाद नहीं है बल्कि यह जमीन सरकार की है. यहां से पहले भी अतिक्रमण हटाया गया था. बरसात के बाद यहां शेष अतिक्रमण को भी हटा दिया जायेगा.
मालूम हो कि पश्चिम मध्य रेलवे की ओर से यहां पिलर्स लगाए थे. रांझी तहसील के अंतर्गत ब्लॉक नम्बर 23, प्लॉट नम्बर 1 व 2 की इस नौ एकड़ जमीन पर पहले अतिक्रमण था. जमीन को लेकर शासन और समदडिय़ा ग्रुप के बीच कानूनी विवाद था. मामला सुप्रीम कोर्ट तक गया. वहां से निर्णय प्रयाासन के पक्ष में आया. अब ब्रिटिश काल की बर्न कम्पनी की यह जमीन सरकार के कब्जे में आ गयी है.
118 साल पुराना बर्न कम्पनी की इस जमीन पर कई बंगले थे. कुछ समय पहले ही रेलवे ने यहां पीलर लगाकर जमीन पर दावा किया था. अब प्रशासन ने शनिवार 23 जुलाई को इस जमीन पर अपना बोर्ड लगाकर एकतरफा सरकार का दावा दर्ज करा दिया है. बोर्ड में उल्लेख है कि यह जमीन मध्यप्रदेश शासन की है. अब भी यहां 19 मकान है जिन्हें हटाने की बात कही जा रही है. ऐसा बताया जा रहा है कि प्रदेश शासन लोक परिसम्पत्ति प्रबंधन विभाग के माध्यम से इस जमीन की नीलामी करेगा.
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