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Bilaspur train accident से सबक… Loco Pilots को दिलायी सुरक्षा की शपथ, लाल बत्ती दिखी तो आगे नहीं बढ़ायेंगे ट्रेन

BILASPUR. लालखदान के पास हुए भीषण रेल हादसे के बाद रेलवे प्रशासन की नींद उड़ी हुई है. यहां एक ही पटरी पर कोरबा–बिलासपुर मेमू ट्रेन की खड़ी मालगाड़ी से हुई टक्कर में 11 यात्रियों की मौत हो गई जबकि 20 से अधिक लोग घायल हो गए. इस हादसे के बाद दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे ने बड़ा कदम उठाया है. सुरक्षा को लेकर बिलासपुर मंडल में चलने वाली सभी यात्री ट्रेनों के लोको पायलटों को विशेष प्रशिक्षण दिया गया.

लोगों पायलटों को बुलाकर यात्रियों की सुरक्षा की शपथ दिलाई गई. शपथ में कहा गया कि किसी भी परिस्थिति में सिग्नल की अनदेखी नहीं करेंगे. पटरी पर रेड लाइट दिखी तो ट्रेन आगे नहीं बढ़ायेंगे.  रेलवे अफसरों ने लोको पायलटों को नियमों के सख्त पालन और सतर्कता बरतने के निर्देश दिए हैं. साथ ही हादसों की पुनरावृत्ति रोकने के लिए ट्रेन संचालन से जुड़ी तकनीकी खामियों की समीक्षा भी शुरू कर दी गई है.

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दुर्घटना की चल रही जांच के बीच रेलवे ने मानवीय भूल को सुधारने के उपायों पर भी काम शुरू कर दिया है. सुरक्षा की शपथ इसका एक रूप माना जा रहा. रेल प्रशासन का प्रयास है कि सबसे ज्यादा आय अर्जित करने वाले दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे जोन को हादसों के नाम पर हो रही बदनामी को रोका जा सकेगा.

बिलासपुर हादसे के बाद रेलवे के सुरक्षा इंतज़ाम और तकनीकी व्यवस्था सवालों के घेरे में हैं. यह बड़ी लापरवाही का बड़ा उदाहरण माना जा रहा है. कहा तो यहां तक जा रहा कि कमाई के आंकड़ा ऊंचा रखने में यात्री सुरक्षा को पूरी तरह ताक पर रख दिया गया है. रखरखाव के नाम पर लगातार चल रहे ब्लॉक और यात्री ट्रेनों को रद्द करने की कवायद के बावजूद रेलवे सुरक्षित रेल प्रशासन सुनिश्चित कराने में पूरी तरह विफल रहा है. इसका खामियाजा इस हादसे में निर्दोष यात्रियों को जान देकर उठाना पड़ा है.

प्रयागराज मंडल में बीते माह ही शपथ बेल की शुरुआत 

उत्तर मध्य रेलवे के प्रयागराज मंडल ने में बीते माह अक्टूबर 2025 में ही एक नई पहल की है. प्रयागराज लॉबी में सिग्नल शपथ बेल यंत्र का शुभारंभ किया गया है. यह यंत्र ट्रेन चलाने से पहले लोको पायलटों को सिग्नल अवलोकन और पालन की शपथ दिलाकर उनकी जिम्मेदारी और सजगता याद दिला रहा है. इस व्यवस्था में यंत्र के समक्ष लोको पायलट ड्यूटी लेने पर से पहले सिग्नल शपथ दोहराते है और सुरक्षित संचालन के प्रति अपनी प्रतिबद्धता जताते है. सिग्नल शपथ बेल यंत्र पूरी तरह मोशन सेंसर आधारित है.

यह भी पढ़ें : CRS की प्रारंभिक जांच का फोकस ओवरस्पीड और सिग्नल ओवरशूट, बड़ा सवाल …क्या तय होगी जिम्मेदारी !

मोशन सेंसर स्पीकर, मोशन सेंसर कैमरा, पीतल का घंटा और अत्याधुनिक डिजिटल संदेश पटल यहां लगाया गया है. लोको पायलटों को प्रत्येक प्रस्थान से पहले इस यंत्र के सामने खड़े होकर सिग्नल शपथ लेनी होगी. जैसे ही कर्मी यंत्र के सामने आएंगे, मोशन सेंसर की घंटी बजेगी और शपथ संदेश प्रसारित होगा. इसमें बताया जाता है कि मैं शपथ लेता हूं कि अनाधिकृत रूप से लाल सिग्नल पार नहीं करूंगा. कहा जा रहा है कि इससे सिग्नल पालन की मानसिक तैयारी और जिम्मेदारी की भावना को मजबूत किया जा रहा है.

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