- लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को पत्र देकर मामला सदन की याचिका समिति को सौंपने का आग्रह
- 30 घंटे के साप्ताहिक विश्राम में 16 घंटे के दैनिक विश्राम को भी शामिल करने को लेकर है आक्रोश
New Delhi. लोको पायलट यूनियन ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को पत्र लिखकर उनसे रेल प्रशासन के साथ उनके (रेल चालाकों) विश्राम के घंटों को लेकर जारी विवाद को निचले सदन की याचिका समिति को सौंपने का आग्रह किया है. लोको पायलट यूनियन ने चेतावनी दी कि यदि इस मुद्दे का समाधान नहीं किया गया तो वे देशव्यापी हड़ताल करेंगे. ‘ऑल इंडिया लोको रनिंग स्टाफ एसोसिएशन (ए.आई.एल.आर.एस.ए.) और रेल प्रशासन के बीच साप्ताहिक विश्राम घंटों को दैनिक विश्राम घंटों के साथ जोड़ने पर विवाद हो गया है. रेल मंत्रालय ने कहा कि हाल में उसने लोको पायलट के लिए कई सुविधाएं उपलब्ध कराई हैं, जैसे 900 से अधिक इंजनों में मूत्रालय की सुविधा, 7,000 से अधिक इंजन में एयर कंडीशनिंग प्रणाली और रेलवे के पूरे जाल में 558 रनिंग रूम स्थापित करना शामिल है.
रेलवे के अधिकारियों ने कहा कि 2013-14 में ये संख्याएं शून्य थीं. आवश्यकतानुसार, रनिंग रूम में महिला लोको रनिंग स्टाफ़ को शौचालय सुविधा सहित अलग कमरे या ‘क्यूबिकल’ उपलब्ध कराए जा रहे हैं. लोको यूनियन ने कहा कि शहर से बाहर की दो या तीन दिन की यात्रा के बाद उन्हें 16 घंटे का आराम मिलता है (जिसे मुख्यालय विश्राम भी कहा जाता है). इसके अलावा, उन्हें महीने में चार बार 30 घंटे का आवधिक आराम (साप्ताहिक विश्राम) पाने का अधिकार है. यूनियन ने कहा कि मौजूदा कानूनी प्रावधान के अनुसार, इन दो श्रेणियों के विश्राम को मिलाकर सप्ताह में चार बार कुल 46 घंटे का विश्राम दिया जाना चाहिए.
दूसरी ओर, रेल मंत्रालय ने 30 घंटे के साप्ताहिक विश्राम में 16 घंटे के दैनिक विश्राम को शामिल कर लिया है. रेलवे बोर्ड के सूचना एवं प्रचार विभाग के कार्यकारी निदेशक दिलीप कुमार ने हाल ही में मंत्रालय द्वारा ‘रनिंग स्टाफ’ को प्रदान की गई सुविधाओं के बारे में बताया, ‘‘रनिंग स्टाफ के सदस्य के मुख्यालय पहुंचने के बाद 16 घंटे का मुख्यालय विश्राम दिया जाता है और 30 घंटे या 22 घंटे (जब भी आवश्यक हो) का आवधिक विश्राम प्रदान किया जाता है. चूंकि आवधिक विश्राम भी मुख्यालय विश्राम ही है, इसलिए 16 घंटे के मुख्यालय विश्राम की आवश्यकता आवधिक विश्राम के दौरान पूरी हो जाती है.
लोको यूनियन ने कहा कि लोको रनिंग स्टाफ के ड्यूटी घंटे और आराम अवधि भारतीय रेलवे सेवक (कार्य के घंटे और आराम अवधि) नियम, 2005 और भारतीय रेलवे अधिनियम, 1989 के अधीन तय की जाती है. लोको पायलट ने कहा कि चूंकि रिक्तियों और नयी ट्रेनों की शुरुआत के कारण काम का दबाव कई गुना बढ़ गया है इसलिए परिचालन सुरक्षा के लिए विश्राम का मुद्दा बहुत महत्वपूर्ण है. इसलिए अब इस पर ध्यान देना महत्वपूर्ण है. उनके अनुसार, चूंकि मुख्यालय में 16 घंटे का विश्राम और साप्ताहिक विश्राम में 30 घंटे का विश्राम जोड़ दिया गया है, इसलिए व्यावहारिक रूप से उन्हें केवल 14 घंटे का ही साप्ताहिक विश्राम मिल पाता है. लोको यूनियन ने कहा कि अगर समस्या का समाधान नहीं हुआ तो उनके पास देशव्यापी हड़ताल पर जाने के अलावा कोई विकल्प नहीं होगा.













































































