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Southern Railway : पत्नी की डिलेवरी के लिए गये लोको पायलट का छुट्टी आवेदन रद्द, ड्यूटी से किया अनुपस्थित

प्रतीकात्मक

CHENNAI.  रेलकर्मियों खासकर लोको पायलट को काम के दायित्व दबाव के बीच परिवार के साथ सामस्य स्थापित करने में कितनी मानसिक व शारीरिक पीड़ा का सामना करना पड़ता है इसका उदाहरण दक्षिण रेलवे में बीते दिनों सामने आयी एक घटना में सामने आया है. यहां एक लोको पायलट जो प्रसव के समय अपनी गर्भवती पत्नी के साथ रहना चाहता था न सिर्फ उसका अवकाश आवदेन रद्द कर दिया गया बल्कि उसके द्वारा पूरी की गयी ड्यूटी से भी उसे अनुपस्थित करार दे दिया गया.

घटना 8 अप्रैल की है. जब बिबिन जोसेफ पालघाट डिवीजन में मंगलुरु मालगाड़ी लेकर जा रहे थे. उन्हें गर्भवती पत्नी से एसओएस मिला कि उन्हें प्रसव पीड़ा हो रही है. हालांकि इस बीच वह लगभग तीन घंटे तक ट्रेन चलाकर गंतव्य स्थान पर पहुंचे और ड्यूटी ऑफ किया. क्रू कंट्रोलर को पूरी बात बताने के बाद छुट्टी का अनुरोध किया.

THE HINDU में प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार ड्यूटी में रहने के कारण लोको पायलट का मोबाइल ऑफ मोड में था. उन्हें निर्धारित स्थल पर पहुंचने के बाद ही यह पता चला कि पत्नी शाम से उनसे संपर्क करने की कोशिश कर रही थी. यहां से श्री जोसेफ ट्रेन से केरल में अपने पैतृक स्थान लगभग 390 किलोमीटर दूर तिरुवल्ला पहुंचे. यहां पत्नी को निजी अस्पताल में भर्ती कराया, जहां अगली सुबह एक नवजात का जन्म हुआ.

जब पूरा परिवार नए सदस्य के आने का जश्न मना रहा था जोसेफ को ड्यूटी से अनुपस्थित किये जाने का संदेश मिला. उन्हें बताया गया कि उनका अवकाश आवेदन स्वीकृत नहीं हुआ है और उन्हें ड्यूटी ऑफ नहीं करने के कारण अनुपस्थित करार दिया गया है. हालांकि इस मामले को ऑल इंडिया लोको रनिंग स्टाफ एसोसिएशन ने जीएम स्त्र पर उठाया और पूरे घटनाक्रम के लिए मंगलुरु के मुख्य क्रू कंट्रोलर को जिम्मेदार ठहराया है.

दक्षिण रेलवे महाप्रबंधक से हस्तक्षेप करने की मांग करते हुए इस बात पर आश्यर्च जताया गया कि परिवार के किसी सदस्य को तत्काल चिकित्सा की आवश्यकता के समय लोको पायलट के अवकाश आवेदन को खारिज करना और 9 अप्रैल से अब तक ड्यूटी से अनुपस्थित मान लिया जाना गंभीर कृत्य है. हालांकि बाद में रेल प्रशासन ने लोको पायलट के अवकाश आवेदन को तो स्वीकार कर लिया लेकिन उन्हें विशेषाधिकार अवकाश नहीं दिया गया. इस मामले में ऑल इंडिया लोको रनिंग स्टाफ एसोसिएशन ने आपत्ति जताते हुए जीएम से हस्तक्षेप का अनुरोध किया है. यह मामला पूरे जोन में चर्चा का विषय बना हुआ है.

पूरे प्रकरण में रेल प्रशासन की प्रतिक्रिया नहीं मिल सकी है.

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